Tuesday, July 27, 2021

कोलकाता न्यूज केबल से हटने के बाद ABP संपादक को पुलिस ने भेजा समन: प्रेस फ्रीडम को लेकर ममता पर उठे सवाल

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विधायक विनय शंकर तिवारी किडनी की बीमारी से पीड़ित ग़रीब युवा के लिए बने मसीहा…

हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से किडनी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मदद हेतु युवाओं के द्वारा अपील की...

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अनिबार्न चट्टोपाध्याय और ममता बनर्जी

— कोलकाता न्यूज केबल से हटने के बाद ABP संपादक को पुलिस ने भेजा समन: प्रेस फ्रीडम को लेकर ममता पर उठे सवाल लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं —

क्या पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की नीतियों के कारण प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में आ चुकी है? क्या ममता सरकार कोरोना संकट के बीच प्रेस को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है? क्या बंगाल में राज्य सरकार के ख़िलाफ़ आवाज उठाने का मतलब अब नौकरी से हाथ धो बैठना हो गया है?

उक्त सभी सवाल आनंद बाजार पत्रिका के संपादक अनिबार्न चट्टोपाध्याय के इस्तीफे के बाद पैदा हुए हैं। जिन्होंने कुछ समय पहले कोरोना संकट के बीच ममता बनर्जी सरकार के ख़िलाफ़ अपने समाचार पत्र में एक न्यूज प्रकाशित करने की इजाजत दी थी और इसके बाद कोलकाता पुलिस ने उन्हें इस मामले के संबंध में समन भेज दिया था।

So Anirban Chattopadhyay, Anandabazar editor, walks into sunset, leaving chair to Ishani Dutta Ray. Did a top politician push the change in Prafulla Sarkar Street in Kolkata? @deepscribble @Shubhm @SandipGhose @angaraian @ShubhPulok1952 @Smita_Sharma @_Ushinor @szarabi @raydeep

— Shantanu Guha Ray (@ShantanuGuhaRay) June 1, 2020

बाद में खबर आई थी कि 31 मई को अनिबार्न चट्टोपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह अब ईशानी दत्ता 1 जून से एक्टिंग एडिटर की तरह काम करेंगी।

बता दें, चटर्जी को पुलिस द्वारा भेजे गए के समन की खबर तब सामने आई थी जब राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने 28 मई को ट्वीट कर बताया था कि उन्होंने इस मामले में मुख्य सचिव से अपडेट माँगा है।

Have sought update from Home Secretary @MamataOfficial as regards Summoning of Anirban Chattopadhyay, Editor @MyAnandaBazar by Kolkata Police at Hare Street police station
Press freedom is non negotiable. It is spine of democracy and guaranteed by Constitution. @IndEditorsGuild

— Governor West Bengal Jagdeep Dhankhar (@jdhankhar1) May 28, 2020

एक ओर जहाँ अनिबार्न के फैसले के पीछे गवर्नर ने सीएम ममता को जिम्मेदार बताया था। वहीं सीपीआई (एम) के एक नेता ने इसके लिए मोदी सरकार को उत्तरदायी कह दिया था।

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इससे पहले 25 मई को हारे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से चट्टोपाध्याय के पास नोटिस आया था कि उन्हें पूछताछ के लिए थाने आना है। मगर, यहाँ अनिबार्न ने पुलिस स्टेशन जाने की बजाय, उन्हें अपनी ओर से एक लेटर लिखा और बताया कि वह थाने में खुद नहीं आ पाएँगे।

Is it true that Anirban Chattopadhyay, Editor ABP, the highest circulated Bangla daily is sought to be arrested under certain fictitious but non-bailable charges? Is it dedicated to Modi’s first year 2nd term, meant to settle the score because of ABP upholding the secular values?

— Surjya Kanta Mishra (@mishra_surjya) May 30, 2020

उन्होंने पत्र में ये भी लिखा कि वे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर चुके हैं और उनकी उम्र की वजह से उन्हें इस कोरोना काल में सार्वजनिक स्थानों पर जाने की मनाही है।

अपने पत्र में समाचार पत्र के पूर्व संपादक ने लिखा कि पुलिस समन पर उनके ऑफिस का लीगल डिपार्टमेंट देख रहा है और फिलहाल अभी इससे आगे वह कुछ नहीं कहेंगे।

Talk about press freedom in West Bengal?
If you don’t dance to Mamata Banerjee’s tunes, then she will use police to intimidate and force you out of job!
Read this letter by Anirban Chattopadhyay, Chief Editor-AnandaBazar Patrika after he allowed few news critical of CM Mamata… pic.twitter.com/bTsi9WPhse

— BJP Bengal (@BJP4Bengal) June 1, 2020

इस पत्र को 1 जून को शेयर करते हुए भाजपा बंगाल ने ममता सरकार पर निशाना साधा था। भाजपा बंगाल के ट्विटर पर इसे शेयर करते हुए लिखा गया, “बंगाल में प्रेस स्वतंत्रता के बारे में बात करनी है? अगर आप यहाँ ममता बनर्जी के इशारों पर नहीं नाचेंगे तो वह पुलिस का इस्तेमाल करेंगी और आपको आपकी नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर देगी।”

गौरतलब है कि अनिबार्न के इस्तीफे के बाद से ही सोशल मीडिया पर ये प्रेस स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा गरमाया हुआ है। हालाँकि, ABP के पूर्व संपादक की पत्नी ने ममता सरकार पर लगाए जा रहे इन आरोपों से इंकार किया है। इस संबंध में उन्होंने पोस्ट करके बताया है कि उनके पति इस इस्तीफे पर पहले से विचार कर रहे थे। इसलिए ये मामला मीडिया की स्वतंत्रा का नहीं है।

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वहीं, वामपंथी पोर्टल द क्विंट के अनुसार, चटर्जी ने इस मामले पर उनसे कहा,” आनंदबाजार पत्रिका के एडिटर पद से इस्तीफा देने का फैसला मैंने काफी पहले लिया था। मैं एक साल से भी ज्यादा समय से खुद को इस जिम्मेदारी से मुक्त करने की सोच रहा था, लेकिन कुछ मुद्दे थे जिन्हें सुलझाना था।”

ABP editor Anirban Chattopadhyay did not quit due to Mamata’s pressure (given her dubious track record wrt press freedom) and neither was he questioned by cops, clarifies his wife.
Leaving it here, for spin masters to carry on with their jobs pic.twitter.com/uIdfZWEfRm

— Indrajit | ইন্দ্রজিৎ (@iindrojit) June 4, 2020

उल्लेखनीय है कि भले ही अनिबार्न और उनकी पत्नी इस मामले के संबंध में अपने ऊपर कोई भी राजनैतिक दबाव न होने की बातों का बयान दे रहे हों और ममता सरकार पर लग रहे सभी आरोपों को खारिज कर रहे हों। लेकिन ये ध्यान रखने वाली बात है कि ये पहला मामला नहीं है, जब बंगाल में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे हों।

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इससे पहले कोलकाता न्यूज का मामला पिछले माह प्रकाश में आया था, जब सरकार से सवाल पूछने पर कई केबल नेटवर्क से कोलकाता न्यूज गायब कर दिया गया था। जिसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाए थे कि ममता सरकार द्वारा ही कोलकाता न्यूज को प्रतिबंधित किया गया है।

Last evening, under sustained administrative pressure, cable networks in & around Kolkata pulled the plug on @calcutta_news , a tv network that was mildly critical of @MamataOfficial govt. I understand there is pressure to do the same to Sadhna News. 1/2

— Swapan Dasgupta (@swapan55) May 20, 2020

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