गोरखपुर के युवाओं के प्रेरणा स्रोत है श्री के.के. श्रीवास्तव “डाइरेक्टर जनरल -CAG”

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कहते हैं आसमां में सुराग क्यों नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो,
दुष्यंत कुमार की यह गजल भले ही देखने मे कुछ पंक्तियां हों पर इसके एक एक शब्द प्रेरणा के स्त्रोत से अभिभूत हैं।।।
इसी प्रकार गोरखपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनने का कार्य कर रहे हैं गोरखपुर में जन्म लिए भारतीय सिविल सेवा परीक्षा को उत्तीर्ण कर भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के डाइरेक्टर जनरल के.के.श्रीवास्तव….
के के श्रीवास्तव का जन्म गोरखपुर की पावन धरती पर 1960 में हुआ, प्रारंभिक शिक्षा उत्तीर्ण करने के बाद होनहार कुलदीप ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर अर्थशास्त्र से 1980 में पास किया।।
मेहनतकश कुलदीप अपने दिल में भारतीय सिविल सेवा का सपना संजोए लगातार अर्थशास्त्र विषय से अपने आप को तैयार करने में लग गए और उनकी मेहनत 1983 में रंग लाई जब वह भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा में शामिल हुए।।।
इसके उपरांत लगातार कुलदीप अपनी ईमानदार छवि की बदौलत केरल, गुजरात ,झारखंड तथा मध्य प्रदेश के राज्य में प्रधान महालेखाकार के पदों पर शुसोभित हुए।।।।।
बहुआयामी प्रतिभा के धनी कुलदीप एक कवि तथा आलोचक भी हैं उनके अंग्रेजी में कविताओं की तीन किताबें ineluctable stillness{2005},An armless hand writes {2008},shadows of the real{2012} प्रकाशित हो चुकी है।।
उनकी हिंदी में कविताओं को किताब अंधेरे से निकली कविताएं फरवरी 2017 में वाणी प्रकाशन नई दिल्ली से प्रकाशित हुई, यह हमारे लिए गर्व की बात है कि वह भारत के कुछ कवियों में है जिनकी अंग्रेजी कविता की किताब shadows of the real कि जनवरी 2017 में मास्को में रशियन भाषा में अनुवाद प्रकाशित हुआ।।।
इनकी तीनों किताब पर समीक्षा देश तथा विदेश के समाचार पत्रों तथा साहित्यिक मैगजीनों में प्रकाशित हुए हैं ।।।साहित्य अकादमी ने उनकी किताबों की समीक्षा करते हुए इंटरनेट लिटरेचर में लिखा है की “” श्रीवास्तव की कविताएं बहुत ही गंभीर प्रकृति की है तथा उनमें एक दार्शनिक की झलक मिलती है ।।।
*गोरखपुर टाइम्स* के एडिटर इन चीफ से बातचीत में कुलदीप श्रीवास्तव जी ने बताया कि किसी भी गंभीर कविता को लिखने के लिए गंभीरता के साथ अध्ययन की भी आवश्यकता होती है इसलिए मैं लगातार गम्भीरता के साथ अध्ययन करने का प्रयत्न करता हूं इसी के साथ उनका कहना है कि एक अच्छी कविता कि न शुरुआत होती है ना अंत ,इसलिए कविताएं अन्य विधाओं से अलग है।।।
श्रीवास्तव स्वभाव से बहुत मिलना – जुलना पंसद नहीं करते तथा एकांत प्रिय है।
उनकी हिन्दी में अनुवादित कविताओं के बारे में राजस्थान के अंग्रेजी के प्रोफेसर नरदेव शर्मा ने देश बंधु समाचारपत्र में लिखा है कि “ हिन्दी में अंग्रेजी से अनुवादित अनेकों कविताओं में उनको बारंबार पढ़ने का अदभुत आकर्षण है क्योंकि इन कविताओं के लालित्य में मानव मन को सहज रूप से उदलित करने वाली विविध भावनाओ – दर्प , विषाद , हर्ष , उपेक्षा , घृणित स्वार्थ, कृत्रिम खोखलापन, आध्यात्मिक पाखंड, मर्मस्पर्शी वात्सल्य का एकाकीपन , अनैतिकता की दुर्गंध , रूढ़िवादी विसंगतियों का प्रभावकारी समावेश किया गया है जिसकी समीक्षा इस आलोच्य में की गई है ।
जो सबंध सुरभि का पुष्प से है, दीपक का रोशनी से है, श्वासों का जीवन से है वही अटूट संबध प्रकृति का काव्य से है । प्रकृति के विविध रंग – रंगीले बिंब कविताओं को विभिन्न भावों से अनुप्राणित करते हैं ।‘’
कनाडा के प्रसिद्ध कवि डॉ. स्टीफन गिल ने श्रीवस्तव को “ एक चिंतक ’’ बताया तथा उनकी कविताओं में “ प्रतीको ’’ के प्रयोग की प्रशंसा की । भारत के कवि जयंत महापात्र ने श्रीवास्तव की कविताओं को “ गहरा तथा गतिमय ’’ कह वर्णन किया । इंग्लैंड के जाने – माने कवि वर्नड एम. जैक्शन ने श्रीवास्तव की किताबों की तुलना टी.एस. ऐलियट की कविताओं तथा सैम्यूल बेकेट के नाटको से की हैं। न्यूजीलैंड की समीक्षक पैट्रीसिया प्राईम ने पोयट्री इंटरनेशनल नाम के जरनल मे लिखा , “श्रीवास्तव जो कहा नही गया , जो हुआ है तथा जो बिखरा है उसके कवि हैं ।
उनके कवितायेँ एक स्वतंत्र सेल्फ जिसका एक माननीय चेहरा है की रचना करती हैं ।’’
इसके अलावा श्रीवास्तव समाचार पत्रो द डेली स्टार, द पार्यानयर तथा किताब सिंगापुर के लिए साहित्यिक आलोचनायें लिखते हैं । द पायनियर समाचार पत्र मे श्रीवास्तव ने श्री नरेंद्र मोदी की कविता की किताब ए जर्नी की साहित्यिक समीक्षा की जिसे सर्वत सराहा गया ।
उनके द्वारा लिखित समीक्षा गोरखपुर वेटिंग फार ए न्यू डान जो द पायनियर मे मई 2016 मे प्रकाशित हुई को भी काफी सराहा गया है ।
*गोरखपुर टाइम्स* से बातचीत करते हुए कुलदीप पुरानी यादों में खो कर भावुकता के साथ युवाओं को यह सलाह देते हैं कि आज का भारत युवा भारत है और मुझे वह पल और गौरवान्वित करते हैं जब गोरखपुर का युवा वैश्विक पटल पर अपनी पहचान छोड़ता है ।।।
परंतु वास्तविकता यह है कि गोरखपुर के युवाओं के लिए स्वयं प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं IA&AS कुलदीप श्रीवास्तव।