Sunday, August 1, 2021

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आज की दुनिया में तेजी से पैर पसारने वाली बीमारी है कैंसर, जो शरीर के किसी भी अंग में किसी भी रूप में फैल सकती है। यह एक गंभीर बीमारी है जिससे दुनिया भर में मौत का ग्रास बनने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैंसर से बचाव और उसके प्रति जागरूकता पैदा करने के इरादे से ही हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है।
विश्व कैंसर दिवस मनाने की शुरूआत सन् 1933 में हुई और अंतर्राष्ट्रीय कैंसर संघ द्वारा जिनेवा में पहली बार विश्व कैंसर दिवस मनाया गया। कैंसर के बढ़ते प्रकोप और इसके भयावह परिणामों को देखते विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रत्येक वर्ष विश्व कैंसर दिवस मनाने का निर्णय लिया गया, ताकि आने वाले समय में इसके प्रति जागरूकता बढ़े और लोगों को इससे बचाया जा सके।
कैंसर जैसी बीमारी से बचने का सबसे सही उपाय है, सावधानी और सतर्कता। कैंसर से बचने के लिए इसके विभि‍न्न कारणों और लक्षणों के बारे में जनकारी रखना बेहद आवश्यक है। वर्तमान समय तक कैंसर कई रूपों में पैर पसार चुका है, जिनमें मुख कैंसर ,स्तन कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, ब्लड कैंसर, पेट का कैंसर शामिल है।

■■■ छह प्रमुख लक्षण ■■■

1- पेशाब और शौच के समय आने वाला खून।
2- खून की कमी जिससे एनीमिया हो जाता है, थकान और कमजोरी महसूस करना, तेज बुखार आना और बुखार का ठीक न होना।
3- खांसी के दौरान खून का आना, लंबे समय तक कफ आना, कफ के साथ म्यूकस आना।
4- स्तन में गांठ, माहवारी के दौरान अधिक स्राव होना।
5- कुछ निगलने में दिक्कत होना, गले में किसी प्रकार का गांठ होना, शरीर के किसी भी भाग में गांठ या सूजन होना।
6- मुंह मे बराबर छाले आना और मुंह खोलने मे परेशानी होना l
■■■ कैंसर के प्रकार और लक्षण■■■
● मुख का कैंसर :
अधिक समय तक मुंह मे छाले बने रहना, मुंह खोलने में और निगलने में कठिनाई, जीभ मोटा होकर खूब लार निकलना, मुंह से दुर्गंध आना .. …बराबर गुटका, सुर्ती, पान मसाला ,खैनी का प्रयोग कैंसर पैदा करते हैँ l
●स्तन कैंसर :
अधिक प्रसव व शिशु को स्तनपान न कराने से स्‍तन कैंसर होता है। डिंबग्रंथि (ओवरी) से उत्सर्जित हार्मोन भी इसको पैदा करते हैं।
● गर्भाशय का कैंसर :
छोटी उम्र में विवाह, अधिक प्रसव, संसर्ग के दौरान रोग, प्रसव के दौरान गर्भाशय में किसी प्रकार का घाव होना और वह ठीक होने से पहले गर्भधारण हो जाए तो 40 की उम्र के बाद गर्भाशय का कैंसर होने का खतरा रहता है। मीनोपॉज के बाद रक्तस्राव होना, और दुर्गंध आना, पैरों व कमर में दर्द रहना इसके लक्षण हैं।
● रक्त कैंसर (ल्यूकेमिआ) :
एक्सरे और विकिरण प्रणाली से किरणें यदि शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाएं तो अस्थियों को प्रभावित करती हैं, जिससे उसके अन्दर खून के सेल्स भी प्रभावित होते हैं। मुख से खून निकलना, जोड़ों व हडि्डयों में दर्द, बुखारा का लगातार कई दिनों तक बना रहना, डायरिया होना, प्लीहा व लसिका ग्रंथियों के आकार में वृद्धि होना, सांस लेने में दिक्कत होना इसके प्रमुख
● लंग यानि फेफड़ों का कैंसर :
हल्की निरंतर खांसी आना, खांसी के साथ खून आना, आवाज में बदलाव आना, सांस लेने में दिक्कत होना इसके लक्षण हैं।
आमाशय का कैंसर :
पेट में दर्द, भूख बहुत कम आना, कभी-कभी खून की उल्टी होना, खून की कमी। पतले दस्त, शौच के समय केवल खून निकलना, आंतों में गांठ की वजह से शौच न होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
● सर्वाइकल कैंसर :
इसके फैलने के बाद रक्त-सामान या मलिन योनिक स्राव उत्पन्न करता है जो कि संभोग या असामान्य रक्त स्राव के बाद नजर आता है। सर्वाइकल कैंसर की प्रारंभिक अवस्थाएं पीडा, भूख की कमी, वजन का गिरना और अनीमिया उत्पन्न करती हैं।
ब्रेन कैंसर :
● ब्रेन कैंसर में मस्तिष्क या स्पाइनल कॉर्ड में गांठ होती है जिससे चक्कार आना, उल्टी होना, भूलना, सांस लेने में दिक्कत होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
अनियमित जीवनशैली का नतीजा है कैंसर जैसी घातक बीमारी। अनियमित दिनचर्या होने का प्रभाव शरीर की रोग-प्रतिरोध क्षमता पर पडता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण कई प्रकार के रोग शुरू होने लगते हैं। प्रदूषण और पोषक आहार की कमी के कारण कैंसर के ट्यूमर बढते हैं। कैंसर के 90 से 95 प्रतिशत मामले वातावरण और जीवन शैली के कारण होते हैं। कैंसर से जुडे जीवनशैली कारकों में एल्कोहल, धूप का प्रभाव, संक्रमण, तनाव, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख है।

