Thursday, August 22, 2019
Gorakhpur

गोरखपुर के इन दो उद्योगपतियों को 30 दिनों में 150 एकड़ जमीन रजिस्ट्री करने का आदेश…

तारामंडल क्षेत्र में उद्योगपति ओम प्रकाश जालान और कालोनाइजर्स अनिल त्रिपाठी को आवंटित 150 एकड़ जमीन मामले में हाईकोर्ट ने अहम निर्णय दिया है। हाईकोर्ट ने जीडीए को 30 दिन के अंदर दोनों आवंटियों को 150 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री करने का आदेश दिया है। जीडीए के अधिकारी रजिस्ट्री की औपचारिकता पूरी करने में जुट गए हैं।

तारामंडल क्षेत्र में उद्योगपति ओम प्रकाश जालान को 100 और कालोनाइजर्स अनिल त्रिपाठी को आवंटित 50 एकड़ जमीन प्रकरण में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए आवंटियों को 30 दिन के भीतर आवंटित भूमि रजिस्ट्री करने का आदेश दिया है। जीडीए के अधिकारी रजिस्ट्री की औपचारिकता पूरी करने में जुट गए हैं। जीडीए द्वारा 150 एकड़ जमीन आवंटन को लेकर आवंटियों ने अवमानना का आरोप लगाते हुए लखनऊ खंडपीठ में अपील की थी। सुनवाई के दौरान जीडीए द्वारा दलील दी गई कि आवंटित जमीन पर वन विभाग द्वारा 9600 से अधिक पेड़ लगाये गये हैं।

उसके निस्तारित होने के बाद ही जमीन फ्री होल्ड की जा सकेगी। वहीं आवंटियों का कहना था कि आवंटित जमीन पर नाममात्र के पेड़ लगे हैं। जीडीए और वन विभाग ने कोर्ट के समक्ष 9600 से अधिक पेड़ लगने का साक्ष्य प्रस्तुत किया। जिसके बाद हाईकोर्ट ने कमिश्नर, डीएम, उपाध्यक्ष और प्रदूषण विभाग की टीम बनाकर पेड़ों की गिनती कर 23 अक्टूबर 2018 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। करीब 150 एकड़ में लगे पेड़ों की गिनती के लिए दो सहायक अभियंता के नेतृत्व में पांच-पांच अवर अभियंताओं की टीम बनाई गई। टीम ने पेड़ों की नम्बरिंग कर गिनती की जिसके मुताबिक 150 एकड़ में कुल 9644 पेड़ हैं। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जा चुकी है।

दो दशक से चल रही थी जोरआजमाइश

दो दशक से अधिक समय से जीडीए और आवंटियों के बीच ब्याज को लेकर जोरआजमाइश चल रही है। जीडीए द्वरा वर्ष 1997 में आवंटित जमीन के बदले उद्योगपति जालान ने 8 करोड़ 31 लाख रुपए और अनिल त्रिपाठी ने लगभग 5 करोड़ रुपये अदा किया था। 75 फीसदी रकम दोनों आवंटियों को बाद में देनी थी। इसी दौरान पौधरोपण कार्यक्रम के तहत करीब 300 एकड़ जमीन पर वन विभाग ने पौधरोपण करा दिया। कुछ वर्षों बाद जीडीए ने दोनों आवंटियों को नोटिस भेजकर जमीन की रकम देने का आदेश दिया। जिसमें बड़ी धनराशि व्याज के रूप में भी थी।

आवंटियों ने पेड़ लगे जमीन को लेने से इंकार कर दिया। जिसके बाद 300 एकड़ में से 121 एकड़ जमीन वन विभाग को आवंटित कर दी गई। ब्याज के रूप में बड़ी धनराशि की मांग किय जाने के बाद आवंटी जीडीए के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष ने ब्याज के साथ रकम जमा करने का आदेश दिया। जिसके बाद आवंटी शासन में चले गए। शासन ने भी आवंटियों को राहत देते हुए ब्याज की वसूली को उचित नहीं ठहराया। इसके बाद जीडीए ने 15 प्रतिशत की दर से व्याज की मांग की, जिसके विरोध में आवंटी एक बार फिर हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने पुन: आवंटियों के हक में फैसला सुनाया। जिसके बाद जीडीए द्वारा सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल किया। सुप्रीम कोर्ट ने जीडीए को राहत देने से इंकार कर दिया। दाखिल रिव्यू याचिका में भी जीडीए को राहत नहीं मिली।

मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने तीस दिन के अंदर जमीन रजिस्ट्री करने का आदेश दिया है। आवंटित जमीन में पेड़ों को लेकर वन विभाग को पत्र लिखा जा रहा है। जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जल्द ही जमीन की रजिस्ट्री दोनों आवंटियों को कर दी जाएगी।

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