Tuesday, April 20, 2021

ट्विटर, फेसबुक पर लोग यूपी के लेखपाल दुर्गेश चौधरी को क्यों ढूंढ रहे हैं?

कोरोना कॉल में होमियोपैथी पर विश्वास रखें, योग व्यायाम करें : डॉ रूप कुमार बनर्जी

कोरोना कॉल में होमियोपैथी पर विश्वास रखें, योग व्यायाम करें : डॉ रूप कुमार बनर्जी सकरात्मक सोचें, होमियोपैथी पर...

UP: पंचायत चुनाव में पैसा बांट रहे थे BJP के पूर्व MLA के भाई, रंगे हाथ पकड़े गए

पूर्व भाजपा विधायक अवनीन्द्र नाथ द्विवेदी उर्फ महंत दूबे के छोटे भाई व पूर्व प्रधान सत्येन्द्र नाथ द्विवेदी उर्फ राजू द्विवेदी को...

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हुए कोरोना पॉजिटिव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हुए कोरोना पॉजिटिव योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर दी...

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कोरोना पॉजिटिव          

गोरखपुर टाइम्स ब्रेकिंग :-    अखिलेश यादव कोरोना पॉजिटिव               अभी-अभी मेरी कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है। मैंने...

महापौर हुये कोरोना पॉजिटिव,घर मे हुए आइसोलेट

महापौर हुये कोरोना पॉजिटिव,घर मे हुए आइसोलेट          गोरखपुर : महापौर सीताराम जायसवाल ने...

Download GT App from
Google Play

विज्ञापन के लिए संपर्क करें +91 7843810623 (WhatsApp)

चार साल में चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी. यही दावा है उन वीडियोज का जो पिछले कुछ दिनों से यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के ऑफिस के ट्विटर हैंडल से शेयर किए जा रहे हैं. ऐसा ही एक वीडियो 10 मार्च को शेयर किया गया था. दावा था कि दुर्गेश चौधरी नाम के एक शख्स को लेखपाल की नौकरी मिली है. ट्वीट करते ही ट्विटर पर मानो हंगामा हो गया. लोग सवाल करने लगे कि आखिरी बार लेखपालों की भर्ती साल 2015 में हुई थी, तो दुर्गेश चौधरी का सलेक्शन कब और कैसे हुआ? विवाद बढ़ा तो ट्वीट डिलीट कर दिया गया. अब विपक्ष इस मामले में सरकार को घेर रहा है.

योगी आदित्यनाथ के ऑफिस की ओर से जो ट्वीट किया गया उसमें कहा गया था कि,“सरकारी नौकरी हेतु आयोजित परीक्षाओं के समयबद्ध परिणामों एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज को धन्यवाद ज्ञापित करते श्री दुर्गेश चौधरी जी. श्री दुर्गेश चौधरी जी की नियुक्ति राजस्व लेखपाल के पद पर पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई है.”

साथ में एक वीडियो लगा था. वीडियो में यूपी के महाराजगंज के दुर्गेश चौधरी बताते दिखे कि किस तरह उन्हें सरकारी नौकरी मिली.

शेयर करने के बाद से ही लोग वीडियो और ट्वीट पर सवाल उठाने लगे. सवाल ये कि साल 2015 के बाद से जब लेखपाल पद के लिए वैकेंसी ही नहीं निकली तब दुर्गेश चौधरी को नौकरी कैसे मिली. आपको बता दें कि साल 2015 में लेखपाल भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू हुई थी. उस वक्त यूपी में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे. साल 2016 में प्रक्रिया पूरी हुई यानी दुर्गेश तब लेखपाल बन गए थे. इस बीच समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी ट्विटर पर दावा करना शुरू कर दिया कि दुर्गेश चौधरी की भर्ती समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में हुई थी.

ये भी पढ़े :  इतने रुपये हो गया आपके शहर में पेट्रोल डीजल का दाम, यहां करें चेक
ये भी पढ़े :  महाराजगंज:चोरो ने बंद घर का ताला तोड़कर लाखों की चोरी कर हुए फरार....

गौर करने वाली बात ये भी है कि यूपी में बीजेपी की सरकार साल 2017 में बनी थी. योगी आदित्यनाथ ने सीएम पद की शपथ 19 मार्च 2017 को ली थी. ये पूरी बात सामने आते ही मुख्यमंत्री ऑफिस के ट्विटर हैंडल से ट्वीट को डिलीट कर दिया गया, लेकिन अब विपक्ष इस मामले में सरकार को घेर रहा है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ट्विटर पर लिखा,

मुख्यमंत्री जी के आधिकारिक अकाउंट से दुर्गेश चौधरी नामक व्यक्ति का वीडियो डाला गया जिसमें उसने लेखपाल की पारदर्शी भर्ती के लिए योगी जो को धन्यवाद दिया. अब पता चला है 5 साल से लेखपाल की कोई भर्ती ही नहीं आयी है, पोल खुलते ही ट्वीट डिलीट कर दिया गया है.”

