Saturday, July 31, 2021

असफलता को स्वीकार करें !

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उत्तर प्रदेश बोर्ड के, हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के लगभग 56 लाख बच्चों के परीक्षा का परिणाम 27 जून 2020 को दोपहर 12 बजे आने वाला है । ऐसे में यह स्वाभाविक है कि कुछ बच्चे बहुत अच्छा नम्बर लाएंगे कुछ कम अच्छा नम्बर लाएंगे । कुछ बच्चे इस परीक्षा में असफल भी होंगे ।

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी परिणाम भिन्नता से पूर्ण होगा । ऐसे में यह आवश्यक है कि आप अपने बच्चों को न केवल उत्साहित करें उनके साथ रहे बल्कि सबसे महत्चपूर्ण बात को समझाए वह यह है कि “असफलता को स्वीकार करें” । जी हां आपको थोड़ा यह शब्द अप्रत्याशित लग सकता है । पर इस सच्चाई से जितना अधिक आप हम सब इस बात को स्वीकार कर लेंगे उतना ही अधिक हम अपने बच्चों को मजबूत बनाएगे भविष्य की अनिशिचतता से लड़ने के लिए ।

बच्चो में बचपन से ही हम अपने ख्वाबो को उन्हें पाने के लिए अग्रसरित करते है । कभी हम यह नही सोचते कि वो क्या चाहते है । कुछ बच्चे कम मार्क्स पाने पर डिप्रेशन का शिकार हो जाते है । कुछ असफल होने पर गलत कदम उठा लेते है ।

पर हम सब को आज न केवल यह स्वयं समझना है बल्कि बच्चो को भी समझाना है कि अच्छा मार्क्स या इस परीक्षा में पास फेल होने आपके जीवन की अंतिम परीक्षा का परिणाम है ।

यह परीक्षा और परिणाम तो मात्र एक शुरुआत है जिसकी स्वीकारोक्ति आपको जीवन मे अनेको परीक्षा औऱ उसके परिणामो से लड़ने और बाहर आने का साहस प्रदान करेगी । जीवन मे अनेको परीक्षाएं होती है या यूं कहें ही जीवन परीक्षाओ का भंडार है तो कोई अतिशयोक्ति नही होनी चाहिए ।

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10 या 12 के परिणाम से जीवन निर्धारित नही होता । आज आप अपने आस पास देखेगे तो स्वयं पता चलेगा कम मार्क्स पाने वाला व्यक्ति या किसी वर्ष परीक्षा में पास न होने वाला व्यक्ति कही बेहतर स्थान और स्थिति में होगा, उस व्यक्ति की तुलना में जिसने अच्छा मार्क्स पाया हो या पहले प्रयास में ही परीक्षा पास की हो ।

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इस बात को भी समझना चाहिए कि पास होने वाले व्यक्ति का महत्च तभी है जब फेल होने वाले व्यक्ति हो । अधिक मार्क्स पाने वाले छात्र का महत्व तभी है जब कम मार्क्स पाने वाले छात्र हो । जरूरत है तो अपने महत्व को समझने की ।

आप हम सभी इस बात को जानते है कि असफलता यह दर्शाती है की सफलता ले लिए प्रयास पूरे मन से नही हुआ । जबकि जमीनी सच्चाई इससे कही भिन्न होती है । यानी कि एक छात्र के असफल होने के पीछे अनेको कारण हो सकते है । सबसे बड़ा कारण अच्छे और बुरे दोनो परिणामो के लिए माँ बाप को ठहराया जा सकता है । क्योंकि यही वो लोग है जो अपने बच्चों को सबसे बेहतर जानते है ।

यदि हम प्रारम्भ से बच्चों को असफलता से लड़ना उसे स्वीकार करना सीखा दे तो बच्चे जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या से घबरायेंगे नही बल्कि उससे पार पा जायेगे । शुरुआत आज से अभी से करनी होगी ।

पहले हम स्वयं असफलता को स्वीकार करना सीखें उसके पश्चात बच्चो को भी सिखाये । जिस तरह एक सिक्के के दो पहलू होते है ठीक वैसे ही किसी के जीवन के दो पहलू है सफलता और असफलता दोनो किसी के जीवन मे रहते है कोई कही सफल होता है तो कही असफल । जीवन को समान्य बनाने के लिए दोनों की आवश्यकता पड़ती है ।

हम एक ऐसी सदी में आगये हैं जहाँ असफलता को लोग सम्मान देना नही चाहते अनेको बुराई करते है पर शायद इन बात को भूल जाते है जीतने वाले का महत्व हारने वाले से है। यदि हारने वाले या असफल होने वाले लोग न हो तो किसी भी सफलता का कोई महत्व नही ।

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इन सब बातों से ऊपर आपके स्वयं का खुश रहना महत्वपूर्ण है यदि आप इस परिस्थिति में खुश है तो आपसे बड़ा संतुष्ट कोई नही है । कई लोग बड़ी से बड़ी सफलता पा करके खुश नही रहते कही न कही उन्हें भी असफलता का सामना करना पड़ता है ।

आज जिन भी छात्र का परिणाम आ रहा है उन्हें स्वयं से यह निर्णय लेना चाहिए कि परिणाम कुछ भी हो उसे हम स्वीकार करेंगे और आगे भविष्य के लिए कठोर परिश्रम करेंगे । किसी भी अप्रिय निणर्य करने के पहले आप एक बार अपने माँ बाप के बारे में जरूर सोचियेगा की जिसने नौ महीने आपको अपने पेट मे रखा जिसने आपकी खुशी के लिए सब हारा वो आपके उस निर्णय के पश्चात क्या महसूस करेंगे ।

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याद रखिये आज का परिणाम आपके जीवन का अंतिम परीक्षा परिणाम नही है यह बस शुरुआत है परीक्षाओं के संसार में जहां सफलता और असफलता कदम कदम पर है । जरूरत है तो उसे स्वीकार करके आगे और मजबूती के साथ लड़ने और आगे बढ़ने की ।

असफलता से डरे नही बल्कि उसे स्वीकार करके लड़ना सीखिए यही जीवन है और मूलमंत्र जीवन को बेहतर बनाने का । कई असफल लोगो ने समाज और देश को जो दिया है उसे कई सफल व्यक्ति आज तक नही दे पाया है । अतः विचार व्यवहार और परिणाम में सामंजस्य बनाकर कल के परिणाम को फेस करें । आपके उज्ज्वल भविष्य की ढेरों शुभकामनाएं ।

डॉ. अजय कुमार मिश्रा (लखनऊ)

drajaykrmishra@gmail.com

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