Tuesday, April 23, 2019
Uttar Pradesh

चंद्रकला ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘सुनो, ऐ सरकारें हत्यारी, तुम, जाने की, करो तैयारी’…

नई दिल्ली सपा शासनकाल में यूपी में हुए खनन घोटाले में फंसी सूबे की धाकड़ IAS अधिकारी बी चंद्रकला अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लाखों की संख्या में उनके फॉलोअर्स हैं। सोशल मीडिया पर उनके कई ऐसे पोस्ट हैं, जिन्हें किसी सेलिब्रिटी या चर्चित राजनेता से भी ज्यादा लोगों ने लाइक या कमेंट किया। खास तौर पर अवैध खनन केस में पांच जनवरी 2019 को उनके लखनऊ स्थित आवास पर सीबीआइ का छापा पड़ने के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई बी चंद्रकला की कविताएं काफी चर्चा में रही हैं। अब बी चंद्रकला ने सोशल मीडिया पर एक नई कविता पोस्ट कर, देश की राजनीतिक स्थिति पर व्यंग्यात्मक लहजे में तंज करने का प्रयास किया।
सोशल मीडिया लिंक्डइन पर उनके इस पोस्ट को बृहस्पतिवार शाम पांच बजे तक 1097 लोग लाइक कर चुके हैं, जबकि 147 लोगों ने कमेंट किया है। इनमें से बहुत से लोगों ने उनके पक्ष में कमेंट करते हुए, पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है, तो कुछ लोगों ने उन्हें हिम्मत बंधाने का प्रयास किया है। आइएएस अधिकारी बी चंद्रकला ने लिंक्डइन पर ये कविता करीब एक सप्ताह पहले पोस्ट की है। उनका ताजा पोस्ट इस प्रकार है…

मेरे प्यारे दोस्तों,

आज मैं आप से एक व्यंग्यात्मक कहानी’ भारतीय राजनीति में एलियन इरा’ से उद्धरण साझा कर रही हूँ:

“दोस्तो, भारतीय राजनीति ने फटे कुर्ते से लेकर लाखों के सूट तक के तमाम अच्छे दिन देख चुकी है, लेकिन भारतीय जवानी आज भी समस्याओं के दलदल में फंसी कराह रही है।। राजनीति ने हमें’ 0=100 जानें’ का गणित भी सिखाया; कालेधन का साँप दिखाते-दिखाते, मदारी ने सौ जानें ले ली। राजनीति की कॉमेडी, असल में ट्रेजडी होती है।।
आगे लेखक कहता है, हमारा देश गांधी का देश है, गांधी मतलब, लोकतंत्र की आँधी: बदलाव की हर पटकथा, जनसैलाब ही लिखती है।।—-अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें, “सुनो, ऐ सरकारें हत्यारी, तुम, जाने की, करो तैयारी।। कण-कण में हम आंधी हैं, हम भारत के, गांधी हैं।। लोकतंत्र का एक निशान, जन-गण-मन का करो, सम्मान।। लोकतंत्र की एक कसौटी, कण-कण फैले जीवन-ज्योति।।” “जमीर जो कहे, वही कर, जालिम कहाँ डरता है जो, तू किसी से डर।। हर तूफान को पता है, हम आसमान हैं, वक्त के सीने पर मुकम्मल निशान हैं; अपने रास्ते पर चल, हर रंग तेरी है, ये धरती तेरी है, ये गगन तेरी है, हर गुल तेरी है कि, ये गुलशन भी तेरी है।। जमीर जो कहे, वही कर, जालिम कहाँ डरता है जो, तू किसी से डर।।” ,,,,,प्रस्तुत अंश राकेश कुमार जी की पुस्तक ‘भारतीय राजनीति में एलियन इरा’ से उद्धृत है।। —आपकी चंद्रकला।।

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