Monday, September 20, 2021

अमेरिका के राष्ट्रपति #DonaldTrump ने #Hydroxychloroquine की सप्लाई को लेकर भारत को धमकी तक दी है. ऐसा क्या हुआ कि मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाला ड्रग # महामारी के बीच बहस का मुद्दा बन गया

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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और रिसर्चर वैक्सीन और दवा की खोज में जुटे हुए हैं. इस भयानक महामारी का कोई इलाज न होने के चलते पूरी दुनिया में 75,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. हालांकि एक मौजूदा दवा पर इन दिनों काफी बहस छिड़ी हुई है. अमेरिका में इस दवा को लेकर व्हाइट हाउस के अधिकारियों के बीच तनातनी भी देखने को मिली है. ये दवा मलेरिया की ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दवा की सप्लाई को लेकर भारत को धमकी तक दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर भारत इसकी सप्लाई नहीं करेगा तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी.

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भारत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को ICMR ने मंजूरी मार्च में ही दे दी थी. हालांकि इसका इस्तेमाल सिर्फ हाई रिस्क वाले लोगों को बीमारी से बचाने के लिए होगा. अमेरिका में ट्रंप इस दवाई के प्रयोग को लेकर कई दिनों से उत्साहित हैं. यहां तक कि ट्रंप डॉक्टरों से इस दवा को लोगों को देने के लिए कह रहे हैं.  

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बाजार में Plaquenil के नाम से बिकने वाला ड्रग हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन असल में मलेरिया ठीक करने की दवाई है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन को क्विनीन से बनाया जाता है. क्विनीन, सिनकोना के पेड़ की छाल से निकाला जाता है. 1930 के दशक में जर्मन वैज्ञानिकों ने मलेरिया के इलाज के लिए सिंथेटिक क्लोरोक्वीन बनाया था. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, क्लोरोक्वीन का कम नुकसानदायक वर्जन है.

मार्च की शुरुआत में फ्रांस के एइक्स-मार्सेली यूनिवर्सिटी के रिसर्चर डीडियर राओल्ट ने कुल 36 COVID-19 के मरीजों पर इस दवा का ट्रायल शुरू किया. शुरुआती ट्रायल के बाद ही उत्साहजनक नतीजे जारी कर दिए गए.

इनमें से ज्यादातर मरीजों में हल्के से मध्यम लक्षण थे. 1 से लेकर 15 मार्च के बीच रिसर्चर और उनकी टीम ने इनमें से 20 मरीजों को हर दिन 600 मिलीग्राम हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दिया. कुछ लक्षण को देखते हुए एजिथ्रोमाइसिन नामक एंटीबायोटिक को भी इस इलाज में जोड़ दिया गया. 16 मरीजों को ये ड्रग नहीं दिया गया. 

नतीजा ये रहा कि जिन मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दिया गया, उनमें वायरल लोड की कमी देखी गई. 6 दिनों के बाद 70 प्रतिशत मरीजों में, जिन्हें ड्रग दिया गया था, कोरोना वायरस की मौजूदगी निगेटिव मिली.

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‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट कहती है कि ये रिसर्च पेपर पब्लिश होता, उससे पहले ही अमेरिका के फॉक्स न्यूज पर एक कार्यक्रम चला था. टकर कार्लसन के उस कार्यक्रम में एक वकील ने खुद को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से संबंधित बताते हुए इस रिसर्च को कोरोना वायरस का 100% इलाज बता दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के बाद 19 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार इस ड्रग के बारे में बात की थी.  

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अभी तक ये बात साफ नहीं हो पाई है. लैब टेस्ट में इस ड्रग ने कोरोना वायरस के खिलाफ कुछ प्रभाव दिखाया है लेकिन फिलहाल वैज्ञानिकों का कहना है कि निर्णायक रूप से कुछ भी कहना जल्दबजी होगी. इसके अलावा ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट का कहना है कि जिस फ्रेंच स्टडी को ट्रंप आधार मान रहे हैं, उस ट्रायल में सही नियमों का पालन नहीं किया गया था.

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