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गोरखपुर के लाल श्रवण शुक्ला का कमाल,जानकर पूरा शहर करेगा गर्व,अमेरिका के राष्ट्रपति की पत्नी मेलानिया ट्रम्प और बेटी इवांका दिल्ली के जिस ‘हैप्पीनेस करिकुलुम’ को जानेंगे उसके निर्माण में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका…..

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आज गोरखपुर के युवा हर क्षेत्र में अपना कमाल दिखा कर अपनी प्रतिभा से मिसाल बन रहे।।उसी क्रम में गोरखपुर के लाल श्रवण शुक्ला ने भी कुछ ऐसा किया जिस सुनकर पूरा गोरखपुर गर्व करेगा।।श्रवण शुक्ला उस हैप्पीनेस पाठ्यक्रम को तैयार करने वाली कोर टीम के सदस्य है जिसको जानने कल अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प की पत्नी मेलनिया ट्रम्प और बेटी इवांका ट्रम्प दिल्ली के विद्यालयों का दौरा करेंगे।।

आपको बता दे श्रवण कुमार शुक्ल जो कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय चिलबिलवा ब्लाक पिपराइच में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं ।पिछले चार वर्ष से शिक्षा में सार्वभौम मूल्यों की स्थापना हेतु , इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने हेतु, शिक्षण पद्धति में हैप्पीनेस करिकुलम के रूप में शामिल करने हेतु दिल्ली सरकार के विशेष बुलावे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने इन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजा हुआ है।।
सन 2009 में उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के अनुपालन में श्री श्रवण कुमार शुक्ल जी ने 6 महीने का मूल्य शिक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम अभ्युदय संस्थान अछोटी, रायपुर में प्राप्त किया। उसके बाद इन्हें कार्यक्रम के संचालन के लिए छत्तीसगढ, महाराष्ट्र में बुलाया गया। वहां के शिक्षकों के साथ, पाठ्यक्रम के साथ मूल्य शिक्षा का कार्यक्रम कैसे किया जाए और एससीईआरटी के द्वारा जो पाठ्यक्रम बनाया जाए उस में कैसे “सार्वभौम मानवीय मूल्यों” को शामिल किया जाए इस पर इन्होने काम किया । सन 2015 में दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री ने मूल्य आधारित शिक्षा पर कार्यक्रम बनाने का निर्णय लिया शायद उनके मन में हैप्पीनेस पाठ्यक्रम रहा होगा, इसके लिए उन्होंने अभ्युदय संस्थान रायपुर से कुछ नाम मांगे । पुराने कार्य को देखते हुए अभ्युदय संस्थान ने शुक्ल जी के नाम का प्रस्ताव दिया, इस पर दिल्ली सरकार के तरफ से फोन से पूछा गया, तदुपरान्त उत्तर प्रदेश सरकार से इनकी प्रतिनियुक्ति के लिए निवेदन किया गया। यहाँ के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उस निवेदन पर सकारात्मक पहल करते हुए इन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजने का निर्णय लिया और 1 जनवरी 2016 से ये दिल्ली सरकार के SCERT में “Cell for Human Values and Transformative Learning” में एक सदस्य के रुप में काम कर रहे हैं।।

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श्री श्रवण कुमार शुक्ल जी ने बात करते हुए बताया कि आमतौर पर वस्तु के संबंध में अगर बात कर रहे हैं तो मूल्य को कीमत से ही आंकते हैं, परंतु कीमत ही उसकी वास्तविकता नहीं होती मूल बात उसमें उसकी उपयोगिता होती है, अगर कोई वस्तु बहुत कीमती हो लेकिन हमारे लिए उपयोगी ना हो तो शायद हम उसका कोई कीमत देना पसंद नहीं करेंगे । इसी प्रकार मानव की इस अस्तित्व में उपयोगिता ही मानव का मूल्य है, इस बात को मानव समझ जाए कि अस्तित्व में जो भी इकाई है सभी इकाइयां उपयोगी हैं, साथ ही अस्तित्व में मानव भी एक इकाई है जो कि शुद्ध रूप से प्राकृतिक इकाई है तो इसकी भी कोई उपयोगिता होगी। “मानव की उपयोगिता ही मानव का मूल्य है।”
इनका मानना है कि आदमी 51% सही है। वह जान बूझ कर गलती करना नहीं चाहता है, बल्कि सुख की अपेक्षा में उससे गलती हो जाती है। हर आदमी अपने प्रति सही कार्य व्यवहार चाहता है, इससे पता चलता है कि सही सब मानव को स्वीकार है। अब योग्यता के अभाव में वह गलतियां कर जाता है उसे स्वयं का पता चल जाए, स्वयं के प्रति सजग हो जाए और गलती गलती से नहीं ठीक होती गलती ,सही से ही ठीक होती है यह पता चल जाए। सही पकड़ में आ जाए तो मानाव समझपूर्वक रास्ते पर चल देता है ।।।

श्रवण जी बताते हैं कि दिल्ली एक कठिन जगह है जहां ज्यादातर लोग व्यस्त हैं, परंतु हमने काम करते हुए देखा है कि सही को सुनने के लिए सभी बैठते हैं विचार करते हैं और सही को स्वीकार करते हैं और बार- बार बोलते हैं कि इसे शिक्षा की वास्तु बनाया जाए इसे बच्चों के पाठ्य विषय का एक अंग बनाया जाए यह बहुत ही कल्याणकारी होगा क्योंकि मूल्यों के अभाव में कोई भी जीना नहीं चाहता अपने बच्चों के लिए जो मूल्य स्वीकार है ,वही सब बच्चों के लिए स्वीकार होते ह। अतः शिक्षक हो, बच्चे हो, अभिभावक हो, प्रबंध समिति हो या दिल्ली का आम जनमानस हो सबके बीच में बात करके हमने देखा है किस प्रकार सही के प्रस्ताव को स्वीकारते हैं ,योग्य होना चाहते हैं। जिससे सुखपूर्वक जीया जा सके।
श्रवण जी ने आगे बताया कि हैप्पीनेस पाठ्यक्रम प्रतिदिन कक्षा में कैसे कराया जाएगा यह हमारी टीम के लिए एक चुनौती थी पर समझ में आया कि जब तक अपनी समझ अधूरी रहती है तब तक कोई भी काम बहुत ही दुष्कर लगता है ,इसीलिए मैंने पूरे विषय का पहले गहन अध्ययन किया समय लगाया विशेषज्ञ से बातचीत किया और हैप्पीनेस टीम के सभी सदस्यों ने ऐसा ही किया इसमें बहुत सारे इंजीनियर बहुत सारे टीचर्स बहुत सारे एजुकेटर सब मिल बैठकर के कार्यशाला कर – कर के बातचीत से इसकी विषय वस्तु को बना पाए हैं । इसका अनुसंधान कर पाए हैं और इसके बाद पूरा का पूरा कार्यक्रम निकल कर आया है। मूल्य वास्तव में मानव- मानव के बीच व्यवहार में , मानव और प्रकृति के बीच में कार्य में , मानव को स्वयं के अंदर पहचान में आता है। ऐसा पहचान पाते हैं तो निर्वाह कर पाते हैं निर्वाह हुआ कि नहीं इसका मूल्यांकन करके तृप्त होते हैं, इसी का नाम “न्याय” हैं तो हर मानव न्याय पूर्वक जीना चाहता है । हर मानव अपने लिए न्याय चाहता ही है।।

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