Monday, June 14, 2021

नाबार्ड द्वारा संवर्धित कृषक उत्पादक संगठन-छोटे किसानों के लिए वरदान- सीएम योगी आदित्यनाथ

गोररखपुर :फर्जी अस्पताल में कम्पाउंडर चला रहा ओपीडी

गोररखपुर :फर्जी अस्पताल में कम्पाउंडर चला रहा ओपीडीकोरोना काल मे फर्जी अस्पतालों की आई बाढ़ (((अंगद राय की कलम से)))

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दिनांक 29 दिसंबर को गोरखपुर विश्वविद्यालय के परिसर में नाबार्ड, उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य स्तरीय कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) सम्मेलन तथा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्य नाथ जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य के 95ः से भी अधिक लघु और सीमांत कृषकों के लिए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाना एक जरूरत बन गई है। कृषि उत्पादों की मूल्य श्रृंखला तथा आमदनी में किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर बल देते हुए उन्होने कहा कि प्रदेश की धरती आज भी सोना उगल सकती है और कृषक उत्पादक संगठन इस उद्देश्य को पूरा करने का सबसे प्रभावशाली माध्यम हो सकता है। उन्होने कहा कि भूजोत के लगातार घटते आकार, खेती मे बढ़ती हुए लागत, जलवायु परिवर्तन तथा बाजार जोखिमों, कृषि मे उन्नत तकनीकि इस्तेमाल करने के जरूरत, उत्पाद की प्रोसेसिंग कर उसकी मूल्य वृद्धि कराना, बाजार मे किसानो को उनके उत्पाद का उचित बाजार मूल्य दिलाना जैसी कई चुनौतियों का सामना अकेला किसान नही कर सकता है। लेकिन अगर किसान एफपीओ के माध्यम से संगठित हो तो इन समस्याओं का उचित समाधान किया जा सकता है। मुख्यमंत्री जी ने आगे कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है तथा कृषि को सक्षम बनाने हेतु प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है तथा नाबार्ड एवं भारत सरकार की आर्थिक साझेदारी से कई दशकों से लम्बित बड़ी सिंचाई परियोजनाएं जैसे कि बाणसागर परियोजना, सरयू नहर परियोजना, अर्जुन सहायक परियोजना आदि पूरी की जाएंगी, जिससे कि वर्ष के अंत तक प्रदेश में लगभग 20 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचन क्षमता का विकास होगा। राज्य सरकार द्वारा किसानों की समस्याओं के निराकरण हेतु अनेक महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तथा एफपीओ को कृषि सम्बंधित यंत्रध् मशीने तथा बीज प्रोसेसिंगध् भंडारण सम्बंधी हर मदद दी जा रही है। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों तथा गाँवों तक विज्ञान एवं नवीनतम तकनीकी पहुंचाने मे भी सफलता हासिल की जा रही है। उन्होने किसानो को सलाह दी कि बाजार मे बन रही मांगों को ध्यान मे रखते हुए अपने उत्पादन मे आवश्यक बदलाव लाएं। उन्होंने नाबार्ड, विविध बैंकों, सरकारी विभागों को किसानों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही निराश्रित गौवंश हेतु संचालित योजनाओं को जैविक खेती से जोड़ते हुए जीरो बजट खेती की ओर अग्रसर होने पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री महोदय ने उत्तर प्रदेश में 362 कृषक उत्पादक संगठनों के गठन व संवर्धन के नाबार्ड की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि एफपीओ के माध्यम से अन्नदाता किसान को समृद्ध करने की व्यापक संभावनाओं के दृष्टिगत प्रदेश के सभी 823 विकास खंडों में एक-एक एफपीओ गठित किया जाना चाहिए और आगामी समय में सभी ग्राम पंचायतों में एफपीओ गठन का लक्ष्य होना चाहिए।

