Wednesday, March 20, 2019
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अनोखी शादी : घर से घोड़ी चढ़कर दूल्हे को ब्याहने बारात लेकर पहुंची दुल्हन, लोगों ने किया स्वागत…

बुलंदशहर: घोड़ी चढ़कर बारात लेकर दुल्हन को बिठाने वाले दूल्हे तो आपने बहुत देखे होंगे लेकिन दूल्हे को ब्याहने के लिए घर से चली दुल्हन की बारात शायद ही कभी देखी हो. ये बात अपने आप में दिलचस्प है कि घर से बेटी की डोली नहीं बारात जाएगी. यह बेटी ने नहीं. बेटी के पिता ने तय किया था. समाज को यह दिखाने के लिए कि वर्षों से चली आ रही रूढ़ियां ऐसे ही टूटती है. हम बात कर रहे हैं बुलंदशहर के चौहान परिवार की जिसने इस अनोखी शादी को करवाया है.

बुलंदशहर के स्याना कस्बे की बेटी राधा चौहान की शादी 13 दिसंबर को थी. दिल्ली के जीटीबी नगर निवासी सनी चौहान उसे ब्याहने बारात लेकर स्याना के नवाब फार्म हाउस पहुंचे थे. मगर सनी की बारात से पहले राधा की बारात उसके घर से चली. बारात की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बेटी की घुड़चढ़ी और बारात के लिए पिता बॉबी चौहान ने पंजाब के अमृतसर से स्पेशल खालसा बैंड मंगाया था. बारात के ऊपर फूलों की वर्षा कराई गई और दुल्हन की बग्गी के आगे भी फूल बिछाए गए थे. बारात में सबसे आगे इलाके के मशहूर आतिशबाज अपने हुनर का मुजाहिरा कर रहे थे.

घर से निकली बेटी की बारात फार्म हाउस तक पहुंची. वहां दूल्हे ने आगे बढ़कर बारात और अपनी दुल्हन का स्वागत किया. इसके बाद दूल्हे की घुड़चढ़ी हुई और फिर राधा और सनी की जयमाल की रस्म अदा की गई. जमकर जश्न हुआ और फिर विवाह की परंपरा में सात फेरे लेने के बाद राधा चौहान अपने दूल्हे के साथ दिल्ली रवाना हो गई.

दरअसल, बेटी की घुड़चढ़ी और बारात की सोच राधा चौहान के पिता बॉबी चौहान की थी. उनकी जिंदगी में उनकी पहली संतान के रूप में राधा बेटी की शक्ल में बेटा बनकर आई थी. राधा बमुश्किल 9 साल की रही होगी जब उसकी मां रीता चौहान का देहांत हो गया. कम उम्र में ही राधा ने अपने पिता और दो छोटे भाइयों के साथ घर को संभाला. साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी. राधा ने परास्नातक तक की पढ़ाई की है और उसके पति सनी चौहान एक न्यूज़ चैनल में अच्छे पद पर है.

राधा के पिता बॉबी चौहान कहते हैं कि उनकी बेटी बेटों से कतई कम नहीं. जब बेटों की शादी होती है तो उनकी शानदार घुड़चढ़ी की जाती है. मैंने सोचा कि जब बेटों की घुड़चढ़ी की परंपरा है तो बेटी की क्यों नहीं? इसीलिए समाज को दिखाने के मकसद से कि बेटियां बेटों से भी आगे हैं, मैंने राधा की घुड़चढ़ी और बारात आयोजित करने का फैसला किया. मैं मानता हूं कि बेटी का कन्यादान नहीं करना चाहिए. वह हमारे जीवन का हिस्सा है उसे हम दान कैसे कर सकते हैं.

राधा के छोटे भाई जीवन चौहान कहते हैं कि मां के चले जाने के बाद हम दोनों भाइयों को बहन ने मां जैसा स्नेह दिया और हमेशा हमारा हौसला बढ़ाया. वह हमारे बड़े भाई जैसी है और हमारे जीवन के हर फैसले में उसका दखल है. बारात और घुड़चढ़ी का आईडिया पापा और हम दोनों भाइयों का था. हम चाहते थे कि हमारी बहन जब ससुराल जाए तो हम उसे बड़े भाई की तरह सम्मान दें.

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