सेना के शहीदों के ताबूत पर, राजनीति करने वालो को सेना का जवाब ,सात जवानों की तवांग में शहादत

पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश के तवांग में इंडियन एयरफोर्स का एक हेलीकॉप्टर एमआई-17 क्रैश हो गया और इस हादसे में दो ऑफिसर्स समेत पांच जवान शहीद हो गए। जो जवान शहीद हुए उसमें पांच एयरफोर्स और दो सेना के थे। इस हादसे के बाद कुछ तस्वीरें सामने आईं जिसमें दिखाया गया था कि कैसे जवानों के शवों को बॉडी बैग्स की जगह गत्ते के डिब्बों में लाया गया था। इन तस्वीरों पर सवाल उठाए गए कि शहीदों के सम्मान का यह कौन सा तरीका है? पूरे देश में इस पर बहस जारी है और सेना की ओर से भी इस पर बयान जारी किया गया। अब बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट, बीएसएफ ने इस पर एक ओपेन लेटर लिखा है और इस पूरे मामले को एक सियासी मसला करार दिया है।

क्या है पूरी चिट्ठी :
‘चार पांच रोज़ पहले ट्वीटर, फेसबुक और व्हाट्सएप्प पर कुछ मित्रों ने एक चित्र लगाया जिसमे एयरफोर्स का मुख्यालय है, कुछ जवान अधिकारी खड़े है, और सात सैनिकों के शव हैं जो पॉलीथिन में पैक करके गत्ते के अंदर लिपटे थे।
इस चित्र के साथ मित्रों ने मोदी विरोध की जबरदस्त भड़ास निकाली प्रथम दृष्टया गुस्सा जायज़ था मगर ताबूत के बहाने लोगो ने खूब वाहियातगिरी की मगर सच्चाई समझने की न तो कोई कोशिश करता है न समझना चाहते हैं ।
दरअसल एक चॉपर तवांग में चीन बॉर्डर के पास आग लगने से दुर्घटनाग्रस्त हो गया। एयरफोर्स का दूसरा चॉपर जो तलाश में गया उसे जले हुए चॉपर का मलबा मिला, उन्होंने सभी शव जो जल चुके थे को इकट्ठा किया पास की एक चौकी से कुछ गत्ते के कार्टून लिए और उन शवों को लेकर एयरफोर्स मुख्यालय तवांग आये।
वहां जैसे ही चॉपर से सब शव उतारे ,किसी ने फोटो ले ली, उसके बाद मुख्यालय में उन्हें ताबूत बनवाकर पूरे सम्मान के साथ झंडे में लपेट कर एयरपोर्ट के लिए रवाना किया गया।

सेना ने दिया पूरा सम्मान :
उन्होंने आगे लिखा, ‘सेना ने इस हंगामे के बाद सिर्फ इतना कहा कि भविष्य में इस चीज़ का भी ख्याल रखा जाएगा। मित्रों, ज़रा सोचिए जंगल मे जले हुए नष्ट हुए चॉपर को ढूंढने में लगा चॉपर क्या सात ताबूत जंगल मे साथ लेकर जाता। शवों को कैसे उन वायु सैनिकों ने इकट्ठा किया, पास की आर्मी चौकी से जो कुछ मिला जिसमे वे शवों को मुख्यालय तक ला सके।
सेना की अपनी परम्परा है उसमे सैनिकों के शव को पूरा सम्मान दिया जाता है ,मगर लोगों ने इस इमेज को नुकसान पहुंचाया है, सिर्फ अपना सियासी मक़सद , खुन्नस निकालने के लिए। इतने संवेदनशील मुद्दे पर भी लोग सियासत करने लगते हैं लानत है।