Sunday, July 25, 2021

जीवन बीमा सलाहकार जोखिम निर्धारण की पहली कड़ी है

पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी मासिक अपराध गोष्ठी में अपराधों की समीक्षा व रोकथाम हेतु दिये गये आवश्यक दिशा-निर्देश

Maharajganj: पुलिस अधीक्षक महराजगंज प्रदीप गुप्ता द्वारा आज दिनांक 17.07.2021 को पुलिस लाइन्स स्थित सभागार में मासिक अपराध गोष्ठी में कानून-व्यवस्था की...

शायर मुनव्वर राना के बोल, ‘दोबारा सीएम बने योगी तो यूपी छोड़ दूंगा’

लखनऊ: मशहूर शायर मुनव्वर राना एक बार फिर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं।उन्होंने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ दोबारा...

Maharajganj: CO सुनील दत्त दूबे द्वारा कुशल पर्यवेक्षण करने पर अपर पुलिस महानिदेशक जोन गोरखपुर ने प्रशस्ति पत्र से नवाजा।

Maharajganj/Farenda: सीओ फरेन्दा सुनील दत्त दूबे को थाना पुरन्दरपुर में नवीन बीट प्रणाली के क्रियान्वयन में कुशल पर्यवेक्षण करने पर अपर पुलिस...

विधायक विनय शंकर तिवारी किडनी की बीमारी से पीड़ित ग़रीब युवा के लिए बने मसीहा…

हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से किडनी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मदद हेतु युवाओं के द्वारा अपील की...

महराजगंज जिले के फरेंदा थाने के अंतर्गत SBI कृषि विकास शाखा के सामने से मोटरसाइकिल चोरी

Maharajganj: महाराजगंज जिले के फरेंदा थाने के अंतगर्त मंगलवार को बृजमनगंज रोड पर भारतीय स्टेट बैंक कृषि विकास शाखा के ठीक...

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जीवन बीमा अभिकर्ता, जीवन बीमा कंपनी और ग्राहकों के बीच कि एक अटूट कड़ी है जिसके माध्यम से बीमा कंपनी को पालिसीधारक प्राप्त होते है और पालिसीधारक को उचित बीमा सुरक्षा | इन दोनों के मध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लिये बीमाकर्ता अभिकर्ता को निर्धारित कमीशन प्रदान करता है | पर चिंता कि बात यह है कि बहुत सारे अभिकर्ता लोग कमीशन के लालच के वशीभूत होकर अधिकतम पॉलिसी विक्रय करना चाहते है और जिसकी वजह से अप्रत्यक्ष रूप से वह बीमाकर्ता और पालिसीधारक दोनों का नुकशान करते है | कहीं न कहीं अज्ञानता के कारण में भी बीमा अभिकर्ता ऐसा कर रहें है | आइये जानने का प्रयास करते है कि कहाँ चूक हो रही है और कैसे उसे सुधारा जाय जिससे अच्छे उत्पादक माहौल को बनाया जा सके |
जीवन बीमा अभिकर्ता जब किसी बीमा कंपनी के साथ कार्य करने के लिये प्रेरित होता है तो उसे सिर्फ बाध्य आवश्यकताओं को पूर्ण करवाने के पश्चात बीमा कंपनी के बिक्रय प्रतिनिधि उसे नये – नये ख्वाब दिखाने लगते है | और कहीं न कहीं बीमा अभिकर्ता के दिमाग में यह घर कर जाता है कि जितना अधिक बीमा पॉलिसी बेचेंगा उतना ही अधिक कमीशन प्राप्त होगा | और इस विचारधारा के कारण ही वो जिस व्यक्ति को बीमा पॉलिसी बेच रहें है उसके जोखिम का सही मूल्यांकन नही करते | सिर्फ और सिर्फ प्रपोजल फार्म पूर्ण करने और प्रीमियम प्राप्ति पर जोर देते है | और इस कारण वो सही रूप से उस व्यक्ति के जोखिम का आकलन नही कर पाते जिसे पॉलिसी बेच रहें है | इनकी इस भूल कि वजह से ही कई मामलों में बीमा कंपनी मृत्यु दावा होने की स्थिति में उसे दावा भुगतान देने से मन कर देती है, जिससे उस व्यक्ति के घर वाले बीमा अभिकर्ता और बीमा कंपनी के खिलाफ हो जाते है | अगर दूसरे पहलु के बारे में सोचा जाय तो अर्ली मृत्यु दावा होने कि स्थिति में बीमा कंपनी को एक बड़ी राशि का भुगतान तुरन्त करना पड़ता है वादों के अनुरूप पर जब ऐसे दावों कि संख्या अधिक हो जाती है तो बीमा कंपनी को नुकशान उठाना पड़ता है | और बीमा अभिकर्ता को कमीशन जो लंबी अवधि तक मिलने का अनुमान होता है वो मृत्यु दावे के पश्चात समाप्त हो जाता है | और तो और पॉलिसी धारक के आस-पास के लोगों का विश्व उस बीमा कंपनी और अभिकर्ता से पूर्ण रूप से उठ जाता है नतीजन एक छोटी से चूक कि वजह से सब को नुकशान उठाना पड़ता है |

