Sunday, October 13, 2019
Gorakhpur

गोरखपुर में अब मंदिर ही नहीं, मरीन ड्राइव, वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, चिडिय़ा घर और भी बहुत कुछ…

बौद्ध परिपथ के हृदय स्थल पर मौजूद गुरु गोरक्षनाथ की धरती गोरखपुर पर्यटन के नजरिए से कितनी उर्वर है, बीते ढाई वर्ष में इस बात का एहसास हर किसी ने किया है। तरह-तरह की योजनाओं के माध्यम से हर उस स्थल को चमकाने की कोशिश हुई है या हो रही है, जिसमें पर्यटन विकास की जरा भी संभावना है। आज शहर में दर्जन भर से अधिक ऐसी जगहें हैं, जो गोरखपुर आने वाले पर्यटकों को यहां ठहरने को मजबूर करने में सक्षम है।
ऐसा नहीं कि यह स्थल केवल पर्यटकों को ही लुभा रहे हैं, गोरखपुर और आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों का वीकेंड भी खुशनुमा और शानदार बना रहे हैं। पर्यटन विभाग की माने तो गोरखपुर में पर्यटकों की तादाद में बीते दो वर्ष करीब 15 फीसद से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़े बताते हैं कि अपना गोरखपुर पर्यटन के मानचित्र पर बीते ढाई वर्ष में तेजी से उभरा है। इन सबके बीच एक और महत्वपूर्ण और सुकून देने वाली बात यह है कि पर्यटन विकास का पहिया अभी थमा नहीं हैं बल्कि इसकी रफ्तार और तेज हुई है।
एक समय था जब गोरखपुर में पर्यटन स्थल का दायरा ले-देकर गोरखनाथ मंदिर के इर्दगिर्द ही सिमट कर रहा जाता था। लेकिन जब ढाई साल पहले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली तो गोरखपुर के लोगों की उम्मीदें अन्य क्षेत्रों की तरह पर्यटन विकास को लेकर परवान चढ़ीं। पर्यटन विभाग भी उत्साहित हुआ। उसने न केवल ठंडे बस्ते में पड़ी परियोजनाओं की फाइलों पर लंबे समय से जमी पड़ी धूल झाड़ी बल्कि नए सिरे से मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक नई योजना तैयार की। पर्यटन विकास को लेकर शासन स्तर से बनी योजनाओं ने भी पूरा साथ दिया। इसी का नतीजा है कि आज पर्यटन विभाग पर्यटकों को गोरखपुर में कुछ दिन रोकने में कामयाब होता दिखने लगा है। आज विश्व पर्यटन दिवस है तो आइए बदले परिदृश्य में जिले में पर्यटन विकास को लेकर हुए कामों ओर संभावनाओं पर नजर डालें।

मरीन ड्राइव सा विहंगम हुआ रामगढ़ ताल

वर्षों तक दुर्दशा का दंश झेल चुका प्रकृति की अनमोल भेंट रामगढ़ ताल इन दिनों मुंबई के मरीन ड्राइव सरीखा बन पर्यटकों के आकर्षण का बन चुका है। इस छटा विहंगम हो चली है। ताल के तट पर बनी खूबसूरत नौकायन जेटी और उसका स्पॉट लोगों को वहां दिन गुजारने के लिए मजबूर कर रहा है तो शाम होते दिव्य और भव्य गोरखपुर दिखाने वाला 40 मिनट का लाइट एंड साउंड शो शाम को रंगीन बना रहा है।

तेजी से बन रहा वाटर स्पोट्र्स कांप्लेक्स

रामगढ़ ताल बहुत जल्द गोरखपुर और आसपास के उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होने वाला है, जो वाटर स्पोट्र्स का जुनून रखते हों या फिर उसमें अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं। 45 करोड़ की लागत से वाटर स्पोट्र्स कांप्लेक्स के निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। इस वाटर कांप्लेक्स में जहां मनोरंजन का भरपूर इंतजाम होगा, वहीं वाटर स्पोट्र्स के अंतराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी तैयार किए जाएंगे।