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कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही जी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार यथा कृषि उत्पाद विपणन एक्ट में संशोधन, इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई- नाम) पर मंडियों को पंजीकृत कराना जैसे कार्य किए गए हैं। उन्होने नाबार्ड तथा बैंकों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड देने हेतु किए गए कार्य की सराहना की तथा उसे जारी रखने की सलाह दी जिससे कृषकों को एफपीओ के माध्यम से बाजारों से सीधे जोड़ा जा सके। श्री शाही जी ने उत्पादन में मूल्य संवर्धन हेतु एफपीओ की अहम भूमिका, एफपीओ को क्रय केंद्र के रूप में बढ़ावा देने की संभाव्यता तथा बीज विधायन केंद्र एवं कस्टम हायरिंग सेंटर आदि योजनाओं में एफपीओ को प्राथमिकता दिये जाने के प्रति सरकार के सचेष्ट होने की भी चर्चा की।

नाबार्ड, उत्तर प्रदेश के मुख्य महाप्रबन्धक श्री शंकर ए पाण्डे ने बताया कि नाबार्ड ने गत तीन सालों में अपने प्रयासों से तथा ग्रामध्जिला स्तर की संस्थाओं की मदद से अब तक उत्तर प्रदेश में 362 किसान उत्पादक संगठन बनाने हेतु स्वीकृति दी है, जिसमें से 208 कृषक संगठन कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत हो गए हैं। इसमें कुल सदस्य संख्या लगभग 48,000 है और 55 जिले आच्छादित हैं। राज्य के कई एफपीओ अच्छा प्रदर्शन करते हुए किसानो की आय दुगनी करने की ओर महत्वपूर्ण योगदान दें रही है तथा उन्हे बैंकों से ऋण प्रवाह प्रारम्भ हो गया है साथ ही साथ एफपीओ द्वारा कृषि व्यवसाए वृद्धि पर भी बल दिया गया है।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पुणे जिले से महाएफपीसी के योगेश थोरट ने महाराष्ट्र में एफपीओ की स्थिति पर प्रकाश डाला और अपनी एफपीओसंघ की सफलता की कहानी साझा की। मध्य प्रदेश विज्ञान संस्था, छिंदवारा के श्री आर आर राही ने भी अपने राज्य में एफपीओ के गठन और संवर्धन से संबन्धित चुनौतियों और अनुभवों साझा किए। कार्यक्रम में उत्कृष्ठ प्रदर्शन करने वाले एफपीओ, संवर्धन संस्थाओं तथा एफपीओ को वित्तीय सहायता उपलब्ध करने वाले बैंको को मुख्यमंत्री तथा कृषि मंत्री द्वारा नाबार्ड पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इसी के साथ प्रदेश में एफपीओ के सफल प्रयासों पर नाबार्ड द्वारा प्रकाशित एक पुस्तिका का विमोचन भी माननीय मुख्यमंत्री जी के कर कमलों से किया गया। इस अवसर पर नाबार्ड द्वारा एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न जनपदों में नाबार्ड की सहायता से संवर्धित एफपीओ द्वारा अपने उत्पादों की बिक्री-सह-प्रदर्शन किया गया।
इस सम्मेलन में आयोजित परिचर्चा मे संबंधित बिन्दुओं पर विशेष रूप से विचार मंथन किया जिसमें एफपीओ को सरकार द्वारा प्रारंभिक पूंजी प्रदान करना, कृषि और सम्बद्ध गतिविधियों से संबन्धित सरकारी योजनाओं में एफपीओ को प्राथमिकता देना, कम कठिनाई मे तथा सुचारू रूप से बैंको से ऋण उपलब्ध कराना, प्रारम्भिक अवस्था में एफपीओ को कम्पनी एक्ट की अनुपालना मे सरलीकरण की आवश्यकता, एफपीओ को ई-नामध्कोमोडिटी मार्केट, आदि से जोड़ने हेतु प्रचार प्रसार तथा क्षमता संवर्धन कराना आदि शामिल था।
इस सम्मेलन में गोरखपुर से विधायकगण, मंडल आयुक्त, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी के अलावा निदेशक कृषि, बैंकों के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा राज्य के विभिन्न कोनों से आये हुए कृषक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों, उनकी संवर्धन संस्थाओं के प्रतिनिधियों, बैंको तथा नाबार्ड और राज्य सरकार के अधिकारियों तथा जिले के जन प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया और अपना अनुभव साझा किया ।

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