Friday, September 17, 2021

घर में लगा रहता था शराबियों का जमावड़ा, ऐसे माहौल में पढ़ाई कर इस बेटे ने पास की UPSC की परीक्षा….

गोरखपुर:- बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार गोरखपुर। दिल्ली...

Maharajganj: औकात में रहना सिखो बेटा नहीं तो तुम्हारे घर में घुस कर मारेंगे-भाजपा आईटी सेल मंडल संयोजक, भद्दी भद्दी गालियां फेसबुक पर वायरल।

Maharajganj: महाराजगंज जनपद में भाजपा द्वारा नियुक्त धानी मंडल संयोजक का फेसबुक पर गाली-गलौज और धमकी वायरल। फेसबुक पर धानी मंडल संयोजक...

खुशखबरी:-सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक को मंजूरी 1320 करोड़ स्वीकृत

गोरखपुर के लिहाज़ से एक बड़ी ख़बर प्राप्त हो रही है जिसमे यह बताया जा रहा है कि सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक...

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद कमलेश पासवान

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद बांसगांव लोकसभा के सांसद कमलेश पासवान ने कास्त मिश्रौली निवासी भाजपा नेता...

पूर्वांचल में मदद की परिभाषा बदलने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं युवा नेता पवन सिंह….

युवा नेता पवन सिंह ने मदद करने की परिभाषा पूरी तरह बदल दी है. उन्होंने मदद का दायरा इतना ज्यादा बढ़ा दिया...

Download GT App from
Google Play

विज्ञापन के लिए संपर्क करें +91 7843810623 (WhatsApp)

जरा सोचिए जिस घर में शराब पीने वालों को रात-दिन जमावड़ा लगा रहता हो उस घर में भला कोई कैसे पढ़ाई करेगा. लेकिन एक बेटा ऐसा भी था, जिसने इस माहौल में रहकर न केवल पढ़ाई कि बल्कि आईएएस बनकर भी दिखा दिया. दरअसल डॉ. राजेंद्र भारूड. ये अपनी मां के पेट में थे तब इनके पिता का निधन हो गया था. ग़रीबी से बेहाल इनकी मां ने शराब बेचना शुरू किया. शराब पीने वाले लोग जो स्नैक्स आदि लाने के लिए इन्हें पैसे देते थे उन्हीं से किताबें ख़रीद कर राजेंद्र ने पढ़ाई की. पढ़ाई ऐसी की कि कलेक्टर बने.

डॉ. राजेंद्र भारूड महाराष्ट्र के धुले ज़िले के रहने वाले हैं. जब उनका जन्म हुआ तो पिता का साया भी उनके ऊपर नहीं था. मां के ऊपर तीन बच्चों को पालने और उन्हें पढ़ाने की ज़िम्मेदारी थी. अपनी मां और ख़ुद के हौसले के दम पर ही वो ग़रीबी को मात देकर एक कलेक्टर बने हैं.

ये भी पढ़े :  NH 29::-गोरखपुर से बड़हलगंज का हाल बेहाल,हल्की बारिश ने किया फिसलने पर मजबूर....

एक आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र भारूड की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणादायी है. इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा- ‘मैं गर्भ में था तभी पिता का निधन हो गया. लोगों ने मां से अबॉर्शन कराने को कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. भीषण ग़रीबी में मेरा जन्म हुआ. मां जब देसी शराब बेचती थी तब मैं 2-3 साल का था. मैं रोता था तो शराबियों को दिक्कत होती थी. इसलिए वो दो चार-बूंद शराब मेरे मुंह में डाल देते और मैं चुप हो जाता था.’

ये भी पढ़े :  Lockdown के बीच पूरे विधि विधान के साथ खुले केदारनाथ के कपाट, जानिए खास बातें...

उन्होंने आगे बताया कि बचपन में कई बार उन्हें दूध की जगह शराबियों द्वारा पिलाई गई शराब की घूंटे पीकर सोना पड़ा था. बार-बार ऐसा होने के चलते उन्हें इसकी आदत सी हो गई थी और कई बार तो सर्दी खांसी होने पर भी उन्हें दवा की जगह शराब ही पिलाई जाती थी. राजेंद्र ने आगे कहा- ‘जब थोड़ा बड़ा हुआ तो शराब पीने आने वाले लोग कोई न कोई काम करने को कहते. स्नैक्स आदि मंगाते. उसके बदले मुझे कुछ पैसे देते. इन्हीं पैसों से मैं किताबें ख़रीदता और पढ़ाई करता था.

