Monday, July 22, 2019
Uttar Pradesh

आतंकियाें के सर्च आपरेशन में हुए हादसे के दौरान शहीद हुआ गाजीपुर का लाल…

मां भारती की सेवा करते हुए रविवार को सुहवल थाना क्षेत्र के ताड़ीघाट निवासी मेजर विकास सिंह शहीद हो गए। जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में सर्च आपरेशन के दौरान अंबुश (घात) लगाते समय खाई में गिर गए। इसकी सूचना सेना के अधिकारियों ने उनकी पत्नी आंचल सिंह को दी जो मायके में थीं। आंचल के पिता शिवपूजन सिंह ने शहीद की मां सरोज सिंह को मेजर विकास सिंह के शहीद होने की सूचना दी। इससे परिवार में कोहराम मच गया। शहीद विकास सिंह 2010 में 50वीं राष्ट्रीय राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए थे। इस समय वह जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में बतौर मेजर तैनात थे। आतंकियों की घुसपैठ की सूचना पर वह जवानों संग सर्च आपरेशन कर रहे थे। इसी दरम्यान अंबुश लगाते हुए वह फिसलकर गिर गए। तुरंत उन्हें सेना के कमांड अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका। इनके पिता जितेंद्र सिंह की काफी पहले मौत हो चुकी थी। शहीद मेजर अपने मां-बाप के इकलौते पुत्र थे। मेजर विकास की शुरू से ही देश सेवा की इच्छा रही। उनकी प्राथमिक शिक्षा दीक्षा बंगाल में हुई। 28 फरवररी 2018 को बलिया की रहने वाली आंचल सिंह के साथ उनकी शादी हुई। इनकी तीन माह की एकमात्र पुत्री वृद्धि सिंह है। वर्तमान में शहीद मेजर विकास सिंह की पत्नी अपने इकलौती पुत्री एवं अन्य परिजनों के साथ वाराणसी के महमूरगंज में रहती हैं। मेजर विकास के शहादत की सूचना पर पत्नी बेसुध हो गईं। वहीं मां का रो-रोक कर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद के घर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना पर सुहवल थानाध्यक्ष राजू कुमार भी शहीद के घर पहुंचे। मेजर विकास सिंह के चाचा देवेंद्र सिंह के अनुसार सर्च आपरेशन के समय अंबुश लगाने के दौरान फिसकर वह शहीद हो गए। सोमवार को दोपहर तक शहीद का पार्थिव शरीर आने की उम्मीद है। बताया कि सेना के अधिकारी ने फोन कर हादसे की जानकारी दी है। जल्द ही नए मकान में कराने वाले थे गृह प्रवेश : शहीद मेजर विकास सिंह करीब 25 दिन की छुट्टी बिताकर चार मार्च को गांव से ड्यूटी पर गए थे। उनके दोस्त व पड़ोसी भी उनकी बातों को याद करके भावुक हो जा रहे हैं। वह अपने मां से कह कर गए थे कि जल्द ही आऊंगा और वाराणसी के महमूरगंज में बनाए गए नए मकान में गृह प्रवेश कराऊंगा। इधर, शहीद की मां ने परिजनों से कहा था कि रामनवमी के पूजनोत्सव के बाद वह अपने पुत्र से बात करेगी। तब तक उनकी शहादत की सूचना मिलने पर वह बेसुध हो गई।

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