Friday, October 18, 2019
Uttar Pradesh

आखिर क्यों क्षत्रिय नेता एक-एक कर अखिलेश यादव का साथ छोड़ रहे? ..इसके पीछे अपरिपक्वता या अहंकार…

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पिता की विरासत नहीं संभाल पाए और पार्टी में एक के बाद एक बड़े नेताओं ने उनका साथ छोड़ दिया. इनमें पूर्वांचल और मध्य उत्‍तर प्रदेश के बड़े राजपूत नेताओं ने पार्टी छोड़कर यह साबित भी कर दिया कि उनका साथ मुलायम से था न की अखिलेश से. अमर सिंह हों या फिर रघुराज प्रताप सिंह या अब पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर सभी ने एक-एक कर अखिलेश से दूरी बनाई और किनारे हो गए. अब सवाल यह उठता है कि क्या इसके पीछे अखिलेश की अपरिपक्वता है या फिर कम समय में ज्यादा ताकत मिलने की वजह से उनके अंदर पनपा अहंकार, जिसने अखिलेश के साथ पार्टी की नैया भी डुबो दी?
अखिलेश पिता मुलायम की बराबरी नहीं कर सकते समाजवादी पार्टी में लंबे समय तक मुलायम सिंह के साथ रहने वाले पूर्वांचल के नेता और एमएलसी यशवंत सिंह की मानें तो अखिलेश यादव मुलायम सिंह की बराबरी नहीं कर सकते. मुलायम सिंह यादव अमर सिंह से लेकर रघुराज प्रताप सिंह तक सबको अपने साथ लेकर चलते थे. चंद्रशेखर और मुलायम सिंह एक-दूसरे के लिए सदन में भी खड़े होते थे, लेकिन अखिलेश ने चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर को कोई सम्मान नहीं दिया. इतना ही नहीं रघुराज प्रताप सिंह को अखिलेश अपना प्रतिद्वंदी समझने लगे, जिसकी वजह से राजा भैया को भी अखिलेश से दूरी बनानी पड़ी. यशवंत स्‍पष्‍ट तौर पर कहते हैं कि अखिलेश राजनीतिक तौर पर सधे व्यक्ति नहीं हैं. यही वजह है कि उन्होंने लोगों को सम्मान नहीं दिया, जिसकी वजह से एक-एक कर सभी लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया. इनमें खुद यशवंत सिंह भी शामिल हैं.
अखिलेश यादव में मुलायम सिंह जैसी बात नहीं है. वह पार्टी को चलाने में सक्षम नहीं है और लोगों को अब उन पर भरोसा नहीं रहा. इसकी वजह से वह चाहे अमर सिंह हों या फिर राजा भैया सभी ने अखिलेश का साथ छोड़ दिया. अखिलेश में राजनीतिक अपरिपक्वता अखिलेश को मुलायम सिंह यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सबसे बड़े सूबे का मुख्यमंत्री बना दिया और पार्टी की कमान उन्हें सौंप दी. इसकी वजह से अखिलेश ने पहले दिन से ही अपने चाचा शिवपाल की बेइज्जती की और फिर एक-एक कर मुलायम के सहयोगियों को दूर करते गए. अमर सिंह और राजा भैया जो हमेशा मुलायम सिंह के साथ खड़े रहते थे, अखिलेश उनको भी अपने साथ नहीं रख सके. अब चंद्रशेखर का बेटा नीरज शेखर भी बीजेपी में शामिल हो गए हैं, जबकि चंद्रशेखर और मुलायम सिंह के रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं. अखिलेश में राजनीतिक अपरिपक्वता है. वह लोगों की बात नहीं सुनते हैं. अपने पिता की बात भी नहीं मानते हैं. यही वजह है कि उनके अहंकार और कम समय में ज्यादा ताकत मिलने से अखिलेश ने लोगों को नजरअंदाज किया. ऐसे में लोगों ने अपना रास्ता चुन लिया. अखिलेश अगर समय रहते नहीं चेते तो आने वाला समय उनके लिए ठीक नहीं होगा और 30 साल के लंबे करियर जो अभी बाकी है, उस पर भी ग्रहण लग सकता है.

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