Tuesday, August 3, 2021

चुनौतियों के बीच सम्भावनाएं तलाशते हुए इन्हें अवसर में बदलने की जरूरत:कुलपति प्रो0 श्रीनिवास सिंह

गोरखपुर के नवोदित कलाकारो से सजी फ़िल्म ‘ऑक्सीजन ‘के अभिनव प्रयास की खूब हो रही चर्चा

नवोदित कलाकारों को लेकर डॉ. सौरभ पाण्डेय की फ़िल्म 'ऑक्सीजन 'के अभिनव प्रयास ने रचा इतिहास

बड़हलगंज के बाबा जलेश्वरनाथ मंदिर के पोखरे का 98.5 लाख से होगा सुन्दरीकरण।

बड़हलगंज के बाबा जलेश्वरनाथ मंदिर के पोखरे का 98.5 लाख से होगा सुन्दरीकरण। ...

Maharajganj: प्राथमिक विद्यालय हो रहे मरम्मत कार्य में घटिया तरीके का किया जा रहा है प्रयोग

Maharajganj/Dhani: प्राथमिक विद्यालय हो रहें मरम्मत कार्य में अत्यन्त घटिया किस्म के मसाले व देशी बालू का अधिकता और सिमेन्ट नाम मात्र...

Maharajganj: नालियों के टूट जाने और समय से सफाई न होने से लोग हो रहे परेशान, जांच कर सम्बन्धित कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई –...

महाराजगंज/धानी: महाराजगंज जनपद के धानी ब्लाक के अधिकारी भूल चूके हैं अपनी जिम्मेदारी। ग्राम सभा पुरंदरपुर के टोला केवटलिया में नाली टूट...

Maharajganj: दबंग पंचायत मित्र द्वारा किया जा रहा है अवैध नाली का निर्माण।

महराजगंज- फरेंदा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम सभा पिपरा तहसीलदार में पंचायत मित्र द्वारा अपने व्यक्तिगत नाली का निर्माण ग्राम सभा के मुख्य...

Download GT App from
Google Play

विज्ञापन के लिए संपर्क करें +91 7843810623 (WhatsApp)

