Saturday, July 24, 2021

प्रदेश और देश के गरीबों/पीड़ितों सेवा न कर पाने की अखिलेश की छटपटाहट– प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव

पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी मासिक अपराध गोष्ठी में अपराधों की समीक्षा व रोकथाम हेतु दिये गये आवश्यक दिशा-निर्देश

Maharajganj: पुलिस अधीक्षक महराजगंज प्रदीप गुप्ता द्वारा आज दिनांक 17.07.2021 को पुलिस लाइन्स स्थित सभागार में मासिक अपराध गोष्ठी में कानून-व्यवस्था की...

शायर मुनव्वर राना के बोल, ‘दोबारा सीएम बने योगी तो यूपी छोड़ दूंगा’

लखनऊ: मशहूर शायर मुनव्वर राना एक बार फिर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में हैं।उन्होंने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ दोबारा...

Maharajganj: CO सुनील दत्त दूबे द्वारा कुशल पर्यवेक्षण करने पर अपर पुलिस महानिदेशक जोन गोरखपुर ने प्रशस्ति पत्र से नवाजा।

Maharajganj/Farenda: सीओ फरेन्दा सुनील दत्त दूबे को थाना पुरन्दरपुर में नवीन बीट प्रणाली के क्रियान्वयन में कुशल पर्यवेक्षण करने पर अपर पुलिस...

विधायक विनय शंकर तिवारी किडनी की बीमारी से पीड़ित ग़रीब युवा के लिए बने मसीहा…

हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से किडनी की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मदद हेतु युवाओं के द्वारा अपील की...

महराजगंज जिले के फरेंदा थाने के अंतर्गत SBI कृषि विकास शाखा के सामने से मोटरसाइकिल चोरी

Maharajganj: महाराजगंज जिले के फरेंदा थाने के अंतगर्त मंगलवार को बृजमनगंज रोड पर भारतीय स्टेट बैंक कृषि विकास शाखा के ठीक...

