नगर पंचायत पीपीगंज में विधुत पोल लगाने में भारी घोटाला पकड़ में आया

अस्थानिय निवासी पेशे से चिकित्सक एवं पूर्णवास मनोवैज्ञानिक वार्ड नंबर 10 के विमल जायसवाल ने जनसुनवाई पोर्टल पर पीपीगंज के सिमा के अंतर्गत आने वाले गोरखपुर सोनौली मुख्य मार्ग के दोनों तरफ शासन के निर्देश एवं शासनादेश का उल्लंघन कर नगर पंचायत द्वारा विधुत्त पोल लगवाने एवं विधुत्त कराड कराने में कई गई भारी तकनीकी एवं वित्तिय अनियमित के संदर्भ संख्या 40018817005616 के माध्यम से शिकायत दर्ज करवाया गया था जो मुख्य सचिव नगर विकास के द्वारा जांच के लिए जिलाधकारी गोरखपुर को सौपा गया था जिलाधकारी गोरखपुर द्वारा अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत पीपीगंज को जांच कराने के लिए निर्देशित किया गया लेकिन अधिशासी अधिकारी द्वारा तकनीकी एवं भौतिक जांच की जगह केवल खाना पूर्ति कर मामले को पोर्टल पर निस्तारित दिखा दिया गया जिस पर शिकायत कर्ता ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन व प्रभारी अधिकारी नगर पंचायत गोरखपुर को जांच के दंड7 में प्रत्यावेदन दिया जिसको संज्ञान में लेते हुए अपर जिलाधकारी प्रशासन ने नगर निगम गोरखपुर के अवर अभियंता विधुत्त पथ प्रकास एवं विधुत्त को जांच अधिकारी नियुक्क्त करते हुए ये निर्देशित किया कि विलंतम एक सप्ताह के अंदर शिकायत कर्ता के उपस्थित में शिकायत जांच विन्दुओं के सापेक्ष तकनीकी एवं भौतिक सत्यापन कर आख्या प्रस्तुत करने को कहा जिसके अनुसार जांच अधिकारी द्वारा दिनांक 10 10 2017 को मामले का तकनीकी एवं भौतिक सहत्यापन मौके पर जाकर शिकायत करता एवं भारी भीड़ की उपस्थिति में पोल को उखड़वा खुदवा कर अर्थिंग व भूमिगत केवल जो विधुत्त सप्पलाई के लिए लगानी थी कि जांच की तो पाया कि pwt के मानकों के आधार पर कराई गई आवरण पुस्तिका में कार्य शंख्या के मानकों की जबरदस्त धज्जियां उड़ाई गई है जो पोल मानक कर अनुसार 172 kgका होना चाहिए वह केवल 75 kg का धर्मकांटा करने पर निकला जो जमीन के अंदर 1 3 6 के अनुपात में सीमेंट कंक्रीट एवं बालू के ढलाई के साथ 1.8 मीटर की गहराई पर होना चाइये वो केवल 30 सेंटीमीटर की गहराई में बिना ढलाई के पोल लागया गया था अर्थिंग के नाम पर केवल एक फिट का लोहा का रॉड व 2 फिट का लोहे का तार लगाकर खानापूर्ति किया गया था इसी तरह था तकनीकी एवं आर्थीक अनिमियता का जीता जागता प्रमाण शिद्ध हुआ और जबकि अभी मामला जांच में था और प्रभारी अधिकारी ऊपर जिलाधकारी प्रशासन ने जांच होने के बाद किसी भी प्रकार का भुगतान का निर्देश दिया था उसका उलंघन करते हुए अधिशासी अधिकारी ने पुराने तिथि में तत्कालीन नगर अध्यक्ष के हस्ताक्षर से कार्य लागत का 80%(अस्सी परसेंट) भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया मामले की तह में जाने पर और अभिलेखों का निरीक्षण करने पर पाया गया कि अपने गलती को छुपाने के लिए बडे पैमाने पर वाइटनर शाफ़ेदी लगाकर छेड़ छाड़ करने की कोशिश तत्कालीन नगर अध्यक्ष एवं कार्यालय के क्लर्क द्वारा किया गया जिसको अधिशासी अधिकारी ने नियमो को अनदेखा करते हुए मामले को दबा कर भारी वित्तीय अनियमितता करने का प्रयास किया गया विमल कुमार जायसवाल द्वारा शासन एवं जिलाधकारी गोरखपुर से यह मांग की गई कि भारी भ्र्ष्टाचार के पकड़ में आने के बाद अविलम्ब दोषियों पर मुकदमा दर्ज करा कर सख्त से सख्त कार्यवाही कर रिकवरी का आदेश जारी करे ताकि ऐसे लोगो को सबक मिले!!