चमकाए जा रहीं आध्यात्मिक धरोहरें

गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में गोरखनाथ मंदिर के अलावा कई ऐसे आध्यात्मिक स्थल हैं, बेहतर प्रस्तुति और प्रचार-प्रसार के अभाव में पर्यटकों का ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रहे थे। पर्यटन विभाग ने ऐसे सभी आध्यात्मिक को चिह्नित करने और उन्हें चमकाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई हैं। कुछ स्थानों पर कार्य शुरू हो गया है, तो कुछ को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके लिए स्थान चयन में सभी धर्मों की आध्यात्मिक संतुष्टि का पूरा ख्याल रखा गया है। ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च, जटाशंकर गुरुद्वारा और इमामबाड़े को भी प्रमुखता से रखा गया है। कोई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल छूटने न पाए, इसके लिए विधायकों की मदद भी ली जा रही है।

बढ़ गई गोरखनाथ मंदिर की चमक-दमक

यूं तो पर्यटकों के लिए शुरू से ही गोरखपुर का मतलब गोरखनाथ मंदिर रहा है लेकिन पर्यटन विभाग ने इसे लेकर रही-सही कसर को दूर करने का भी हरसंभव प्रयास किया है। मंदिर के पौराणिक भीम सरोवर में नाथ पंथ की महिमा बताने वाला लाइट एंड साउंड शो शुरू हो चुका है तो फसाड लाइट से मंदिर की चमकती-दमकती छटा दिखाने का कार्य भी पूरा हो चुका है। मंदिर के सुंदरीकरण का कार्य जारी है। मंदिर परिसर में पर्यटकों के ठहरने के मद्देनजर पर्यटक आवास बनाने की भूमिका भी तैयार हो चुकी है।

संवारे जा रहे शहीद स्थल

जिले के शहीद स्थलों को सहेज कर सजाने-संवारने का कार्य भी जोर-शोर से चल रहा है। इसके लिए शहीद स्थलों का चयन हो गया है। पं. राम प्रसाद बिस्मिल और चौरीचौरा शहीद स्मारक को चमकाने का कार्य तो अंतिम चरण में हैं। चौरीचौरा शहीद स्थल के मूल स्थान और शहीद बधु सिंह स्मारक, डोहरिया कलां शहीद स्मारक को चमकाने की कार्ययोजना तैयार हो चुकी है।

पर्यटन स्थल बनेगा कबीर धूनी और गोरख तलैया

गोरखपुर और संत कबीरनगर की सीमा पर मौजूद कसरवल में मौजूद कबीर धूनी और गोरख तलैया को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने की योजना भी धरातल पर आ चुकी है। इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह स्थल गुरु गोरक्षनाथ, संत कबीर और गुरु नानक के मुलाकात का गवाह है।

तेजी बन रहा चिडिय़ा घर

रामगढ़ ताल के सामने बन रहे गोरखपुर के चिडिय़ाघर का निर्माण कार्य भी अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम के मुताबिक 31 दिसंबर तक इसे हर हाल में पूरा करना है। उम्मीद की जा रही है अगले वर्ष जून के बाद तक यह पर्यटन स्थल भी लोगों के अवलोकनार्थ होगा।

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप गोरखपुर को पर्यटन का हब बनाने की दिशा में जोरशोर से कार्य चल रहा है। हर वह कोशिश की जा रही है, जिससे यहां से गुजरने वाला हर पर्यटक ठहरने को मजबूर हो जाए। सिर्फ इतना ही नहीं, यह भी कोशिश है कि गोरखपुर के महत्वपूर्ण स्थलों की पेशगी ऐसे की जाए कि पर्यटकों की योजना के दायरे में गोरखपुर भी शामिल हो। – रवींद्र कुमार मिश्र, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, गोरखपुर

गोरखपुर में ऐसे बढ़ी पर्यटकों की संख्या

वर्ष भारतीय पर्यटक विदेशी पर्यटक कुल पर्यटक

2015 2314243 35452 2349695

2016 2346121 35638 2381759

2017 2405705 36249 2441954

2018 2753546 38715 2792261

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Deepanshi singh
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