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सम्पूर्ण विश्व इस समय कोरेना की महामारी से संघर्ष कर रहा है। इस संघर्ष में सिर्फ सरकार और प्रशासन ही शामिल नहीं है। बल्कि हर देश का एक-एक नागरिक इसमें शामिल है और अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार योगदान कर रहा है । लेकिन उत्तर प्रदेश की स्थिति कुछ अलग है। जनसंख्या के आधार पर बड़ा प्रदेश होने के कारण यहाँ स्थितियाँ भी अन्य प्रदेशों से जुदा हैं। यहाँ बाहर से सम्पन्न प्रतीत होने वाला मध्यम वर्ग अंदर से अत्यंत खोखला है। उसकी स्थिति विपन्न लोगों से बहुत अधिक अच्छी नहीं है। बस अंतर इतना है कि उसके पास दिखावा अधिक है। दिखाने के लिए ठीक-ठाक घर, आने-जाने के लिए दो पहिया वाहन, पहनने के लिए कुछ जोड़े अच्छे कपड़े और डींगे हाँकने की प्रवृत्ति । बस इतना है। कोरेना महामारी के दौरान कई ऐसे लोगों के फोन आ रहे हैं। जो केवल यही पूछ रहे हैं कि यह लॉक आउट कितना लंबा चलेगा ? उसके पीछे के जब मैंने कारण जानने चाहे, तो उन्होने कहा काम-धंधा बंद है। एक रुपया आ नहीं रहा है। ऐसा अगर ज्यादा चलेगा, तो हमारे सामने भी भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी । यानि कुछ धनाढ्य और धन पशुओं को छोड़ दें, तो पूरा प्रदेश भुखमरी की कगार पर खड़ा है। बातचीत के बाद जो परिदृश्य पैदा हो रहा है, उससे तो लगता है कि अगर कोरेना महामारी के खिलाफ लॉक आउट की अवधि ज्यादा लंबी खिची, तो भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। जितनी मौते कोरेना से नहीं होगी, उससे ज्यादा लोग भूख से पीड़ित हो जाएंगे । भूख से पीड़ित व्यक्ति कितना लॉक आउट का पालन करेगा,यह चिंतनीय विषय है ।
ऐसी कुछ पीड़ा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के वक्तव्यों से भी परिलक्षित हो रही है। उनके तमाम सूत्र है। पूरे प्रदेश में उनका संगठन है। उनकी पार्टी के विधायक, विधान परिषद सदस्य तथा तमाम वरिष्ठ नेताओं से उनकी बातचीत हो रही है। बात कहीं से भी शुरू हो, वह समाप्त कोरेना महामारी और सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं/खाद्य वितरण क्या सभी लोगों तक पहुँच रहा है ? लोगों के भूखे मरने की स्थिति तो नहीं आ गई है ? इसी तरह के सवालों से मिले उत्तरों से असंतुष्ट अखिलेश यादव ने वर्तमान केंद्र और प्रदेश सरकार से प्रतिदिन नियमित रूप से निवेदन/सुझाव दे रहे हैं । साथ ही केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में फैले अपने संगठन के पदाधिकारियों/ समर्थकों से भी अपील कर रहे हैं कि वे ऐसे मुश्किल समय में गरीबों की सेवा करें, और पुण्यलाभ के भागीदार बनें।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कुछ ज्वलंत सवाल पूछे। उन्होने कहा कि जनता में विश्वास जगाने के लिए, सरकार से अपेक्षा है कि वो मीडिया में आ रही इन बातों को स्पष्ट करे: – क्या प्रति 10 लाख केवल 32 लोगों की ही कोरोना जाँच हुई है – क्या क़िल्लत के समय में भी मेडिकल उपकरणों का निर्यात हुआ है – क्या केवल मनरेगा व राशन कार्ड धारक को ही राशन मिल रहा है? समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहते हैं कि इस प्रदेश और देश के प्रत्येक नागरिक की जांच हो जाए, जिससे कोरेना एक भी व्यक्ति में छिपा न रह पाये। अनजाने में वह अपने परिवार और देश के लिए और कष्टकारी न बने । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि मार्केट में आटा नहीं मिल रहा है। नगरों में रहने वाले नौकरीपेशा/ कंपटीशन की तैयारी कर रहे युवा वर्ग गेहूं खरीद कर उसे पिसाने की जहमत नहीं उठाते हैं। वे सीधे दुकानों पर पहुँचते हैं, और आटा खरीदते हैं। उनकी इस प्रवृत्ति के कारण आटा चक्कियों की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो गई है । कोरेना के लॉक आउट में बाहर से पिस कर आने वाला आटा बंद हो गया। या आटा की कंपनियाँ भी बंद कर दी गई, जिससे दुकानों पर आटा का अभाव हो गया। इसके अलावा मनरेगा और पंजीकृत मजदूरों के अलावा लोगों को खाद्यान उपलब्ध कराया जा रहा है कि नहीं, इसकी भी उनके पास जानकारी है। वे इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि मनरेगा और पंजीकृत मजदूरों के अलावा भी देश और प्रदेश में मजदूरों की बहुत अधिक तादात है, जो रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं। अगर ऐसे लोगों को भी खाद्यान्न नहीं मिला, तो उनके सामने भुखमरी की स्थिति आ जाएगी। इसी कारण अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार के सामने यह भी सवाल उठाया कि खाद्य सामग्री को लेकर सरकार की तरफ से ये स्पष्टीकरण आना चाहिए कि अभी उसके पास कितने और दिनों का भंडारण है, जिससे लोग अनावश्यक संग्रहण से बचें. गेहूँ से आटा बनाने का काम तुरंत युद्ध स्तर पर करने हेतु इससे संबंधित औद्योगिक इकाइयों को तत्काल शुरू करना चाहिए. जनता से संयम की अपील है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सबसे अधिक चिंता गरीबों के बच्चों की है। जो बच्चे मिड डे मील के भोजन पर भी निर्भर हो गए थे। एक टाइम का भोजन उन्हें मिड डे मील में मिलता था। अखिलेश यादव का मानना है कि मिड डे मील के भोजन के लिए जो खाद्यान्न है, वह ऐसे गरीब बच्चों के घर आवंटित कर देना चाहिए । जिससे उनके भोजन की व्यसथा हो सके। क्योंकि अखिलेश यादव के पास इस बात की भी सूचना है कि जो बच्चे मिड डे मील पर निर्भर हैं। एक टाइम का भोजन स्कूलों में करते हैं। उनके माता-पिता उसी हिसाब से महीने या हफ्ते भर का राशन पानी भी अपने घरों में रखते हैं। इसी कारण उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह सुखाव दिया । इतना ही नहीं, उन्होने यह भी कहा कि अगर प्रदेश सरकार को इस कार्य में संसाधन की कमी हो तो इसके लिए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अपनी सायकिलों से घर-घर जाकर यह कार्य करने के लिए तैयार हैं । इसी परिप्रेक्ष्य में उन्होने कहा कि जो बच्चे मिड-डे मील में पौष्टिक आहार पा रहे थे, उनके लिए इस कोरोनाकाल में घरों तक भोजन पहुँचाने की व्यवस्था सरकार तत्काल करे. अगर सरकार राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय ले तो वो गाँव-गाँव तक फैले सपा के संगठन व कार्यकर्ताओं की साइकिल के माध्यम से ये वितरण संभव कर सकती है. हम तैयार हैं! समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहते हैं कि जनता और सरकार के बीच इस समय पारदर्शिता की जरूरत है । उनका मानना है कि इससे जनता और सरकार के बीच में आपसी समंजस्य बना रहेगा और दोनों का एक दूसरे पर विश्वास भी कायम रहेगा । इसी कारण उन्होने प्रदेश सरकार से अपील की कि जनता में विश्वास जगाने हेतु सरकार को आगे आकर ये बताना चाहिए कि प्रदेश के हर जिले में कोरोना की जाँच के कितने किट उपलब्ध हैं, संक्रमण की आशंका वाले लोगों को अलग रखने के लिए कितने आइसोलेशन वार्ड व कोरोना-ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए कितने वेंटीलेटर हैं।इससे लोगों का डर कम होगा। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सिर्फ सरकार से ही यह अपील नहीं कर रहे हैं कि यह करो, वह करो। बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को भी साफ-साफ निर्देश दे रहे हैं कि वे समाजवादियों की जन-जन की सहायता करने की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए अपनी-अपनी क्षमता-सामर्थ्य के अनुसार अपने आस-पास भटक रहे लोगों के भोजन, दवाई, इलाज व विश्राम की व्यवस्था करके यथा संभव मदद करें। यही सच्चा पुण्य-सवाब है। यह बात तो सभी जानते हैं कि ऐसे समय में विपक्ष के सुखाव और प्राप्त सूचनाओं को सरकार को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। उसे भी अपना ही सूचना तंत्र मान कर उस पर अमल करता रहना चाहिए । ऐसे समय में पक्ष क्या ? विपक्ष क्या ? सभी को साथ लेकर चलना चाहिए । तभी कोरेना महामारी के खिलाफ जो जंग है, वह समय से पहले जीती जा सकेगी । प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव

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