Monday, June 14, 2021

बिहार में मौतों को लेकर यूपी में अलर्ट, गांवों में खास सतर्कता बरतने के निर्देश…

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बिहार में इंसेफ्लाइटिस व लू से हो रही मौतों के बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन इसके लिए तैयार हो गया है।

बिहार में इंसेफ्लाइटिस व लू से लगातार हो रही मौतों को लेकर यूपी में अलर्ट जारी कर दिया गया है। खासतौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के अफसरों को सख्त हिदायत दी गई है कि वह इंसेफ्लाइटिस व लू से बचाव के साथ ही इलाज की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करें। खुद औचक निरीक्षण कर इस बारे में किए गए इंतजामों का जायजा लें।

ये जिले हैं अलर्ट पर

गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ व बलिया जिलों को खासतौर पर आगाह किया गया है। इन जिलों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए गए निर्देश में प्रमुख सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशांत त्रिवेदी ने बिहार की सीमा से लगे गांवों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा है।

तत्काल कार्रवाई के लिए तत्परता जरूरी

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अधिकारियों से कहा गया है कि रैपिड रिस्पांस टीम को तथा हेल्पलाइन नंबर को सक्रिय रखें एवं मीडिया तथा अन्य स्रोतों से सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए। फीवर ट्रैकिंग सिस्टम को सक्रिय किया जाए। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर बुखार के रोगियों का पता लगाएं। सभी उपचार केंद्रों पर फीवर हेल्प डेस्क अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं व बुखार के सभी रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज की सुविधा महैया कराई जाए। इंसेफ्लाइटिस के संभावित मरीजों की जेई, स्क्रब टाइफस, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि की सभी जांच जरूर कराई जाएं। इंसेफ्लाइटिस के संभावित रोगियों को सभी जरूर दवाएं दी जाएं।

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इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर 24 घंटे क्रियाशील रहेंगे

पीडियाट्रिक आइसीयू, मिनी पीडियाट्रिक आइसीयू तथा इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटरों को 24 घंटे क्रियाशील रखा जाए। डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां निरस्त करते हुए उनकी मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। गर्मी व लू को देखते हुए भी खास निर्देश जारी किए गए हैं। अफसरों से कहा गया है कि हीट स्ट्रोक से प्रभावित रोगियों के प्राथमिक उपचार के महत्व को देखते हुए इस संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए।

शिक्षक भी रहें अलर्ट

शिक्षकों को भी इंसेफ्लाइटिस को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर के मंडलायुक्त जयंत नार्लीकर ने निर्देश दिए है कि स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी व आशाओं के नंबर स्कूलों में अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। शिक्षकों से कहा गया है कि यदि कोई बच्चा बुखार के कारण दो दिन से अधिक तक विद्यालय से अनुपस्थित रहता है तो इसकी सूचना संबंधित आशा को दी जाए, जिससे उसका सही इलाज हो सके।

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जागरूकता अभियान जरूरी

‘दस्तक’ से रोकी थी महामारी की राह

2017 में हुई पांच सौ से अधिक मौतों के बाद 2018 में ‘दस्तक’ तथा जागरूकता अभियान ने महामारी का रास्ता रोका था। दस्तक अभियान पहली बार 2018 में चार अप्रैल को शुरू किया गया। अभियान को इसी साल जुलाई व सितंबर में दोहराया गया। आशाओं को जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह अपने इलाके के हर घर में जाएं। वहां इंसेफ्लाइटिस व दूसरी मच्छरजनित बीमारियों के लक्षण व शुद्ध पेयजल के इस्तेमाल के बारे में जानकारी दें। नाले-नालियों की साफ-सफाई, फागिंग कराई गई, जिससे मच्छर न पनप सकें। सुअरों का टीकाकरण के साथ, उनके बाड़ों को घेरकर उनको आबादी के बीच जाने से रोका गया। फीवर ट्रैकिंग व जागरूकता पर भी जोर रहा।

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इस तरह घटी मौतें

साल कुल भर्ती मौतें

2017 3692 556

2018 1660 186

2019 161 21

तैयारी पूरी

गोरखपुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. पुष्कर आनंद का कहना है कि शासन के निर्देश के अनुसार पूरी तैयारी कर ली गई है। इस बार भी दस्तक अभियान के जरिए बीमारी पर काबू करने की तैयारी है। अभियान अप्रैल में चलाया जा चुका है। एक जुलाई को फिर से शुरू होगा। औचक निरीक्षक कर व्यवस्था का जायजा लिया जा रहा है।

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