Thursday, February 27, 2020
Gorakhpur

प्रतिष्पर्धा में पिछड़ रहा है हस्तनिर्मित कालीन विश्व पटल पर मशीनमेड कालीन के बढते खीच चिंता का विषय

भदोही। विश्व पटल पर मशीनमेड कालीनों के बढ़ते खीच के बीच कलात्मक हस्तनिर्मित कालीन प्रतिष्पर्धा में पिछड़ रहा है जो दुःखद है। नगर के कालीन निर्यातक कुंवर मुश्ताक अंसारी ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन का इतिहास भदोही परिक्षेत्र से 500 वर्ष पुराना है। तब से लेकर अब तक कलात्मक कालीन विश्व भर में देश का नाम रौशन कर रहा है। भदोही, मीरजापुर आदि क्षेत्रों में फैला कालीन उद्योग लाखों बुनकरों, मजदूरों व अन्य के जीवीको पार्जन का माध्यम है। लेकिन सरकार व जनप्रतिनिधियों के उपेक्षात्मक रवैये के चलते विश्व पटल पर कलात्मक हस्तनिर्मित कालीन आयातकों को महंगा पड़ रहा है। जबकि आयातकों की पहली पसंद हस्तनिर्मित कालीन ही है। लेकिन मशीनमेड कम समय में अधिक प्रोडक्शन व सस्ता बिकता है। वही गुणवत्ता युक्त हस्तनिर्मित कालीन महंगा पड़ रहा है। कुंवर ने कहा कि सरकार को चाहिए कि कालीन उद्योग से जुड़े बुनकर मजदूरों के हितों को देखते हुए कालीन उद्योग को पूर्णतया कर से मुक्त किया जाय। साथ ही प्रोत्साहन राशी देने पर विचार हो। कुंवर ने कहा कि जिस तरह मशीनमेड की डिमांड बढ रही है, ऐसे में ध्यान न दिया गया तो मशीनमेड के चलते 500 वर्ष पूरानी कला विलुप्त होने के साथा लाखों बुनकर बेरोजगार हो जायेंगे।

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