Friday, July 30, 2021

जल्द ही किसान चला सकेंगे सीएनजी से ट्रैक्टर, सरकार की मंजूरी। 100 रुपये में एक बीघा खेत की जुताई

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वह दिन दूर नहीं है जब खेत जोतने के लिए किसान डीजल के बजाय सीएनजी या बायो गैस से अपना ट्रैक्टर चलाएंगे। इसके लिए प्रशासनिक रूप से मार्ग प्रशस्त हो चुका है। केंद्र सरकार ने डीजल के बदले सीएनजी या बायो गैस से ट्रैक्टर चलाने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में जरूरी बदलाव कर इसे अधिसूचित भी कर दिया है।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की अनुसंधान इकाई सेंट्रल मेकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमईआरआई) की वैज्ञानिक डा. अंजली चटर्जी का कहना है कि सीएनजी से ट्रैक्टर चलाने पर किसानों का खर्च घटेगा क्योंकि डीजल के मुकाबले सीएनजी की लागत कम हो जाती है।

अभी दिल्ली में डीजल 66-67 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है, जबकि सीएनजी की प्रति किलो कीमत करीब 45 रुपये है। यही नहीं, डीजल के मुकाबले सीएनजी कुशल ईंधन माना जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका पर्यावरण पर कम से कम दुष्प्रभाव पड़ता है।

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100 रुपये में हो जाएगी एक बीघा खेत की जुताई

सोनीपत के किसान रणधीर सिंह राणा बताते हैं कि एक एकड़ खेत की जुताई में दो से तीन लीटर डीजल की खपत होती है। जुताई करने वाला ट्रैक्टर कैसा है, इस पर ईंधन की खपत निर्भर करती है। उदाहरण के लिए यदि ट्रैक्टर नया है तो डीजल की खपत कम होगी और यदि इंजन पुराना पड़ गया है, उसका रख-रखाव ठीक से नहीं हो रहा है तो डीजल ज्यादा भी लग जाता है।

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यदि गहरी जुताई करनी है तो भी डीजल की ज्यादा खपत होती है। उनका कहना है कि यदि सीएनजी वाला ट्रैक्टर आ जाए, तो 100 रुपये में आराम से एक बीघा खेत जुत जाएगा।

पुराने ट्रैक्टरों में भी लग सकेगी सीएनजी किट

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम में संशोधन के बाद पुराने ट्रैक्टर में भी सीएनजी किट लगवाया जा सकता है। इसके अलावा जो नए ट्रैक्टर बाजार में आएंगे, उसमें फैक्ट्री फिटेड सीएनजी किट होगी।

इसके साथ ही ट्रैक्टर को बायो सीएनजी से भी चलाया जा सकेगा। सरकार इस समय हर गांव को बायोगैस प्लांट देने की व्यवस्था कर रही है। इसमें खेत में बची पराली या खेती-बाड़ी के अपशिष्ट या गोबर से भी बायोगैस बनाया जा सकेगा। ट्रैक्टर में डीजल का इस्तेमाल न सिर्फ महंगा विकल्प है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी क्षति पहुंचती है।

इस क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि किसान ट्रैक्टर में सीएनजी किट लगवा तो लेंगे लेकिन सीएनजी भरवाएंगे कहां से? डीजल लेने के लिए वह अपने गांव के पास ही एक-दो किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले पेट्रोल पंप पर जाकर न सिर्फ ट्रैक्टर में टंकी भरवा लेते हैं बल्कि एक-दो अतिरिक्त ड्रम में भी डीजल भरवा लेते हैं।

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ऐसा इसलिए ताकि बार-बार पंप नहीं जाना पड़े, घर में ही डीजल भर लें। सीएनजी सिलिंडर में तो तय मात्रा में ही गैस भरवाई जा सकेगी और हर बार सीएनजी स्टेशन ही आना पड़ेगा। इसके अलावा दिल्ली जैसे शहर में सीएनजी भरवाने के लिए लाइन लगानी पड़ती है, तो गांव से ट्रैक्टर शहर आएंगे तो क्या हालत होगी?

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