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■■■ कैंसर के कारण■■■
●खान-पान का असर –
फास्ट फूड और जंक फूड का अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। समय की कमी के कारण लोग उचित तरीके सो लंच और डिनर नहीं कर पाते। लोग केवल पेट भरने के लिए खाना खाते हैं जिसके लिए फास्ट फूड से अच्छा विकल्प नहीं मिलता है। इसके अलावा तले-भुने और ज्यादा मसालेदार खाने से भी कैंसर होने की संभावना बढती है।
●लंबे समय तक काम करना –
मल्टीनेशनल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का असर उसमें काम कर रहे कर्मचारियों पर पडता है। पैसा कमाने और आगे बढने की होड के कारण आदमी खाना-सोना भूलकर लगातार कई घंटो तक काम करता रहता है। जिससे कारण आदमी अपने स्वास्‍थ्‍य के प्रति लापरवाह हो जाता है और कैंसर होने की संभावना बढ जाती है।
●देर रात तक पार्टी –
शहरी जीवन में लोग देर रात तक पार्टी करते हैं और फिर सुबह जल्दी उठकर काम पर चले जाते हैं। इससे शरीर को भरपूर नींद नहीं मिल पाती है और कम नींद लेने के कारण डायबिटीज और मोटापे की समस्या बढने लगती है। पर्याप्त नींद न लेने के कारण कैंसर होने का खतरा बढता है।
●व्यायाम और योगा न करना –
एक्स‍रसाइज और योगासन न करने से भी कैंसर का खतरा बढता है। क्योंकि व्यायाम न करने से शरीर में रक्त संचार अच्छे से नहीं होता है। व्यायाम न करने से कई सामान्य रोग भी शुरू हो जाते हैं।
●धूम्रपान और तंबाकू का सेवन –
तंबाकू और धूम्रपान का नियमित रूप से प्रयोग करने से कैंसर का खतरा कई गुना ज्यादा बढ जाता है। तंबाकू खाने से मुंह का कैंसर होता है और धूम्रपान से फेफडे का कैंसर होता है।
●दूषित पानी पीने से –
पानी पीने के कई फायदे हैं। लेकिन, अगर पानी दूषित हो तो कैंसर होने का खतरा बढ जाता है।
■■■ बचाव के उपाय :—■■■
अगर लोग जीवनशैली को ठीक रखें तो कैंसर के 40 प्रतिशत मामलों को रोका जा सकता है। इस शोध के अनुसार कई मामलों में कैंसर होने की वजह खराब जीवनशैली है। खराब जीवनशैली से तात्पर्य धूम्रपान, शराब पीना, स्वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचाने वाले भोजन और अधिक वजन से है।
●तंबाकू का सेवन ना करें
हमारे देश में कैंसर की मुख्य वजह तंबाकू है। धूम्रपान करने वालों के अलावा उसका धुआं लेने वालों (पैसिव स्मोकर्स) और प्रदूषित हवा में रहनेवालों को भी कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। तंबाकू या पान मसाला चबाने वालों को मुंह का कैंसर ज्यादा होता है। तंबाकू में 45 तरह के कैंसरकारी तत्व पाए जाते हैं। पान-मसाले में स्वाद और सुगंध के लिए दूसरी चीजें मिलाई जाती हैं, जिससे उसमें कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करनेवाले तत्व) की तादाद बढ़ जाती है। गुटखा (पान मसाला) चाहे तंबाकू वाला हो या बिना तंबाकू वाला, दोनों नुकसान करता है। हां, तंबाकू वाला गुटखा ज्यादा नुकसानदेह होता है। डॉक्‍टर अच्‍छी सेहत के लिए तंबाकू का सेवन न करने की सलाह देते हैं।
●एल्कोहल से करें परहेज
डॉक्‍टरों का कहना है कि यदि आपका आहार सही हो, तो रोजाना एक से दो पैग शराब पीना सेहत के लिहाज से सही है। लेकिन, इससे ज्‍यादा शराब कैंसर का भी कारण हो सकती है। अधिक शराब पीने से खाने की नली, गले, लिवर और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा हो सकता है। ड्रिंक में अल्कोहल की ज्यादा मात्रा और साथ में तंबाकू का सेवन कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। इसलिए कैंसर से बचने के लिए एल्कोहल का सेवन बंद करें।
●स्‍तन कैंसर की जांच
