Thursday, August 22, 2019
Gorakhpur

खुशखबरी:- गोरखपुर से 31 मार्च से मुंबई की सीधी उड़ान…

मुम्बई, हैदराबाद और कोलकाता जाने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। 31 मार्च से मुम्बई और 30 अप्रैल से हैदराबाद और कोलकाता की उड़ान शुरू होने जा रही है। जी हां स्पाइस जेट और इंडिगो ने अपना समर शिड्यूल जारी कर दिया है। शिड्यूल के अनुसार 31 मार्च से स्पाइस जेट मुम्बई के लिए 180 सीटर बोईंग उड़ान सेवा शुरू करेगा जबकि इंडिगो 30 अप्रैल से कोलकाता और हैदराबाद के लिए 189 सीटर एयर बस की सेवा शुरू करने जा रहा है।

मुम्बई उड़ान के लिए स्पाइस जेट और गोरखपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी काफी दिनों से प्रयासरत थे। मुम्बई एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा स्लॉट और मंजूरी मिलते ही स्पाइस जेट ने शिड्यूल जारी कर दिया। उधर इंडिगो ने भी कोलकाता और हैदराबाद एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा भी उड़ान की मंजूरी मिलते ही शिड्यूल जारी कर दिया है।

तो हो जाएंगी सात उड़ानें

तीन नई उड़ानें शुरू होने से आने वाले समय में गोरखपुर से उड़ानों की संख्या सात हो जाएगी। उड़ानों के साथ ही गोरखपुर से रोजाना 2000 यात्रियों का आना-जाना हो जाएगा।

अभी दिल्ली की तीन और बंगलूरू की एक उड़ान

वर्तमान समय में गोरखपुर से दिल्ली के लिए तीन और बंगलूरू के लिए एक उड़ान हो रही है। यहां से स्पाइस जेट बोईंग, इंडिगो एयर बस और और एयर इंडिया एटीआर की सेवाएं दिल्ली के लिए दे रहा है। इसके साथ ही इंडिगो बंगलूरू के लिए भी एयर बस सेवा शुरू की है। अच्छी बात यह है कि यह उड़ानें रोजाना हैं और रोजाना ही सभी उड़ानें पैक होकर जा रही हैं।

तो महज ढाई घंटे में मुम्बई की उड़ान

वर्तमान में जहां ट्रेन से 33 से 40 घंटे का वक्त लगता है वहीं विमान से महज ढाई घंटे में मुम्बई पहुंच जाएंगे। हालांकि अभी उड़ान का समय निर्धारित नहीं है लेकिन जल्द ही टाइम टेबल जारी कर दिया जाएगा।

इंडिगो और स्पाइस जेट ने अपना समर शेड्यूल जारी किया है। इसमें 31 मार्च से स्पाइस जेट मुम्बई की सेवा शुरू करेगा वहीं इंडिगो 30 अप्रैल से कोलकाता और हैदराबाद की सेवा शुरू करने जा रहा है।

बीएस मीना, एयरपोर्ट निदेशक

एयरफोर्स ने एयरपोर्ट को दी आईएलएस की मंजूरी

एयरफोर्स ने एयरपोर्ट को आईएलएस (इन्स्टूमेंट लैंडिंग सिस्टम) के प्रयोग की मंजूरी दे दी है। आईएलएस के शुरू हो जाने से अब गोरखपुर से भी कोहरे में कोई उड़ान निरस्त नहीं होगी। इस सिस्टम से महज 500 मीटर की विजिविलिटी में भी लैंडिंग और टेकऑफ संभव हो सकेगा। जबकि इसके पहले 2000 मीटर पर ही उड़ानें संभव थीं।

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