Thursday, December 12, 2019
Sports

धौनी के रन आउट पर उठे सवाल…..

आइपीएल (IPL) में एक बार फिर अंपायर के फैसले को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। फाइनल मैच में मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कप्तान MS Dhoni को एक करीबी मामले में रन आउट दिया गया। इस रन आउट के बाद से ही चेन्नई और क्रिकेट के फैन्स फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ नए एंगल की दुहाई दे रहे हैं, तो कुछ बेनिफिट ऑफ डाउट की बात कर रहे हैं। आइए समझते हैं क्या नियम और क्या है पूरा मामला।

क्या है मामला

मुंबई इंडियंस के खिलाफ चौथे खिताब के लिए लड़ते हुए एमएस धौनी ने 8 गेंदों में 2 रन बनाए थे। 150 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सीएसके ने 12.3 ओवर में 3 विकेट खोकर 81 रन बना लिए थे। लेकिन, हार्दिक पंड्या के ओवर की शॉर्ट गेंद पर शेन वॉटसन ने स्क्वायर लेग पर खेला, जहां लसिथ मलिंगा खड़े थे। मलिंगा ने देर से गेंद को पकड़ा और नॉन स्ट्राइकर की ओर थ्रो कर दिया। विकेट के पास खड़े पंड्या बॉल नहीं पकड़ सके और तभी धौनी दूसरा रन लेने के लिए दौड़ पड़े। उधर, ईशान किशन ने गेंद को कलेक्ट करके डायरेक्ट थ्रो किया और बॉस सीधे स्टंप्स पर जा लगी। इसके बाद थर्ड अंपायर ने धौनी को रन आउट दे दिया।
क्या है विवाद

धौनी के इस रन आउट का महत्व आप इस तरीके से समझ सकते हैं कि सचिन तेंदुलकर ने इसे मैच का टर्निंग प्वॉइंट करार दिया। विवाद की दो मुख्य वजह हैं। पहली वजह है वह एंगल जिसमें धौनी क्रीज में पहुंचते नजर आ रहे हैं। दूसरी वजह है बेनिफिट ऑफ डाउट। लोगों को मानना है कि ऐसी परिस्थिति में अंपयार को बेनिफिट ऑफ डाउट का फायदा धौनी को देना चाहिए था।
क्या कहते हैं नियम

ICC के नए नियमों के मुताबिक अगर गिल्ली उड़ने से पहले बैट्समैन के बल्ले का कुछ हिस्सा क्रीज में होना चाहिए। नए नियम ये भी कहते है कि अगर बल्ला हवा में हो, तो भी बल्लेबाज रन आउट नहीं माना जाएगा। धौनी का बैट एक एंगल से इस नियम के खांचे में तो फिट बैठता है, लेकिन दूसरे एंगल से यह वह काफी दूर नजर आ रहे हैं। वहीं, जहां तक बात बेनिफिट ऑफ डाउट की है तो वह अंपायर के ऊपर निर्भर करता है। यह तब लागू होता है, जब किसी भी एंगल से मामला साफ नजर न आए। अंपायर को धौनी एक एंगल से क्रीज से बाहर नजर आ रहे थे।

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