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बीमा अभिकर्ता पहले बीमांकक होते है जो व्यक्ति के जोखिम का सही आकलन करते है | अगर वह बीमा प्रस्ताव पत्र भरते समय सभी बारीक़ पहलुओं को जानने का पूरा प्रयास करके प्रस्ताव पत्र भरे तो सही मायने में सभी को लाभ प्राप्त होगा | साधारणतया बीमा अभिकर्ता व्यक्ति की आयु प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने के दशा में जो व्यक्ति अपनी आयु बताता है उसे मान लेते है | जबकि ऐसे स्थिति में बीमा अभिकर्ताओं को चाहिये की उनके घर के अन्य सदस्यों के आयु के आधार पर प्रस्तावक कि आयु का सही निर्धारण करें | अक्सर करके बीमा अभिकर्ता प्रस्तावक के पारिवारिक स्थिति सही रूप में नही भरते जबकि उन्हें पारिवारिक स्थिति का वास्तविक विवरण भरना चाहिये क्योकि उसी आधार पर उनके जोखिम का निर्धारण होता है | अक्सर बीमा अभिकर्ता प्रस्तावक के स्वस्थ्य कि स्थिति में अच्छा स्वस्थ्य लिख देते है जबकि उन्हें चाहिये कि उनके स्वस्थ्य कि बारीकी से बात-चीत में ही जानकारी प्राप्त करे और कोई ऐसे बीमारी रही है बिगत वर्षों में जिससे उनके प्रीमियम पर असर पड़ेगा और वो जोखिम निर्धारण में सहायक हो तो जरुर उसके विवरण को लिखे | जिससे हो सकता हो बीमाकर्ता एक्स्ट्रा प्रीमियम प्रस्तावक से चार्ज करे पर दावे की स्थिति में किसी को भी नुकशान नही होगा | औरतों के बीमा में अभिकर्ता को अधिक चौकन्ना रहना चाहिये क्योकि आज भी हमारे यहाँ पर्दा प्रथा का प्रचालन है लोग बीमा कंपनी को धोखा देने के उद्देश्य से किसी ऐसे औरत का बीमा करवाना चाहते है जो बीमार है और डाक्टर ने उसे सलाह दे दी है कि वो कुछ दिन कि ही मेहमान है | उसके घर वाले उसकी जगह पर किसी और औरत को दिखाकर बीमा करवा सकते है | ऐसी स्थिति में बीमा अभिकर्ता को चाहिये कि आस-पास पड़ोसियों से भी जानकारी प्राप्त करने के पश्चात ही औरतों का बीमा करें | कभी – कभी लोग बीमा कंपनी को धोखा देने के उद्देश्य से बीमा अपने घर से दूर किसी और जगह से बीमा करवाते है ऐसे में नैतिक जोखिम कि संभावना हो सकती है | ऐसे बीमा प्रस्ताव में बीमा अभिकर्ता को बारीकी से जांच करनी चाहिये |

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ये कुछ महत्वपूर्ण चीजे है जिनका बीमा अभिकर्ताओं को विशेष ध्यान देना चाहिये साथ ही यह सुनिश्चित करें कि प्रस्ताव-पत्र के एक-एक कालम पूरी जानकारी के पश्चात भरे जाय | जिससे भविष्य में किसी को भी नुकशान न हो चाहे बीमा अभिकर्ता हो या बीमाकर्ता या फिर पॉलिसी धारक | याद रखे आप पहले बीमांकक है बीमित व्यक्ति के जोखिम का निर्धारण करने वाले और आपको अलर्ट रह्क कर के बीमा करना होगा यह न केवल आपको मजबूत बनाएगा बल्कि आपके प्रतियोगियों से आपको अलग भी रखेगा. इसी लिये तो कहते है – You are First Underwriter of Risk.

डॉ अजय कुमार मिश्रा (लखनऊ)
Drajaykrmishra@gmail.com

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