Saturday, July 31, 2021

गोरखपुर में खेतों में बरसा ‘अमृत’, किसानों के चेहरे खिले…

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जिले में पिछले दो दिनों से हो रही बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। किसान रबी की फसल के लिए इस बारिश को अमृत बता रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी बरस कर निकल जाता है तो किसी भी फसल को कोई हानि नहीं होगी लेकिन यदि तेज हवा के साथ पानी बरसा और बादल छाए रहे तो फूल वाली फसल मटर, सरसों को नुकसान हो सकता है। आलू में भी रोग लग सकता है।
जनपद में गेहूं की अच्छी पैदावार होती है। जनपद में गेहूं का रकबा 195496 हेक्टेयर का है। दिसंबर में ठंड और बारिश न होने के कारण किसान काफी निराश थे। कुछ किसानों को गेहूं की फसल में सिंचाई भी करनी पड़ रही थी। एक एकड़ खेत की ट्यूबवेल से सिंचाई में डीजल और मजदूरी मिला कर एक हजार रुपये का खर्च आ रहा था। बारिश से इसकी बचत हुई है। सोमवार की रात से शुरू हुई बूंदाबांदी और मंगलवार और बुधवार को हुई बारिश ने किसानों के चेहरे पर रौनक लौटा दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ठंड नहीं बढ़ी तो गेहूं के दानें कमजोर हो सकते हैं।

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बढ़ेगी यूरिया की मांग
बारिश के बाद यूरिया की मांग बढ़ेगी। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिया खाद बारिश के बाद खेत में तब डालें जब खेत में जलभराव न हो, लेकिन नमी की मात्रा हो ताकि यूरिया खाद धीरे-धीरे रिस कर पौधे तक पहुंचे। पौधे को ज्यादा से ज्यादा नाइट्रोजन की मात्रा मिले। सल्फर कोटेड यूरिया का इस्तेमाल भी खेतों के लिए बेहतर है। फिलहाल जिले में खाद की कमी नहीं है।

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आलू और सरसों की फसल के लिए टिप्स
जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव ने बताया कि आलू और सरसों की फसल में बारिश के दौरान झुलसा एवं माहो का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में उपचार के लिए किसानों को माहो नियंत्रण के लिए क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करना चाहिए। आलू की फसल में झुलसा और पाला से बचाव के लिए हल्की सिंचाई के साथ मैकोंजेब 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए। किसान यदि कीटनाशक नहीं डालना चाहते तो जैविक नियंत्रण के लिए व्यूबेरियावैसियाना और ट्राइकोडर्मा 2.50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद में मिला कर डाल सकते है।

गेहूं की फसल के लिए यह बारिश अमृत की तरह है। फूल वाली फसलें जैसे मटर और सरसों की फसल इस बारिश से प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि हल्की बारिश से कोई नुकसान नहीं है। यदि बारिश तेज हुई तो फसल की क्षति हो सकती है। किसानों को बस खेतों में पानी नहीं लगने देना चाहिए।
अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी

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क्या कहते हैं किसान
बारिश से गेहूं की फसल अच्छी होने की उम्मीद है। फसल पर 10 फीसदी तक असर पड़ सकता है। इससे पैदावार अच्छी होगी और दानें भी मजबूत होंगे। लेकिन यदि बादल छाए रह गए और पानी तेज बरसा तो दिक्कत हो सकती है। सिंचाई करनी पड़ती तो 1000 रुपये प्रति एकड़ खर्च आता।
राधेश्याम पाण्डेय, प्रगतिशील किसान, रामपुर रबका चौरीचौरा

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जनपद के सभी क्षेत्रों में बारिश की सूचना मिल रही है। बारिश के कारण तापमान भी गिरा है। इस कारण फसल का विकास भी तेजी से होगा। यह फसलों के लिए संजीवनी है। बस ओला न गिरे। यह खतरनाक है।
ओम प्रकाश, प्रगतिशील किसान

बरसात गेहू, सरसों आदि फसलों के लिए बहुत ही लाभदायक है। नमी न होने से गेहूं की फसल प्रभावित हो रही थी। अब फसल अच्छी होगी।
मनीराम, किसान, बिसरी, सहजनवा

नमी न होने के कारण सिंचाई की तैयारी कर रहे थे, लेकिन अब सिंचाई की आवश्यकता नहीं है। यूरिया खाद डालते ही गेहूं की फसल का विकास तेज हो जाएगा।
राकेश सिंह, किसान, मेहदीय, सहजनवा

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