Saturday, September 25, 2021

Big Breaking: गहलोत के घर में छापेमारी 5.45 करोड़ का जुर्माना

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने भाई अग्रसेन गहलोत के साथ- फाइल फोटो

  • गहलोत के भाई अग्रसेन ने कहा- मुख्यमंत्री का भाई होने के कारण झूठे मामले में फंसाकर बदनाम किया जा रहा
  • 2009 के इस मामले में पहली बार ईडी की एंट्री हुई है, इससे पहले यह मामला कस्टम के पास था

प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 11 साल पुराने एक मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर में एंट्री मारकर सभी को चौंका दिया। सीधे तौर पर यह मामला सरकार से सस्ती दर पर खरीदे गए उर्वरक को किसानों के बीच ना बांटने और ऊंची कीमत पर इसके निर्यात से जुड़ा है। कमिश्नर ऑफ कस्टम की जांच के बाद गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत की फर्म को दोषी मानते हुए 5.45 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था।

इस मामले में कई अन्य फर्म पर भी जुर्माना लगाया गया था। जुर्माने के खिलाफ सभी ने अहमदाबाद स्थित ट्रिब्यूनल में चुनौती देकर स्टे ले रखा है। अग्रसेन शुरू से ही इस मामले में खुद को बेदाग बताते रहे हैं। वे कहते हैं कि मुख्यमंत्री का भाई होने के कारण उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। 11 साल बाद इस मामले में ईडी की एंट्री और राज्य में मौजूदा सियासी उठापटक को लेकर इस छापेमारी को लेकर कांग्रेस ने दबाव बनाने की कार्रवाई का आरोप लगाया है।​​​​​​​

क्या है मामला, समझिए?

मुख्यमंत्री के भाई अग्रसेन गहलोत पर आरोप है कि 2007 से 09 के बीच उर्वरक बनाने में अहम एक प्रोडक्ट को किसानों में बांटने के नाम पर सरकार से सब्सिडी पर खरीदा गया। इस प्रोडक्ट को निजी कंपनियों को बेचकर भारी मुनाफा कमाया। दस्तावेजों के अनुसार, उस समय अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी। उस दौर में अग्रसेन की फर्म ने किसानों के नाम पर सरकार से सस्ती दर पर पोटाश खरीद कर उसका एक बड़ा हिस्सा कुछ अन्य फर्म के माध्यम से निर्यात कर दिया। पोटाश को फैल्सपार पाउडर व इंडस्ट्रियल साल्ट बताकर उसका निर्यात कर दिया गया।​​​​​​​

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कैसे शुरू हुई जांच?

अहमदाबाद स्थित डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू के क्षेत्रीय कार्यालय ने शक के आधार पर जांच शुरू की। अधिकारियों ने पाया कि एक फर्म एमओपी (खाद बनाने में इस्तेमाल पदार्थ) निर्यात कर रही है, जबकि ऐसा किया जाना नियम विरुद्ध है। मलेशिया और ताइवान की फर्म को फैल्सपार और इंडस्ट्रियल साल्ट के नाम पर सस्ती दर पर लिया गया पोटेशियम क्लोराइड का एक्सपोर्ट कर दिया गया। इसका उपयोग नॉन यूरिया उर्वरक बनाने में किया जाता है।

देश से एमओपी का निर्यात नहीं किया जाता है, क्योंकि हम पूरी तरह से इसके इम्पोर्ट पर निर्भर हैं। इंडियन पोटाश लिमिटेड इसका आयात करती है और उसके जरिए ही किसानों में यह बांटी जाती है। जांच में सामने आया कि एमओपी को कुछ फर्म ने पैकिंग बदलकर एक्सपोर्ट कर दिया। उन्होंने यह उत्पाद इंडियन पोटाश लिमिटेड के डिस्ट्रिब्यूटर से खरीदा, जबकि डिस्ट्रिब्यूटर इसे सिर्फ किसानों को ही बेच सकते थे।