31 मई को ‘अभ्युदय’ की तरफ से “भविष्य की चुनौतियों का सामना करने हेतु कोरोना काल में मानसिक तैयारी की स्थिति” विषय पर एक ‘वेबिनार’ का आयोजन किया गया जिसमें वक्ता के रूप में मदनमोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कुलपति प्रो श्रीनिवास सिंह, दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ के स्थानीय सम्पादक आशीष त्रिपाठी तथा ‘हैप्पिनेस पाठ्यक्रम’ के मुख्य रचनाकार एस सी ई आर टी दिल्ली में कार्यरत श्रवण कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
प्रो श्रीनिवास सिंह ने वेबिनार की शुरुआत कोरोना की वर्तमान सर्वव्यापी महामारी की चर्चा से करते हुए कहा कि आज हमारी स्थिति अन्य देशों की तुलना में अच्छी है । महामारी की व्यापकता से आज हमारे सामने तमाम तरह की चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं । कैसे हम इन चुनौतियों से निपटें और कैसे हम इन चुनौतियों में सम्भावनाएं तलाशते हुए इन्हें अवसर में बदलें, हमें इस पर विचार करना तथा तदनुसार कार्य करना है । आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने स्पष्ट किया कि किस प्रकार से विभिन्न उपक्रमों के बन्द होने से आर्थिक दिक्कतें आज हमारे सामने आ खड़ी हुई हैं । कामगार श्रमिकों के विस्थापन से सामाजिक चुनौतियां भी हमारे सामने उपस्थित हुई हैं । सामाजिक असंतुलन बढ़ा है ।कानून व्यवस्था की समस्या भी सामने आई है । वहीं दूसरी तरफ देखा जाय तो बहुत सी नई उत्साहजनक चीजें भी मिली हैं, जैसे कुछ मैदानी इलाकों से भी हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का दिखाई देना, नदियों का स्वच्छ हो जाना आदि ।
इन परिस्थितियों में चुनौतियां सम्भावनाओं में भी बदली हैं । कोरोना काल के प्रारम्भ से पहले भारत में एन-95 मास्क नाममात्र का बनता था, आज 2 लाख प्रतिदिन के हिसाब से बन रहा है । पी पी ई किट भारत में बनता ही नहीं था, आज 2 लाख प्रतिदिन के हिसाब से तैयार हो रहा है ।
आज शैक्षणिक गतिविधियाँ बंद हैं । विद्यार्थियों ने किसी अच्छे प्रोफेसर का ऑनलाइन व्याख्यान पहले नहीं सुना होगा, आज सुन रहे हैं । पहले हम पर्यावरण शुद्धि के नारे ही गढ़ते रहे किन्तु आज बिना प्रयास के शुद्ध हवा ले रहे हैं । परिवार में बच्चों में भोजन के पूर्व हाथ धोने का संस्कार आया है । आमजन में जागरूकता आई है । हमें विभिन्न प्रकार की टेक्नोलॉजी का उपयोग करना होगा, ऐसी आवश्यकता है ।
श्री सिंह ने छात्रों को आत्मनिर्भर तथा भयमुक्त होकर अपनी पढ़ाई करने, नौकरीपेशा लोगों को अपने प्रोफेशन पर ध्यान देने, कामगारों को अपने अंदर यह विश्वास जगाने कि प्रभु के घर देर है अंधेर नहीं तथा इस प्रकार आशावादी बनने, व्यापारियों को अच्छा समय आएगा ऐसा विश्वास रखते हुए व्यापार में नया प्रयोग ऑनलाइन व्यापार का अपनाने, चिकित्सा विज्ञानियों को वैक्सीन तथा दवाओं के निर्माण की दिशा में कार्य करने तथा आमजन को आप बाहर न निकलें, स्वयं को बचाएँ, आप सुरक्षित रहेंगे तो समाज सुरक्षित रहेगा तथा अन्ततोगत्वा आप एक विजेता, एक लीडर बन कर निकलेंगे, इस संदेश के साथ अपना व्याख्यान सम्पन्न किया ।
आशीष त्रिपाठी ने कहा कि कई सदियों के बाद इतना ज्यादा विस्थापन हुआ है । हमारे बुजुर्ग भी इसे अभूतपूर्व बताते हैं । मानसिक तैयारी के बारे में हम क्या कर सकते हैं, इस पर विचार करना होगा । हम पत्रकार लोग भविष्य में झांकने की कोशिश अन्यों से थोड़ा पहले कर लेते हैं । मुझे ध्यान है कि व्हाटस-अप संवाद का दौर ‘मी-टू अभियान’ के समय चलन में आया था । आज ऑनलाइन सेमिनार हो रहे हैं । इसकी अच्छाई भी है कि हमारे विशेषज्ञ अपने घरों में अपनी लाइब्रेरी के पास हैं, तो हमें समृद्ध सामग्री प्राप्त होने की सुविधा होती है ।
अर्थतंत्र पर चर्चा करते हुए श्री त्रिपाठी ने कहा कि सरकारें इस दिशा में विचार कर रही हैं । आर्थिक परिदृश्य में हमारे दैनिक जीवन में खर्च करना कम हुआ है । शौक जैसे कार्यों पर अनावश्यक व्यय नहीं हो रहे हैं । हमें अपरिग्रह की आदत डालनी होगी ।
वायरस, बीमारियों और मनुष्यता को इंगित करते हुए श्री त्रिपाठी ने उदाहरण दिया कि बच्चा जब साइकिल चलाना सीखता है तो उसके पिता उसे सीखने में सहयोग करते हैं । जब वह सीख जाता है तो फिर पिता उसके साइकिल चलाने के दौरान बाधाएं भी डालते हैं ताकि वह हर वातावरण में साइकिल चला सकने के योग्य हो जाय । इसी प्रकार मानव जीवन में तरह-तरह की बाधाएं आती हैं । मनुष्य जब उस बाधा को पार कर लेता है तो प्रकृति प्रसन्न होती है और फिर नई तरह की बाधा पैदा करती है । सिफैलिस, पोलियो, एच आई वी, एन्थ्रेक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि कोरोना को हम अपना अंतिम शत्रु नहीं मान सकते । यह भी कहा कि योद्धा सिर्फ चिकित्सक या उनके स्टाफ ही नहीं, वरन् हम सब भी योद्धा हैं जो महामारी से दो-चार होते हैं ।
पीपीगंज के मुकुल नाम के एक निर्धन बुजुर्ग की सेवा तत्परता का भावुक वर्णन करते हुए श्री त्रिपाठी ने बिना किसी दिखावे के की जाने वाली सेवा को ही उचित ठहराते हुए उन लोगों को प्रश्न के धरातल पर खड़ा किया जो देने से ज्यादा दिखावे की भावना से कार्य करते हैं । हमें मानसिक ताकत उन अनाम दानदाताओं से मिलती है जो संवेदना के स्तर पर कार्य करने, सेवा करने आगे आते हैं ।
सम्भावनाओं के धरातल पर कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति का जिक्र करते हुए श्री त्रिपाठी ने एक उदाहरण दिया कि कैसे महराजगंज के 3 इंजीनियरिंग व एम बी ए डिग्रीधारी युवकों ने ‘जैविक खेती’ का व्यवसाय अपना कर रु 95 हजार का खरबूजा एक दिन में बेच लिया ।
श्रवण कुमार शुक्ल ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज मुसीबत के समय एक प्लेटफार्म का चयन कर हम संवाद में बैठे हैं । हर मुसीबत का अंत होता है, तो इसका भी होगा । वर्तमान में हमारा जीने का जो माॅडल है, वही भविष्य की चुनौतियां है । उत्पादन एक आवश्यक कार्य है । उत्पादन के विनिमय की पद्धतियां हैं । शिक्षा पूरी तरह से संस्थागत है । न्याय सुरक्षा भी संस्थागत है । उत्पादन संस्थागत है । विनिमय भी संस्थागत है । बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां जो हमने लगाईं, वह बड़े शहरों के पास है । प्रकृति तो पूरक के रूप में उपस्थित है, लेकिन हम इसे पूरकता में ले नहीं पाए । आज समस्या कोरोना के कारण नहीं बल्कि निर्बाध आवाजाही के कारण है । चिकित्सा – शिक्षा इस बात पर होती कि बीमारी न हो । पहले हमने पर्यावरण सुधार के लिए तमाम उपक्रम किये लेकिन हुआ कुछ नहीं । आज जब हमने कुछ नहीं किया या यूं कहें कि हमने दुरुपयोग नहीं किया तो नदियां साफ हो गईं ।
हमने सुविधा संग्रह को ही प्रयास मान लिया । हमें यह तय करना होगा कि पैसा महत्वपूर्ण है या सामान । सामान प्रकृति में मौजूद है । आज जो पलायन कर रहे हैं, पहले उन्हें सुविधा देना जरूरी है फिर समाधान । हमें सोचना होगा कि ‘मैं’ केवल ‘शरीर’ नहीं हूँ । मैं ‘विचार’ भी हूँ । एक परिवार के सम्बन्धों में हम जी रहे हैं । लेकिन हमारा विश्वासपूर्वक जीने का अभ्यास नहीं हो पाया है । सही शिक्षा संस्कार का इंतजाम करना होगा । आज कोरोना उतना दुखदायी नहीं है जितना श्रमसाधकों का पलायन । जहां संतुलन नहीं है, वहां हम कोई भी उपाय कर लें, निरर्थक ही होगा । हमें विश्वास है कि कोरोना का यह दौर एक नई दुनिया, एक नया विकास, एक नया भारत देकर जाएगा ।
वेबिनार को मदनमोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के चिकित्साधिकारी डाॅ ए के पाण्डेय ने भी सम्बोधित किया । प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में बाबा राघवदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय देवरिया की एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ भावना सिन्हा द्वारा छोटे शहरों के परिप्रेक्ष्य में ऑनलाइन शिक्षा पर पूछे गए सवाल का उत्तर श्रवण शुक्ल ने दिया । एक अन्य प्रतिभागी द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर दिये गए विषय पर आशीष त्रिपाठी ने विश्लेषणात्मक विवेचन प्रस्तुत किया ।
कार्यक्रम का सफल संचालन ‘अभ्युदय’ के सचिव उपेन्द प्रसाद द्विवेदी तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ उदयवीर सिंह ने किया । वेबिनार में 60 प्रतिभागी उपस्थित थे ।