महिलाओं में स्‍तन कैंसर सबसे सामान्‍य कैंसर है। अधिकतर महिलायें इसके लक्षण से अनभिज्ञ रहती हैं, इसलिए यह बीमारी काफी फैल जाती है। इसलिए जरूरी है कि इसकी जांच करवाते रहा जाए। ऐसा नहीं है कि यह बीमारी केवल बुजुर्ग महिलाओं में ही होती है। युवा महिलायें भी इसकी शिकार हो सकती हैं। इसलिए स्‍तन कैंसर की नियमित जांच करते रहना चाहिए। आप यह जांच स्‍वयं भी कर सकती हैं। यदि स्‍तन में किसी प्रकार की गांठ या असामान्‍यता नजर आए तो फौरन चिकित्‍सक से संपर्क करें।
●महिलाओं में पेप स्मियर जांच
बच्चेदानी के कैंसर की पहचान और संभावना जांचने के लिए की जानेवाली यह सस्ती, सरल और पक्की जांच है। इसमें गर्भाशय में स्पैचुला डालकर नमूने के तौर पर सेल्स निकाले जाते हैं और उनकी जांच की जाती है। विवाह के तीन साल बाद से हर दो साल में यह जांच हर महिला को करवानी चाहिए।
●मांसाहारी भोजन कम करें
इंटरनैशनल यूनियन अगेंस्ट कैंसर (यूआईसीसी) ने स्टडी में पाया कि ज्यादा वसा युक्‍त भोजन करने वाले लोगों में ब्रेस्ट, प्रोस्टेट, कोलोन और मलाशय (रेक्टम) के कैंसर ज्यादा होते हैं। जर्मनी में 11 साल तक चली स्टडी में पाया गया कि वेज खाना खानेवाले लोगों को आम लोगों के मुकाबले कैंसर कम हुआ। कैंसर सबसे कम उन लोगों में हुआ, जिन्होंने 20 साल से नॉन-वेज नहीं खाया था। मीट को हजम करने में ज्यादा एंजाइम और ज्यादा वक्त लगता है। ज्यादा देर तक बिना पचा खाना पेट में एसिड और दूसरे जहरीले रसायन बनाते हैं, जिनसे कैंसर को बढ़ावा मिलता है।
●वायरस और बैक्टीरिया से बचाव करें
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से सर्वाइकल कैंसर हो सकता है। इससे बचने के उपाय हैं – एक ही पार्टनर से संबंध व सफाई का ध्यान रखना। पेट में अल्सर बनानेवाले हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से पेट का कैंसर भी हो सकता है, इसलिए अल्सर का इलाज वक्त पर करवाना जरूरी है।
●स्वस्थ आहार लें
पेड़-पौधों से बनीं रेशेदार चीजें जैसे फल, सब्जियां व अनाज खाइए। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट तत्व कैंसर पैदा करनेवाले रसायनों को नष्ट करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। शाकाहार में मौजूद विविध विटामिन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और कैंसर सेल्स फल-फूल कर बीमारी नहीं पैदा कर पाते। पेजवेर्टिव और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं। तेज आंच पर देर तक पकी चीजें कम खाएं।
● विटामिन बी 17 की कमी से कैंसर रोग पनप सकता है
इस कमी को पूरा करने के लिए खूबानी, सेब, पीच, नाशपाती, फलियां, अंकुरित दाल व अनाज, मसूर के साथ ही बादाम विटामिन बी 17 का बेहतरीन स्त्रोत है। इनके अलावा स्ट्रॉबेरी, ब्लू बेरी, ब्लैक बेरी, कपास व अलसी के बीच, जौ का दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस, धान, कद्दू, ज्वार, अंकुरित गेहूं, ज्वारे, कुट्टू, जई, बाजरा, काजू, चिकनाई वाले सूखे मेवे आदि विटामिन बी17 के अच्छे स्त्रोत हैं।
इन्हें अपनी रोज की डाइट में शामिल करके हम कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं।
होम्योपैथिक चिकित्सा
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होम्योपथी से कैंसर को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। यदि कैंसर जल्दी डायग्नोसिस हो जाए तो पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। यह बिना किसी तकलीफ के रोग को ठीक करने वाला उपचार होता है। होम्योपथी में कैंसर के लिए बहुत सारी दवाए हैं l चूंकि कैंसर एक घातक रोग होता हैं, अत: स्वयं चिकित्सा न करें, किसी कुशल होम्योपैथ से ही इलाज करवाना उचित है ।
यदि कैंसर से बचना चाहते हैं तो आपको अपनी जीवनशैली नियंत्रि‍त करनी होगी। इतना ही नहीं आपको अपने खानपान पर विशेष ध्यान होगा।

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