Sunday, July 25, 2021

चकबंदी विभाग में फर्जीवाड़ा, Typing Exam में ‘खेल’ कर 70 चपरासी बनाये गए क्लर्क….

पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी मासिक अपराध गोष्ठी में अपराधों की समीक्षा व रोकथाम हेतु दिये गये आवश्यक दिशा-निर्देश

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विधायक विनय शंकर तिवारी किडनी की बीमारी से पीड़ित ग़रीब युवा के लिए बने मसीहा…

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चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने बड़ा ‘खेल’ कर महकमे के 70 चपरासियों को टंकण परीक्षा में धांधली कर क्लर्क बना दिया। परीक्षा लेने के लिए जानबूझकर क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय के अनुदेशक आशुलिपि को टंकण विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त करवाया। यह तब हुआ जबकि क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय द्वारा तकनीकी विशेषज्ञ न होने की जानकारी दी गई थी। फिलहाल मामले की लिखित शिकायत होने के बाद जब इसकी जांच हुई तो गड़बड़ी की आशंका पर दोबारा राजकीय औद्योगिक परीक्षण संस्थान अलीगंज में परीक्षा करवाई गई। वीडियोग्राफी कर करवाई गई टंकण परीक्षा में सभी कर्मचारी फेल हो गए। मामले की उच्च स्तरीय जांच में दोषी पाये गए चयन समिति के अध्यक्ष व अपर संचालक चकबंदी सुरेश यादव, पीसीएस अधिकारी व तत्कालीन उप संचालक चकबंदी मुख्यालय छोटे लाल मिश्रा, संयुक्त संचालक चकबंदी रवींद्र कुमार दुबे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संगत धाराओं के तहत राजधानी की हजरतगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
रवींद्र कुमार दुबे को निलंबित कर दिया गया है जबकि सुरेश यादव पहले ही निलंबित किये जा चुके हैं। इन दोनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर आरोप पत्र जारी कर दिया गया है। वहीं छोटे लाल मिश्रा को निलंबित करने और विभागीय कार्यवाही शुरू कर आरोप पत्र दिये जाने के लिए अपर मुख्य सचिव नियुक्ति विभाग को आरोप पत्र सहित पत्र भेजा गया है।
चकबंदी विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत कर्मचारियों को प्रोन्नति के माध्यम से क्लर्क बनाने के लिए 26 व 27 दिसंबर 2018 को टंकण परीक्षा आयोजित की गई थी। चयन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों ने इसमें गड़बड़ी करने के लिए जानबूझ कर क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय लखनऊ के छोटे कर्मचारी अनुदेशक आशुलिपिक अशोक कुमार यादव को परीक्षा के लिए टंकण विशेषज्ञ नियुक्त करवाया गया। इस परीक्षा में मिलीभगत कर सभी को पास कर दिया गया। यानी 70 चपरासी क्लर्क बन गए। मामले में गडबड़ी की लिखित शिकायत जब गोरखपुर के रहने वाले योगेन्द्र सिंह ने की तो जांच शुरू हुई। इसके बाद दोबारा परीक्षा लेने की संस्तुति हुई। दोबारा 11 व 15 अप्रैल 2019 को हुई टंकण परीक्षा में सभी कर्मचारी फेल हो गए। जिन कर्मचारियों की टंकण गति पहली परीक्षा में 28 से 26 शब्द प्रति मिनट थी, दोबारा हुई परीक्षा में उनकी टंकण गति शून्य, दो, तीन और पांच निकली। शासन ने मामले की जांच कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार को सौंपी थी। कृषि उत्पादन आयुक्त ने जांच में दोषी पाये गए अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की सिफारिश की थी। इस मामले में राजस्व विभाग ने आइएएस अधिकारी व निलंबित चकबंदी आयुक्त शारदा सिंह को जारी करने के लिए आरोप पत्र नियुक्ति विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है। मामले में दोषी पाये गए क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय लखनऊ के अनुदेशक अशोक कुमार यादव को निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर आरोप पत्र जारी करने के लिए प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन को पत्र भेज दिया गया है

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इस मामले में शामिल रहे चकबंदी आयुक्त के अन्य कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आपराधिक कृत्य के लिए भारतीय दंड संहिता और भ्रषटाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज कराने व उन्हें निलंबित कर अनुशासनिक जांच के लिए संयुक्त संचालक चकबंदी जितेंद्र मोहन सिंह को निर्देश दिया गया है।

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