Tuesday, July 27, 2021

पलायन को मजबूर मजदूर जिम्मेदारी किसकी ?

पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी मासिक अपराध गोष्ठी में अपराधों की समीक्षा व रोकथाम हेतु दिये गये आवश्यक दिशा-निर्देश

Maharajganj: पुलिस अधीक्षक महराजगंज प्रदीप गुप्ता द्वारा आज दिनांक 17.07.2021 को पुलिस लाइन्स स्थित सभागार में मासिक अपराध गोष्ठी में कानून-व्यवस्था की...

शायर मुनव्वर राना के बोल, ‘दोबारा सीएम बने योगी तो यूपी छोड़ दूंगा’

लखनऊ: मशहूर शायर मुनव्वर राना एक बार फिर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं।उन्होंने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ दोबारा...

Maharajganj: CO सुनील दत्त दूबे द्वारा कुशल पर्यवेक्षण करने पर अपर पुलिस महानिदेशक जोन गोरखपुर ने प्रशस्ति पत्र से नवाजा।

Maharajganj/Farenda: सीओ फरेन्दा सुनील दत्त दूबे को थाना पुरन्दरपुर में नवीन बीट प्रणाली के क्रियान्वयन में कुशल पर्यवेक्षण करने पर अपर पुलिस...

विधायक विनय शंकर तिवारी किडनी की बीमारी से पीड़ित ग़रीब युवा के लिए बने मसीहा…

हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से किडनी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मदद हेतु युवाओं के द्वारा अपील की...

महराजगंज जिले के फरेंदा थाने के अंतर्गत SBI कृषि विकास शाखा के सामने से मोटरसाइकिल चोरी

Maharajganj: महाराजगंज जिले के फरेंदा थाने के अंतगर्त मंगलवार को बृजमनगंज रोड पर भारतीय स्टेट बैंक कृषि विकास शाखा के ठीक...

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जिंदगी और मौत के बीच का संघर्ष कितना कठिन और भयावह है यह कोई प्रवासी मजदूरों के पलायन से देख सकता है | नंगे पैर, भूखे पेट, भविष्य के सुरक्षा की आस मे हजारों किलोमीटर की दूरी को भी पूरा करने निकल पड़े ये मजदूर | नन्हे बच्चे, बुजुर्ग, साधन से, बिना साधन के जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े है उनका मात्र एक लक्ष्य दिखाई पड़ रहा है वह है घर पहुचना | देश मे असंगठित क्षेत्रों मे काम करने वाले लोगों की संख्या अत्यधिक है और ये वही लोग है जिनकी खुद की आमदनी इनकी जमीनी आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं क,र पाती जबकि इनके मेहनत के दम पर लोगों के घर के साथ साथ देश की अर्थव्यवस्था भी चलती है | इनकी पीड़ा इनका दर्द इनकी भूख इनके चेहरों पर उदासी, भविष्य के प्रति डर किसी से छिपा नहीं है | तो क्या इन सब के नरेंद्र मोदी सरकार है ? आखिर जिम्मेदारी किसकी ?

एक महिला अपने बच्चे को सूटकेस के ऊपर सुला कर, कोसों दूर के सफर पर चलते हुए, अपने गंतव्य को पाने की लालसा मे सारे दर्द को भूल कर लगातार चलती जा रही है ऐसे मे सोशल मीडिया पर लोगों का भावनात्मक होना स्वाभाविक ही है | कोई महिला प्रसव के तुरंत बाद अपने बच्चे को गोदी मे उठाकर चलने लगे तो सोशल मीडिया पर लोगों का दुखीं होना कोई दिखावा नहीं हो सकता | कई जगहों पर भूख की वजह से लोगों के विस्मित चेहरे अनेकों कहानी बयां कर रहें है | भेड़ – बकरियों की तरह एक ही गाड़ी मे बैठ-कर लोग यात्रा कर रहें है | अनेकों सामस्याए लोगों की है जिन्हे हम सब केवल महसूस कर सकते है | पर पीड़ा दर्द अव्यवस्था झेल वही लोग रहे है जो इससे प्रभावित है | कई लोगों ने अपनी जान गवां दी, अपनी यात्रा पूरी करने मे | सबकी अपनी अलग-अलग कहानी है किसी की आमदनी बंद, किसी के पास किराया नहीं, किसी के पास खाने को नहीं, कोई इतना डरा हुआ की वह अपने घर जाने के लिए बेताब | निसन्देह मजदूर वर्ग के दर्द ने देश के सभी लोगों को दुखी किया है |