पढ़ने में मन लगता था इसलिए पढ़ाई जारी रखी. 10वीं 95 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. 12वीं में 90 फ़ीसदी अंक आए. इसके बाद साल 2006 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बैठा. इसे पास करने के बाद मुझे मुंबई के सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला. यहां से साल 2011 मैंने कॉलेज के बेस्ट स्टूडेंट का अवॉर्ड हासिल किया. पढ़ाई के दौरान मैं अकसर लोगों के द्वारा कही एक ही बात के बारे में सोचता था, वो ये कि सभी उस वक़्त मुझसे यही कहते थे कि शराब बेचने वाले का बेटा शराब ही बेचेगा. ‘

ये भी पढ़े :  माउंट लिटेरा गोरखपुर::- लॉकडाउन के बीच स्कूल से निकाले गए आधा दर्ज़न शिक्षक-शिक्षिकाएं,कहाँ जायें यह

ये बात उन्हें रोज़ सताती रहती थी. उन्होंने मन ही मन ठान लिया था कि इसे बदलना है. इसलिए जुट गए यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करने में. मां के विश्वास और ख़ुद की मेहनत के दम पर उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली और बाद में कलेक्टर भी बन गए. राजेंद्र कहते हैं कि जब वो पहली बार कलेक्टर बनने के बाद मां से मिले तो उनकी मां को यक़ीन ही नहीं हुआ की वो कलेक्टर बन गए हैं.

ये भी पढ़े :  कोरोना से गरीबों को बचाने के लिए मास्क बना रही हैं इस केंद्रीय मंत्री की पत्नी....

जब गांव के लोग और बड़े-बड़े नेता और अफ़सर उन्हें बधाई दने पहुंचे तब उन्हें यक़ीन हुआ. उस वक़्त वो बस ख़ुशी के मारे रोती रहीं. राजेंद्र जी का कहना है कि आज वो जो भी कुछ हैं अपनी मां के विश्वास कि बदौलत ही हैं. राजेंद्र भारूड 2013 के बैच के आईएएस ऑफ़िसर हैं. फ़िलहाल वो महाराष्ट्र के नंदूरबार ज़िले के कलेक्टर हैं. उन्होंने अपनी संघर्ष भरी कहानी को अपने द्वारा लिखी गई बुक सपनों की उड़ान में बयां किया है.

Hot Topics

गोरखपुर : सगी बहन से शादी करने की जिद पर अड़ा भाई; यहां जाने क्या है माजरा !

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां चिलुआताल में...

गोरखपुर:चिता पर रखे शव के जीवित होने पर मचा हड़कंप, रोकना पड़ा दाह संस्कार,

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां...

देवरिया:- थाने में ही महिला फरियादी के सामने हस्तमैथून करने वाला थानेदार फ़रार,25 हज़ार के इनाम की घोषणा

देवरिया के अंतर्गत आने वाले थाने भटनी में महिला फरियादी के सामने हस्तमैथुन करने वाली थानेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज...

Related Articles

पूर्वांचल में मदद की परिभाषा बदलने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं युवा नेता पवन सिंह….

युवा नेता पवन सिंह ने मदद करने की परिभाषा पूरी तरह बदल दी है. उन्होंने मदद का दायरा इतना ज्यादा बढ़ा दिया...

स्वर्णकार समाज ने लोकसभा , विधानसभा में अपने प्रतिनिधित्व के लिए भरी हुँकार,जल्द प्रदेश व्यापी होगी सभा

स्वर्णकार समाज का स्वर लोकसभा एवं विधानसभाओं में मुखरित हो प्रतिनिधित्व सभी पंचायतों में हो इस विचार के साथ स्वर्णकार समाज...

यूपी में कई IPS बदले गए,दिनेश कुमार गोरखपुर के नए एसएसपी.

कई IPS के तबादले हुए जिसमे गोरखपुर के एसएसपी जोगेंद्र कुमार को झाँसी का नया डीआईजी बनाया...
%d bloggers like this: