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गोरखपुर: लोग ले रहे हैं मिनी जुहू चौपाटी का लुत्फ, जल्द मिलेगा चिड़ियाघर का भी मजा…

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गोरखपुर शहर दिन-रात विकास की नई इबारत लिख रहा है. बौद्ध सर्किट के केंद्र के रूप में पहचान रखने वाले गोरखपुर शहर के चारों ओर फोरलेन का जाल उसकी नई पहचान के रूप में स्‍थापित हो रहा है. उसके बाद अब रामगढ़ताल क्षेत्र को पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. इतना ही नहीं शहर के लोगों को वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और चिड़ियाघर की भी सौगात मिली है. रामगढ़ताल क्षेत्र का नजारा देखकर ऐसा लगता है जैसे वो पूर्वांचल का मिनी जुहू चौपाटी बन गया है. सुबह से लेकर देर रात तक यहां के खूबसूरत नजारों को मोबाइल में कैद करने वालों को देखा जा सकता है. इसमें ज्‍यादा संख्‍या युवाओं के साथ बच्‍चें और महिलाओं की है.

बौद्ध सर्किट का केंद्र माने जाने वाले गोरखपुर के रामगढ़ताल क्षेत्र में तेजी से विकास के काम चल रहे हैं. एक तरफ पैडलेगंज से सर्किट हाउस की ओर जाने वाली फोरलेन सड़क क्षेत्र का आकर्षण बढ़ा रही है. तो वहीं जून में तैयार होकर आमजन के लिए खुल जाने वाला चिड़ियाघर भी चर्चा का विशय बना हुआ है.

723 हेक्‍टेयर यानी 1800 एकड़ रामगढ़ताल क्षेत्र गोरखपुर में पर्यटन का ऐसा केंद्र बन गया है, जो आम लोगों को खूब लुभा रहा है. गोरखपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के लोग भी रामगढ़ताल पर खूबसूरत नजारा लेने के लिए आ रहे हैं. सुबह उजियारा होने के बाद से देर रात तक लोग परिवार के साथ यहां पर सेल्‍फी लेकर ऐसे ही रामगढ़ ताल का लुत्फ उठा रहे हैं जैसे चंडीगढ़ के ‘सुकना लेक’ लोगों को लुभाता है. रामगढ़ ताल का अद्भुत नजारा बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. लोग परिवार बच्चे और बुजुर्गों के साथ भी यहां पर घूमने के लिए आ रहे हैं.

यहां पर बोटिंग का लुत्फ उठाया जा सकता है. वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और बच्चों को तैराकी सहित अन्य वाटर स्‍पोर्ट्स में प्रोत्साहन देने के लिए वाटर स्पोर्ट्स कॉम्‍प्‍लेक्‍स का भी निर्माण तेजी से हो रहा है. वाटर स्पोर्ट्स काम्‍प्‍लेक्‍स बनाने के लिए शासन से 40 करोड़ रुपए स्‍वीकृत किए गए हैं. वहीं बोट जेट्टी का निर्माण सात करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है. इसमें रोविंग, कैनोविंग और क्याकिंग के संचालन के लिए भवन बनाया जाएगा. इसके अलावा भवन में खिलाड़ियों के लिए डॉरमेट्री, कैफेटेरिया, लाइब्रेरी, बोट रिपेयर/स्टोर रूम, पर्यटन सूचना केन्द्र, बैडमिन्टन कोर्ट, बास्केटबाल कोर्ट, ओपेन एयर थिएटर, बच्चों के खेलने का सामान, लैण्डस्केपिंग, पौधरोपण कराया जाएगा.