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आप मोदी को गाली दे सकते है, मोदी पर आरोप लगा सकते है, मोदी को इसके लिए जिम्मेदार मान सकते है, पर वास्तविकता को झुठला नहीं सकते और न ही मोदी के अथक प्रयासों को मना कर सकते है | कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग इसका जिम्मेदार मोदी को बता रहे है तो कोई भाजपा को कोई योगी को और कई राजनैतिक पार्टियां तो गंदी राजनीति करने से भी नहीं बाज आ रही है | तो क्या इन सब के पीछे मोदी जिम्मेदार है ? कई लोग बिना सोचे समझे कह सकते है हाँ बिल्कुल सत्ता उनकी प्रशासन उनका तो जिम्मेदारी भी उनकी | पर ऐसे लोगों को मेरा कहना है की इन समस्याओं के लिए कोई एक सरकार या पार्टी जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इस तरह की समस्याएं, दर्द देश की आजादी के बाद की अक्षमता को प्रदर्शित कर रहा है | अशिक्षा, बेरोजगारी, पलायन, जनसंख्या, स्वस्थ्य सेवायें, रहने को घर नहीं, यातायात के साधन नहीं, जैसी अनेकों समस्याओं ने देश मे रातों-रात जन्म नहीं लिया और न ही इस पर रातों रात विजय पायी जा सकती है | जब 6 दशकों से अधिक समय तक शासन करने वाली पार्टी सरकार पर आरोप लगाती है तो न केवल हसी आती है बल्कि यह सोचने पर विवश होना पड़ता है की किसी एक क्षेत्र मे आपने पूर्ण कार्य किया होता, फिर चाहे शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार या रहने को घर के लिए तो देश की यह दुर्दशा आज नहीं होती |

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मजदूरों के पलायन से यदि आप सोच रहें है की सिर्फ उन्हे ही दर्द झेलना पड़ेगा तो आप बिल्कुल गलत सोच रहें है क्योंकि कई अन्य रूपों मे यह समस्या सभी को प्रभावित करेगी | उत्पादन कम होगा, मांग बढ़ेगी, पूर्ति कम होगी तो स्वतः ही मूल्य मे वृद्धि होगी जिसका नुकसान गरीब तबके से लेकर मध्यम वर्गीय परिवार को उठान पड़ेगा | यानि की हम आप तभी तक खुश है जब तक हमसे जुड़ा हुआ और हमारे विकास मे सहायक प्रत्येक व्यक्ति | फिर चाहे वह मजदूर हो या आपके मोहल्ले मे झाड़ू लगाने वाला व्यक्ति | तो ऐसे मे यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है है की हम सब स्वयं मजदूरों गरीबों की जो मदद कर सकते है जरूर करें | कम से कम कुछ समय के लिए जब तक उनका कार्य पुनः प्रारंभ नहीं होता | यदि ये मजदूर लौटकर चले गए तो वापस आने मे इन्हे कई कई बार सोचना पड़ेगा |

विपक्ष पार्टी का बेसिक सिद्धांत यही रहता है की सत्ताधारी पार्टी के प्रत्येक कार्य मे कमी निकाले | तभी विपक्ष का वजूद बना रह सकता है | पर जिस सिद्दत और जोश से मोदी सरकार ने लोगों के जीवन को बचाने मे लगी हुई है उसकी सभी को तारीफ करनी पड़ेगी | फिर चाहे आप पक्ष हो, विपक्ष हो या फिर आम आदमी | सरकार के साथ लोगों की चुनौती तो है साथ ही अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौती है और अर्थव्यवस्था यदि चौपट हुई तो देश को कोरोना वायरस से तो बचाया जा सकेगा पर भुखमरी, बेरोजगारी, अशान्ति, असुरक्षा, से कोई नहीं बचा सकता है | आज मजदूरों के पलायन करने से गाँव मे कोरोना वायरस का खतरा अधिक बढ़ गया है | सर्वाधिक आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश और उसके सभी जिलों मे कोरोना वायरस का संक्रमण पहुच चुका है |

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आज जब उद्योग धंधे शुरू करने की आवश्यकता है तो मजदूरों का पलायन अनेकों समस्या पैदा कर सकता है | अर्थव्यवस्था पटरी से उतर सकती है | फिर भी जिस तरह के आत्म-विश्वास से नरेंद्र मोदी सरकार ने कड़े फैसले लिए है वह स्वागत करने योग्य है | ट्रेनों से लोगों को घर तक पहुचाया जा रहा है | नरेंद्र मोदी सरकार का मूल्यांकन उनके कार्य से करने के बजाय सभी को दशकों से उत्पन्न समस्याओं पर भी विचार करना चाहिये जिसके लिए जिम्मेदारी किसकी है यह कहने की जरूरत नहीं | स्थानीय, प्रादेशिक, देश, अंतर्राष्ट्रीय सारे पहलू को सम्हाल कर चलना और लोगों के जीवन को बचाना यह सच मे एक बड़ा कार्य नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा किया जा रहा है | महामरी से जहां सभी देश घुटने पर है वहाँ हम सब महामरी से लड़ने के बजाय सरकार पर आरोप लगा रहें है जबकि समस्याएं क्यों है कब से है और इसका समाधान किस तरह से किया जा सकता है इसके बारे मे सोचने को किसी के पास फुरसत नहीं है |

डॉ. अजय कुमार मिश्रा (लखनऊ)
drajaykrmishra@gmail.com

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