Tuesday, October 26, 2021

न्यायालय ने पालघर भीड़ हत्या मामले में उद्धव सरकार से जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी

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उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को, पालघर में 16 अप्रैल को हिंसक भीड़ द्वारा दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट पीट कर हत्या किये जाने की घटना की जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का शुक्रवार को निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने इस घटना की सीबीआई जांच के लिये दायर याचिका की वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार को यह निर्देश दिया। महाराष्ट्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश करनी है।

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि भीड़ द्वारा दो साधुओं सहित तीन व्यक्तियों की पीट पीट कर हत्या की घटना पुलिस की विफलता का नतीजा है क्योंकि लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करके यह भीड़ वहां एकत्र हुयी थी।

शीर्ष अदालत ने इस हत्याकांड की जांच पर रोक लगाने से इंकार करते हुये याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह इस याचिका की एक प्रति महाराष्ट्र सरकार के वकील को सौंपे। राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब देना है। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के वकील को महाराष्ट्र सरकार के स्थाई वकील को याचिका की प्रति की तामील करने की अनुमति दी जाती है। चार सप्ताह में इसका जवाब देना है। महाराष्ट्र सरकार इस बीच, जांच की स्थिति के बारे में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।’’

यह याचिका शशांक शेखर झा ने अधिवक्ता राशि बंसल के माध्यम से दायर की है। याचिका में प्राधिकारियों को शीर्ष अदालत की निगरानी में इस हत्याकांड की जांच के लिये विशेष जांच दल गठित करने या फिर शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में किसी न्यायिक आयोग से जांच कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

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इसी तरह, याचिका में इस घटना को रोकने में विफल रहने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। इस हत्याकांड में मारे गये, मुंबई के कांदिवली इलाके के निवासी तीनों व्यक्तियों की कार उस समय पालघर में रोकी गयी जब वे लॉकडाउन के दौरान एक परिचित के अंतिम संस्कार में शामिल होने गुजरात के सूरत जा रहे थे। गढ़चिंचली गांव में हिंसक भीड़ ने 16 अप्रैल की रात में पुलिस की मौजूदगी में उन पर हमला किया और उनकी पीट पीट कर हत्या कर दी।

पालघर में हुए इस हमले में चिकने महाराज कल्पवृक्षगिरि (70), सुशील गिरि महाराज (35) और उनकी कार के ड्राइवर नीलेश तेलगडे (30) को हिंसक भीड़ ने पीट पीट कर मार डाला। याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने मीडिया की खबरों का हवाला दिया और दावा किया कि इस घटना में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही है क्योंकि उसने साधुओं को बचाने के लिये बल का प्रयोग नहीं किया।

याचिका में कहा गया है कि पूरे देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बावजूद यह हुआ जबकि किसी भी व्यक्ति को अपने घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी और सभी को सामाजिक दूरी बनाये रखने के निर्देश का पालन करना था। इसीलिए स्थानीय पुलिस की भूमिका पर संदेह होता है।

याचिका के अनुसार, इस पूरी घटना के दौरान पुलिस ने इन निर्दोष व्यक्तियों को बचाने के लिये कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जिसे इस तथ्य से साबित किया जा सकता है कि उसने भीड़ को तितर बितर करने के लिये किसी प्रकार के बल का प्रयोग नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि इस घटना से संबंधित एक वीडियो में दिखाई पड़ रहा है कि जब इन साधुओं ने संरक्षण की गुहार लगाई तो वास्तव में पुलिस अधिकारी इन साधुओं को भीड़ की ओर धकेल रहा है

याचिका में इस मामले की सुनवाई पालघर की अदालत से स्थानांतरित करके दिल्ली में त्वरित अदालत को सौंपने का भी अनुरोध किया गया है। साथ ही इसमें आरोप लगाया गया है कि यह पूरी घटना ‘पूर्व नियोजित’ थी और इसमें पुलिस की संलिप्तता भी हो सकती है।पुलिस ने इस सनसनीखेज घटना के सिलसिले में 100 से ज्यादा व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इनमें नौ नाबालिग आरोपी भी शामिल हैं।

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