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शहीद अशफाकउल्‍लाह खां चिडि़याघर यानी प्राणी उद्यान 291 एकड़ में बन रहा है. इसमें 170 एकड़ में बायोडायवर्सिटी पार्क होगा. इसका लगभग 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. प्राणी उद्यान 113 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा है. यहां पर 35 प्रकार के जानवर रहेंगे और 200 से ज्यादा प्रजातियों की बर्ड भी यहां पर होंगी. जून 2019 तक ये प्राणी उद्यान बनकर तैयार हो जाएगा. गोरखपुर में वर्ष 2009 में प्राणी उद्यान की नींव पड़ी थी. ये सीएम योगी आदित्‍यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्‍ट में शामिल है. कानपुर और लखनऊ के बाद ये पूर्वी यूपी का पहला चिड़ियाघर है. क्षेत्रफल की दृष्टि से ये प्रदेश के सबसे बड़े प्राणी उद्यान कानपुर के बाद दूसरे नम्बर पर है.

इसमें 68 एकड़ भूमि पर निर्माण कार्य होगा और 30 एकड़ में सिर्फ पौधे रहेंगे, जहां नेचर ट्रेल की सुविधा मिलेगी. 37.5 एकड़ वेट लैंड का इस्तेमाल प्रवासी पक्षियों के लिए होगा. 51 एकड़ अपलैंड पर 33 बाड़े बनाए जाने हैं. जिनमें, 31 का निर्माण जारी है. चिड़ियाघर में 4400 मीटर रनिंग में बाउंड्रीवाल और कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन के लिए 1500 मीटर की बाउंड्रीवाल का निर्माण पूरा होने को है. बटरफ्लाई उद्यान, अत्याधुनिक एक्वेरयिम, सांपों के लिए सर्पेन्टेरियम का भी निर्माण किया जा रहा है. वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन को ध्यान में रखकर अत्याधुनिक हॉस्पिटल, क्वैरेन्टाइन सेंटर, रेस्क्यू सेंटर्स, किचन और इंसीनेटर का निर्माण भी हो रहा है.

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प्राणी उद्यान में भगवान बुद्ध और गुरु गोरखनाथ मंदिर के थीम पर विभिन्न आकर्षक संरचनाएं और भवन भी बनाए जा रहे हैं. महात्मा बुद्ध की तांबे की बनी विशाल प्रतिमा के साथ साइनेज, गोरखनाथ मंदिर की थीम पर इंट्रेंस प्लाजा, दर्शकों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक 4डी थियेटर, ओपेन एयर थियेटर, अत्याधुनिक कैफेटेरिया, जलपान के लिए रेस्टोरेंट, किओस्क, रेस्टिंग शेड, नेचर गिफ्ट शॉप, बैटरी ऑपरेटेड गोल्फ कार्ट, रबर टायर वाली ट्वाय ट्रेन का भी निर्माण कराया जा रहा है. प्राणी उद्यान की दीवारों पर भारतीय संस्कृति और दर्शन से अवगत कराने के लिए स्टोन क्लैडिंग कर म्यूरल्स बनाए जाएंगे. स्थानीय हस्तशिल्प के प्रसार व संरक्षण देने के लिए टेराकोटा की कलाकृतियां भी लगाई जाएंगी.

एक डिप्टी रेंजर, दो फारेस्टर, तीन फारेस्ट गार्ड और पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी नियुक्त किया गया है. इस पार्क को विकसित करने के लिए चिड़ियाघर के लिए 240 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट भेजा जा रहा है. चिड़ियाघर को 171 एकड़ और जमीन मिल जाने से जहां इसकी भव्यता बढ़ेगी. वहीं बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने का रास्त भी साफ हो जाएगा. इससे यहां पूरा इकोसिस्टम बनेगा. ये चिड़ियाघर देश के नामी और बड़े चिड़ियाघरों में शुमार हो सकेगा. पूर्वी उत्तर प्रदेश के रंगकर्मियों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर सेमिनार और कार्यशाला आयोजित करने के लिए रामगढ़ताल एरिया में ही आधुनिक प्रेक्षागृह का निर्माण जारी है. प्रेक्षागृह में 1100 सीट और 250 सीट का ऑडिटोरियम, मीडिया सेंटर और रंगकर्मियों के कैंटीन आदि की सुविधा प्रदान की जाएगी.

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