Saturday, July 31, 2021

आरटीओ : जुर्माने से पहले ‘जुर्माना’…

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सड़क पर नियम कानून तोड़ने वाले वाहनों की कौन कहे, आरटीओ अफसर अपने परिसर में ही हो रही वसूली पर आंख मूंदे हुए हैं। रोजाना प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर 30 (पेट्रोल) और 40 (डीजल) का शुल्क निर्धारित है लेकिन वसूले जा रहे है 80 से 120 रुपये, वह भी बड़ी दादागीरी से। एक तो ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं है दूसरे कोई आपत्ति करता है तो ये लोग प्रमाण देने से ही इंकार कर देते है। सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए है। वहां पर बनाए गए वीडियो में वसूली साफ दिख रही है। हैरानी की बात यह कि यह सब कुछ वहीं पर हो रहा है जहां पर इस पर कार्रवाई करने वाले सभी अफसर बैठते है लेकिन उनकी नजर इस पर नहीं पड़ती है। अब क्यों नहीं पड़ती है, इसे आसानी से समझा जा सकता है।
प्रदूषण प्रमाण पत्र पर पहले कोई ज्यादा ध्यान नहीं देता था लेकिन नए प्रावधान में इसकी जुर्माना राशि ज्यादा होने की वजह से लोग इस कमी को दूर करने की कवायद में लग गए है। लोगों की इसी मजबूरी या फिर यूं कहे नियम के पालन करने की कोशिश का फायदा दुकानदार उठा रहे हैं। तीन दुकानें है और वहां पर लोग ठगे जा रहे हैं। लोग भी सोचते है कि प्रमाण पत्र मिल जाए इस वजह से शिकायत करने नहीं जाते है।
रोजाना 300 वाहनों का बनता है प्रमाण पत्र
पहले जहां रोजाना 25 से तीस वाहन ही प्रमाण पत्र को आते थे वह संख्या अचानक बढ़कर 300 के करीब हो गई है। नए प्रावधान में जुर्माना से बचने के लिए लोग अचानक जागरूक हुए हैं। यही वजह है कि वसूली भी बढ़ गई है। पहले दस या बीस ज्यादा लेते थे तो अब निर्धारित शुल्क का पांच गुना तक वसूल लिया जा रहा है।
ऑनलाइन प्रदूषण प्रमाणपत्र ही मान्य
01 अगस्त के बाद परिवहन विभाग में ऑनलाइन प्रदूषण प्रमाणपत्र ही स्वीकार किए जा रहे हैं। आरटीओ ने तीन मान्यता प्राप्त प्रदूषण जांच केंद्रों को विभाग का आइडी पासवर्ड जारी किया हुआ है। इन्हीं केंद्रों पर प्रदूषण प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं।
नियम के विपरीत आरटीओ पर कर रहे दो जांच
ममता वेलफेयर सोसाइटी को हुमांयूपुर दक्षिणी एवं शिवमूर्ति सेवा संस्थान को जगन्नाथपुर में प्रदूषण जांच के लिए आरटीओ ने मान्यता दी है लेकिन ये दोनों केंद्र वहां न चलकर नियम के विपरित आरटीओ के पास ही चलाए जा रहे हैं। तीसरी संस्था अर्पणा प्रदूषण जांच केंद्र केवल डीजल गाड़ियों की जांच के लिए मान्य है जबकि यहां पैट्रोल गाड़ी की भी जांच की जा रही है। साथ ही इन तीनों केंद्रों पर शुल्क से चार गुना ज्यादा रुपये वसूल किए जा रहे हैं।
मनमानी से जाम भी लगता है
अवैध रुप से आरटीओ रोड पर प्रदूषण की जांच कर रहे केंद्र रोड पर ही गाड़ियों की लाइन लगवा रहे हैं जिससे वहां लंबा जाम लग जा रहा है। यह स्थिति दिनभर रहती है। इनकी वजह से आरटीओ में दूसरे कामों से आने वाले लोगों को भी सांसत झेलनी पड़ती है।
कार्रवाई की कौन कहे, पक्ष में बोले अफसर
आरटीओ में प्रदूषण प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली पर कार्रवाई के जिम्मेदार अफसर ही उनके पक्ष में बयान दे रहे हैं। एआरटीओ श्याम लाल का कहना है कि वसूली पर कार्रवाई विभाग की ओर से शुल्क का निर्धारण वर्ष 2000 में किया गया था लेकिन महंगाई बढ़ने के साथ ही शुल्क नहीं बढ़ा। जिन केंद्रों को मान्यता दी गई है वह अपनी जांच मशीन लगाए हैं। समय के अनुसार शुल्क बढ़ाकर ले रहे हैं।
यह है नियम
शासन की ओर से निर्धारित शुल्क पेट्रोल के लिए 30 और डीजल के लिए 40 रुपये होता है। ऑनलाइन होने के बाद से ही रुपया अधिकृत केंद्र को ही मिलता है। कोई अन्य शुल्क नहीं देना होता है।

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