सिंडिकेट की तरफ भी जांच की सुई
गुजरात के कांडला पोर्ट के कमिश्नर ने जांच में पाया कि इस पूरे मामले में एक सिंडिकेट काम कर रहा है। बड़े पैमाने पर किसानों का हक मारकर करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है। इसके बाद इस घोटाले की परत दर परत जांच की गई। सामने आया कि इंडियन पोटाश लिमिटेड के कुछ डिस्ट्रिब्यूटर ने अपने दस्तावेजों में गड़बड़ी कर सारा एमओपी किसानों को बेचना दिखाया था। पर इन्हें उन फर्म को बेचा गया, जो एक्सपोर्ट के कारोबार से जुड़ी थीं।

इन फर्मों ने पैकिंग बदलकर दूसरे प्रोडक्ट के नाम से एमओपी एक्सपोर्ट किया। इस मामले में सबसे पहले दिनेश चन्द्र अग्रवाल का नाम सामने आया था। उससे पूछताछ के बाद ही जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक पहुंची थीं।

गुजरात के कांडला पोर्ट के कमिश्नर ने जांच में पाया कि इस पूरे मामले में एक सिंडिकेट काम कर रहा है और व्यापक स्तर पर किसानों का हक मार के करोड़ों का घोटाला किया जा रहा है।

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अग्रसेन गहलोत की भूमिका?

कमिश्नर ऑफ कस्टम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि इंडियन पोटाश लिमिटेड ने अग्रसेन गहलोत की फर्म को अपना डिस्ट्रिब्यूटर बनाया था। उसके जरिए किसानों को सस्ती दर पर एमओपी दी जानी थी। अग्रसेन की फर्म ने अपने दस्तावेजों में एमओपी को किसानों को बेचना दिखाया, पर बिक्री अहमदाबाद की कुछ फर्म को की गई। जिन्होंने इसे निर्यात कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अग्रसेन को सारा पेमेंट नकद किया गया। इसमें बिचौलिये की भूमिका निभाने वाला व्यक्ति अग्रसेन का करीबी ही था। अग्रसेन का मालूम था कि इस तरह एमओपी बेचना गलत है। लेकिन, उन्होंने अपनी फर्म के दस्तावेजों में हेराफेरी कर इसे किसानों को बेचना दर्शा दिया।

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कमिश्नर ऑफ कस्टम के सामने दर्ज कराए बयान में अग्रसेन ने अपने ऊपर लगे सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि किसी बिचौलिये ने किसानों के नाम पर उनसे एमओपी खरीदा था। अब उनकी जानकारी में यह नहीं है कि उसने इसे कुछ निर्यातकों को बेचा या फिर किसानों को।

रिपोर्ट में कमिश्नर ने लिखा कि अग्रसेन बार-बार अपने बयान से पलट रहे हैं और सही जानकारी नहीं बता रहे हैं जबकि वह पूरे घोटाले से जुड़े रहे हैं।

अग्रसेन की फर्म पर लगाया था 5.45 करोड़ का जुर्माना
जांच के बाद कमिश्नर ने अग्रसेन की फर्म अनुपम कृषि पर 5.45 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इस मामले में कुछ अन्य फर्म पर भी भारी जुर्माना लगाया गया था। इसके बाद फर्मों ने अहमदाबाद स्थित ट्रिब्यूनल में कमिश्नर के आदेश को चुनौती दी। अग्रसेन ने भी इस आदेश को चुनौती दी कि उन पर गलत जुर्माना लगाया गया है।

अब ईडी की एंट्री
बताया जाता है कि इस मामले में बड़ी मात्रा में कर की चोरी की गई साथ ही सरकार की ओर से दी गई सब्सिडी का दुरूपयोग किया गया। ऐसे में मनी लॉड्रिंग का मामला भी बनता है। इस कारण अब ईडी ने इस मामले में एंट्री मारी है।

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