Sunday, February 23, 2020
Uttar Pradesh

अद्भुत घटना: चार घंटे की ‘मौत’ के बाद जिंदा हो गया बच्चा….

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यहां एक नवजात चार घंटे तक बिना सांस लिए जीवित रहा, केवल दिल की धड़कन चल रही थी। डॉक्टरों ने कृत्रिम श्वांस देकर बच्चे को नई जिन्दगी दी। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे ‘एप्निया’ कहते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे केस कम ही देखने को मिलते हैं। जिले में यह पहला केस है। मृतप्राय अवस्था में लाए थे नवजात जिला अस्पताल के एसएनसीयू (सिक एंड न्यूू बोर्न केयर यूनिट) में एक नवजात बच्चे को भर्ती कराया गया। मां पूजा और पिता विपिन उसे मृतप्राय अवस्था में लाए थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश यादव, स्टाफ नर्स सोनम सोनकर व वीरेंद्र कुमार की टीम ने रेडिएंट वार्मर में रखकर बच्चे का परीक्षण किया तो हृदय में धड़कन के अलावा किसी अंग में कोई मूवमेंट नहीं था। मासूम के फेफड़े संकुचित थे और नाक-मुंह बंद करने पर भी कोई हरकत नहीं कर रहा था। बालक को कृत्रिम श्वांस दी गई और लगातार परीक्षण चलता रहा। चार घंटे बाद जब वह रोया तो डॉक्टरों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

लाखों बच्चों में एक को होता है एप्निया

डॉ. सुरेश यादव ने बताया कि बच्चे का श्वसन तंत्र काम नहीं कर रहा था। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे एप्निया कहते हैं। इसमें जान जाने का खतरा रहता है। अब बच्चा खतरे से बाहर है। अन्य जांचों के लिए उसे कानपुर रेफर किया है, लेकिन उनके अभिभावक नहीं ले जा रहे हैं। इस तरह का केस लाखों बच्चों में एक को होता है। गर्भ में जब बच्चे के दिमाग का विकास नहीं हो पाता है, तब इस तरह की दिक्कत प्रीमैच्योर बच्चों में हो जाती है।

इस तरह लगाया पता

एसएनसीयू में मल्टी पैरा मॉनीटर मशीन लगी है। नवजात को उसमें लिटाकर शरीर मे प्रोब लगा दिए जाते हैं, जिससे हार्ट बीट का पता चल जाता है। इसी में रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन तंत्र) के लिए बच्चे के मुंह और नाक में प्रोब मास्क लगाकर ऑक्सीजन का लेबल पता लगाया जाता है, जिसे मेडिकल साइंस में एचसीओ2 कहा जाता है। इसी से पता चला कि बच्चा सांस नहीं ले रहा है। जन्म के बाद 30 सेकेंड तक कोई बच्चा नहीं रोता है, तो वह एप्निया की श्रेणी में आ जाता है, लेकिन इस बच्चे ने चार घंटे तक कोई मूवमेंट नहीं किया, जो अद्भुत घटना थी।

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