यूपी कांग्रेस ने एक के बाद एक दो ट्वीट किए और सीएम योगी पर निशाना साधा. कांग्रेस ने अपने ट्वीट में लिखा,“झूठ पकड़ा गया तो ट्वीट डिलीट कर दिया गया. जैसे ट्वीट डिलीट हुआ, वैसे ही झूठ की बुनियाद पर टिकी सरकार भी डिलीट होगी.”

रिटार्यड IAS सूर्य प्रताप सिंह ने भी प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि छात्र दुर्गेश चौधरी जी का योगदान कभी नहीं भूलेंगे, उन्होंने अकेले सरकार की पोल खोल दी.

ये भी पढ़े :  विष मुक्त खेती जहर मुक्त खाद्यान और नशा मुक्त गाँव विषय पर गोष्ठी का आयोजन सम्पन्न हुवा।

ये तो थी नेताओं की बातें. ट्वीटर पर अन्य लोग भी इसको लेकर सरकार को घेरते दिखे. सवाल करते दिखे कि विज्ञापन नंबर बताइए, कब निकली थी भर्ती, कब आया नतीजा? वहीं इस मामले में अधिक जानकारी के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने दुर्गेश चौधरी को फोन मिलाया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. वहीं नाम नहीं छापने की शर्त पर एक लेखपाल ने बताया कि 2015 के बाद से कोई भर्ती नहीं निकली है, लेकिन मृतक आश्रित जो हैं, उन्हें नौकरियां मिली हैं.

ये भी पढ़े :  नगर पंचायत आनन्द नगर में अमर शहीद भगत सिंह के जयंती समारोह का हुआ आयोजन...

“दुर्गेश चौधरी को साल 2015-2016 में नौकरी मिली थी. पहले फरेंदा में इनकी पोस्टिंग थी, लेकिन अभी कुछ वक्त पहले ही महाराजगंज में पोस्टिंग हुई है. ट्विटर पर इस मामले की चर्चा होने लगी, तभी से दुर्गेश किसी से बात नहीं कर रहे हैं.”

जानकारी के मुताबिक यूपी में राजस्व लेखपालों के 30,837 पद हैं जिनमें से करीब 8 हजार पद खाली हैं. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिए लेखपालों की भर्ती होनी है. UPSSSC की ओर से 2019 में चकबंदी लेखपाल पद के लिए 1364 वैकेंसी निकाली थीं जिनको बाद में रद्द कर दिया गया. साल 2020 में राजस्व परिषद की ओर से 7882 लेखपालों की भर्ती का प्रस्ताव UPSSSC को भेजा गया है.

Hot Topics

गोरखपुर : सगी बहन से शादी करने की जिद पर अड़ा भाई; यहां जाने क्या है माजरा !

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां चिलुआताल में...

गोरखपुर:चिता पर रखे शव के जीवित होने पर मचा हड़कंप, रोकना पड़ा दाह संस्कार,

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां...

देवरिया:- थाने में ही महिला फरियादी के सामने हस्तमैथून करने वाला थानेदार फ़रार,25 हज़ार के इनाम की घोषणा

देवरिया के अंतर्गत आने वाले थाने भटनी में महिला फरियादी के सामने हस्तमैथुन करने वाली थानेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज...

Related Articles

UP: पंचायत चुनाव में पैसा बांट रहे थे BJP के पूर्व MLA के भाई, रंगे हाथ पकड़े गए

पूर्व भाजपा विधायक अवनीन्द्र नाथ द्विवेदी उर्फ महंत दूबे के छोटे भाई व पूर्व प्रधान सत्येन्द्र नाथ द्विवेदी उर्फ राजू द्विवेदी को...

यूपी बोर्ड 2021: हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं आठ मई से, स्कीम जारी

लखनऊ. यूपी बोर्ड 2021 के हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं अब 24 अप्रैल की जगह आठ...

बुजुर्ग माता-पिता की सेवा नहीं की तो संपत्ति से होंगे बेदखल

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब बुजुर्ग माता-पिता के हित में नया कानून लाने की तैयारी में है। योगी सरकार अब...
%d bloggers like this: