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Tuesday, June 2, 2020

असत्य पर सत्य के विजय का पर्व विजयदशमी आज

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Gorakhpur Times | गोरखपुर टाइम्स

भदोही ,ज्ञानपुर। विजय दशमी को दशहरा के नाम से भी जाना असत्य पर सत्य के विजय का पर्व विजयदशमी आजजाता है। यह पर्व असत्य पर सत्य की विजय का पर्व है। यह हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन मास के शुक्लपक्ष की को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावणका वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी।को ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग शस्त्र पूजन करते हैं और नया कार्य प्रारम्भ करते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए या दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में वीरता की सूचक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव किया जाता है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।

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