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Tuesday, June 2, 2020

पुलवामा हमला: बेटे के इंतजार में पथरा गईं 82 वर्षीय पिता की आंखें…

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Gorakhpur Times | गोरखपुर टाइम्स

82 वर्ष के गीताराम रावत शुक्रवार को घर में गुमसुम बैठे थे। मानो कि सुध-बुध खो चुके हों। कभी घर के दरवाजे की तरफ देखते तो कभी आसमान की ओर। आंखों के आंसू सूख चुके हैं। ऐसा लग रहा था कि वह भगवान से पूछ रहे हों, मेरे जाने की बेला में बेटे को अपने पास क्यों बुला लिया। दोपहर में जब डीएम एनजी रवि कुमार उनके घर कहरई पहुंचे तो वह अपनी पीड़ा भी व्यक्त नहीं कर पा रहे थे।

शहीद कौशल कुमार रावत के कहरई स्थित घर पर रात से ही रिश्तेदारों व आसपास के लोगों का जमावड़ा था। उनकी बहादुरी के किस्से सभी की जुबान पर थे। छोटे भाई कमल किशोर रावत के आंसू नहीं रुक रहे थे। उनकी एक दिन पहले ही भाई से बात हुई थी। उन्हीं बातों को याद कर वह दहाड़े मारकर रो उठते। लोग ढांढस बंधा रहे थे। घर के अंदर शहीद की मां और पत्नी का विलाप देखकर लोगों का कलेजा बाहर आ रहा था। रिश्तेदार महिलाएं भी आंसू नहीं रोक पा रही थीं। छोटा बेटा और बेटी शहीद पिता के पार्थिव शरीर के आगरा पहुंचने की खबर लेने के लिए फोन पर जुटे थे। छोटे भाई कमल किशोर ने बताया कि उनके कुछ रिश्तेदार दिल्ली में बड़े भाई के पार्थिव शरीर को आगरा लाने के लिए मौजूद हैं। गम के इस माहौल में घर में बंधी गाय भी चुप बैठी हैं। परिजनों ने बताया कि उसने भी कल से चारा नहीं खाया है। जब भी कौशल घर आते थे तो गाय को बहुत दुलारते थे।

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जिलाधिकारी व एसडीएम पहुंचे घर
डीएम एनजी रवि कुमार, एसडीएम सदर अभिषेक कुमार सिंह शुक्रवार दोपहर शहीद कौशल कुमार के घर पहुंचे। डीएम ने शहीद के पिता को ढांढस बंधाया। परिजनों से बात की। उन्हें बताया कि प्रदेश सरकार ने शहीद कौशल कुमार सहित हमले में शहीद हुए यूपी के 12 लोगों को 25-25 लाख रुपये व परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी है।

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विभिन्न दलों के नेता भी पहुंचे घर
शहीद के घर विभिन्न दलों के नेता भी पहुंचे। पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय, पूर्व विधायक कालीचरन सुमन, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामसहाय यादव, बसपा नेता ध्रुव पाराशर सहित कई अन्य नेताओं ने परिजनों को सांत्वना दी। शाम तक भाजपा के विधायक, सांसद और कोई मंत्री शहीद के घर नहीं पहुंचा था।

स्मारक के लिए परिजन जमीन देने को तैयार
शहीद के स्मारक के लिए उनके परिजन जमीन देने को तैयार हैं। कहरई के पूर्व प्रधान व शहीद के रिश्तेदार सत्यप्रकाश रावत ने बताया कि उनके परिवार की घर के पास ही बेशकीमती जमीन है। वह भाई के स्मारक के लिए सरकार से कोई जमीन नहीं मांगेंगे। परिवार अपनी जमीन पर ही स्मारक बनवाएगा। उन्होंने डीएम से स्मारक की अनुमति जल्द देने की मांग भी की।

बड़ा बेटा देर रात तक पहुंचा आगरा
परिवार का बड़ा बेटा रूस में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है। शुक्रवार देर रात वह आगरा पहुंच गया। विभिन्न शहरों से अन्य रिश्तेदार भी देर शाम अथवा रात तक आगरा पहुंच गए। परिजनों ने बताया कि शहीद का अंतिम संस्कार घर के पास ही उनकी देवभूमि पर किया जाएगा।

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