ये भी पढ़े :  गोरखपुर सूरजकुंडधाम नगर निवासियों ने मोबाइल टावर लगाने का किया विरोध...

Hot Topics

गोरखपुर : सगी बहन से शादी करने की जिद पर अड़ा भाई; यहां जाने क्या है माजरा !

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां चिलुआताल में...

गोरखपुर:चिता पर रखे शव के जीवित होने पर मचा हड़कंप, रोकना पड़ा दाह संस्कार,

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां...

देवरिया:- थाने में ही महिला फरियादी के सामने हस्तमैथून करने वाला थानेदार फ़रार,25 हज़ार के इनाम की घोषणा

देवरिया के अंतर्गत आने वाले थाने भटनी में महिला फरियादी के सामने हस्तमैथुन करने वाली थानेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज...

Related Articles

गोरखपुर के नवोदित कलाकारो से सजी फ़िल्म ‘ऑक्सीजन ‘के अभिनव प्रयास की खूब हो रही चर्चा

नवोदित कलाकारों को लेकर डॉ. सौरभ पाण्डेय की फ़िल्म 'ऑक्सीजन 'के अभिनव प्रयास ने रचा इतिहास
ये भी पढ़े :  गोरखपुर के छात्रों ने वाल पेंटिंग के जरिये दिया समाजिक संदेश,सैकड़ो छात्र गोरखपुर महोत्सव में चार-चांद लगाने में कर रहे मदद....

बड़हलगंज के बाबा जलेश्वरनाथ मंदिर के पोखरे का 98.5 लाख से होगा सुन्दरीकरण।

बड़हलगंज के बाबा जलेश्वरनाथ मंदिर के पोखरे का 98.5 लाख से होगा सुन्दरीकरण। ...

विधायक विनय शंकर तिवारी किडनी की बीमारी से पीड़ित ग़रीब युवा के लिए बने मसीहा…

हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से किडनी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मदद हेतु युवाओं के द्वारा अपील की...
%d bloggers like this: