अभी-अभी -सुप्रीम कोर्ट को अब गवर्नर ने दिखाया ठेंगा, वामपंथियों और अवार्ड वापसी गैंग में मचा हड़कंप..

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सुप्रीम कोर्ट के पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाने के बाद देश के लोगों का गुस्सा थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. इस फैसले के बाद अवार्ड वापसी गैंग, वामपंथियों तो कई बिकाऊ मीडिया के पत्रकारों की तो जैस लॉटरी ही लग गयी है. तो इस हिन्दू विरोधी फैसले पर खुद अब गवर्नर का गुस्सा फट पड़ा है.

गवर्नर ने सुप्रीम कोर्ट को दिखाया ठेंगा !
अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक पूरे दिल्ली एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट के बैन लगाने के बाद जहाँ वामपंथी विचारधारा और कुछ दोगले पत्रकार सोशल मीडिया पर जश्न मना रहे हैं. जबकि कई व्यापारियों का हज़ार करोड़ रुपया डूब गया. ऐसे में अब त्रिपुरा के राजयपाल का गुस्सा फट पड़ा है उन्होंने ट्विटर पर लिखा है “कभी दही हांडी,आज पटाखा ,कल को हो सकता है प्रदूषण का हवाला देकर मोमबत्ती और अवार्ड वापसी गैंग हिंदुओ की चिता जलाने पर भी याचिका डाल दे !”. आपको बता दें तथागत रॉय अपने बेबाक अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं.

मीडिया से बात करते हुए राजयपाल ने कहा कि वो एक हिन्दू होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बेहद नाखुश हैं, ये एक बिना सोचा समझा लिया गया फैसला है. क्योंकि ये समुदाय को उसके उत्सव से जुड़े एक अहम पहलू से वंचित करता है. इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर राज्यपाल की तारीफ करी और कहा हमें आप पर गर्व है.
पत्रकार मना रहे हैं जश्न
दरअसल सुप्रीम कोर्ट के पटाखे पर पाबन्दी के बाद कई पत्रकार निधि राज़दान , सागरिका घोष सबने इस फैसले पर जश्न मनाया है. तो वहीँ युवराज सिंह ने भी दिवाली पर प्रदुषण की बात करी है. जबकि वीरेंदर सेहवाग ने धूम धाम से दिवाली मानाने का सुझाव दिया है.

चेतन भगत ने शुरू करी थी सबसे पहले मुहीम, मुहर्रम के खूनखराबे पर भी रोक लगेगी?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में सबसे पहले लेखक चेतन भगत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए पटाखों की बिक्री पर बैन लगाने को गैर-जरूरी बताया था. उन्होंने सवाल किया कि किस आधार पर किसी की परंपराओं पर बैन लगाया जा रहा है? भगत ने यह भी कहा था कि केवल हिंदुओं के त्योहार पर बैन क्यों लगाने की हिम्मत क्यों दिखाई जाती है? क्या जल्द ही बकरियों की बलि और मुहर्रम के खूनखराबे पर भी रोक लगेगी? जो लोग दिवाली जैसे त्योहारों में सुधार लाना चाहते हैं, मैं उनमें यही शिद्दत खून-खराबे से भरे त्योहारों को सुधारने के लिए भी देखना चाहता हूं.’
चेतन भगत ने एक ट्वीट में लिखा, ‘बिना पटाखों के बच्चों के लिए दिवाली का क्या मतलब है?’ लेखक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का बैन परंपराओं पर चोट है. उन्होंने कहा कि बैन की जगह रेगुलेशन बेहतर विकल्प हो सकता था. चेतन भगत ने मामले में अपनी नाखुशी जाहिर करने के बाद प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए कई सुझाव भी दिए थे.
उन्होंने कहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट की हालत सुधारना भी प्रदूषण पर लगाम लगाने का एक बढ़िया विकल्प हो सकता है. उन्होंने लिखा, ‘नए विचारों के साथ आइए, बैन के साथ नहीं.’ दिल्ली-एनसीआर की खराब आबो-हवा सुधारने के लिए चेतन ने एक हफ्ते के लिए बिजली और कारों का इस्तेमाल नहीं करने का भी सुझाव दिया.
तो वहीँ इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश सरकार में गृह मंत्री ने भी ट्विटर पर बड़ा एलान कर दिया था कि एमपी में कोई पटाखे पर बैन नहीं है. यहाँ दिल खोल कर दिवाली मनाइये और दिल्ली वालों को भी मायूस होने की ज़रूरत नहीं है उन्हें एमपी में पूरी आज़ादी है धूम धाम से दीवली मानाने की.
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