Sunday, June 13, 2021

जानिए ग्वालियर के सिंधिया परिवार का सियासी सफर

महराजगंज के नगर पंचायत आनंद नगर में गैस सिलेंडर फटा, छः लोग जख्मी

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में जारी सियासी उठापटक के केंद्र में एक बार फिर ग्वालियर राजघराने की चर्चा सर्वोपरि है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफे को उनकी दादी की याद दिला दी जो चाहती थीं कि पूरा परिवार भाजपा में रहे। जिवाजी राव सिंधिया और विजया राजे सिंधिया कीं पांच संतानों में माधवराव और अब उनके पुत्र ज्योतिरादित्य के सिवा सभी भाजपा में ही हैं। आइए जानते हैं ग्वालियर के सिंधिया परिवार का सियासी सफर

विजया राजे सिंधिया ( राज माता सिंधिया )

ग्वालियर राजघराने की राजमाता विजयराजे सिंधिया ने 1957 में कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। वह गुना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। सिर्फ 10 साल में ही उनका मोहभंग हो गया और 1967 में वह जनसंघ में चली गईं। विजयराजे सिंधिया के कारण ग्वालियर क्षेत्र में जनसंघ मजबूत हुआ और 1971 में इंदिरा गांधी की लहर के बावजूद जनसंघ यहां की तीन सीटें जीतने में कामयाब रहा। खुद विजयराजे सिंधिया भिंड से, अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से और विजय राजे सिंधिया के बेटे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया गुना से सांसद बने।

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माधव राव सिंधिया

माधव राव सिंधिया अपने मां-पिता के इकलौते बेटे थे। वह चार बहनों के बीच अपने माता-पिता की तीसरी संतान थे। माधवराव सिंधिया सिर्फ 26 साल की उम्र में सांसद चुने गए थे, लेकिन वह बहुत दिन तक जनसंघ में नहीं रुके। 1977 में आपातकाल के बाद उनके रास्ते जनसंघ और अपनी मां विजयराजे सिंधिया से अलग हो गए। 1980 में माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर केंद्रीय मंत्री भी बने। उनका विमान हादसे में 2001 में निधन हो गया। ज्योतिरादित्य सिंधिया इनके पुत्र हैं।

वसुंधरा राजे सिंधिया

विजयराजे सिंधिया की बेटियों वसुंधरा राजे सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया ने भी राजनीति में हैं। 1984 में वसुंधरा राजे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुईं। वह कई बार राजस्थान की सीएम भी बन चुकी हैं।

यशोधरा राजे सिंधिया

वसुंधरा राजे सिंधिया की बहन यशोधरा 1977 में अमेरिका चली गईं। उनके तीन बच्चे हैं लेकिन राजनीति में किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। 1994 में जब यशोधरा भारत लौटीं तो उन्होंने मां की इच्छा के मुताबिक, भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और 1998 में भाजपा के ही टिकट पर चुनाव लड़ा। पांच बार विधायक रह चुकी यशोधरा राजे सिंधिया शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री भी रही हैं।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया

2001 में एक हादसे में माधवराव सिंधिया की मौत हो गई तो ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पिता की विरासत संभालते रहे और कांग्रेस के मजबूत नेता बने रहे। गुना सीट पर उपचुनाव हुए तो ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद चुने गए। 2002 में पहली जीत के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी चुनाव नहीं हारे थे लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें करारा झटका लगा। कभी उनके ही सहयोगी रहे कृष्ण पाल सिंह यादव ने ही सिंधिया को हरा दिया। इसके बाद लगातार पार्टी में हासिए पर रहने के कारण 10 मार्च 2020 को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया।

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दुष्यंत सिंह

ग्वालियर राजघराने ताल्लुकात रखने वाली राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत भी भाजपा में ही हैं। वह अभी राजस्थान की झालवाड़ सीट से सांसद हैं।

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