Thursday, January 23, 2020
Uttar Pradesh

पहले डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, आज उदय होते को नमन क्योंकि…

वस्त्रनगरी में शनिवार शाम वाटर वर्क्स, नेहरू तलाई, मानसरोवर झील, हरणी महादेव तालाब, पटेलनगर स्थित घराेंदा व बापूनगर में महादेवी पार्क स्थित टैंक अादि सरोवर तटों पर पूर्वांचल समाज के सूर्य आराधना के महापर्व सूर्य षष्ठी पर देर शाम तक रौनक रही। निर्जल व्रतधारी महिलाएं पुरुषों के साथ भाेजपुरी गीत गाते घाटों पर पहुंची। दीयाें की झिलमिल के बीच षष्ठी मैया की पूजा कर अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य दिया। प्लास्टिक मुक्त राेशनी से जगमगाते घाटाें पर बच्चे से लेकर 95 वर्षीय बुजुर्ग भी पहुंचे तथा पूजा कर अर्घ्य दिया।नए कपड़ों में आभूषणों से सज्जित महिलाएं फल, मिष्ठान एवं पकवान से भरे बांस के नए सूप (डाला) और दौरी (डलिया) लेकर गीत गाते घरों से रवाना हुई। घर से घाट तक भाेजपुरी लोक गीतों का क्रम तब तक चलता रहा जब तक भगवान भास्कर सांयकालीन अर्घ्य स्वीकार कर अस्तांचल को नहीं चले गए। सूप एवं डलिया पर जगमगाते दीपक शाम के समय सरोवर तटों पर आकर्षक छटा बिखेर रहे थे। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद आतिशबाजी की गई। इस बार पर्याप्त बारिश के कारण नेहरू तलाई, मानसरोवर झील एवं वाटर वर्क्स अादि सराेवराें में पर्याप्त पानी होने से पूर्वांचल वासियाें के बड़ी संख्या में जमा होने से मेले सा माहौल दिखा।

छठ पर्व सिखाता है…

जो अस्त होता है उसका उदय होना तय

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