Saturday, September 25, 2021

वाराणसी के बाद लखनऊ में डबल मर्डर : लाडले का चेहरा देखकर सिसकते रहे, लड़खड़ाते कदमों से दी चिताओं को मुखाग्नि

Maharajganj: हड़हवा टोल प्लाजा पर भेदभाव हुआ तो होगा आन्दोलन।

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Maharajganj: बृजमनगंज थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले बुलंद, लोग पूछ रहे सवाल क्या कर रहे हैं जिम्मेदार

बृजमनगंज, महाराजगंज. थाना क्षेत्र में पुलिस की निष्क्रियता के चलते चोरों के हौसले बुलंद है. जिसके कारण चोरी की घटनाएं बढ़ रही...

गोरखपुर:- बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार

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Maharajganj: औकात में रहना सिखो बेटा नहीं तो तुम्हारे घर में घुस कर मारेंगे-भाजपा आईटी सेल मंडल संयोजक, भद्दी भद्दी गालियां फेसबुक पर वायरल।

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खुशखबरी:-सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक को मंजूरी 1320 करोड़ स्वीकृत

गोरखपुर के लिहाज़ से एक बड़ी ख़बर प्राप्त हो रही है जिसमे यह बताया जा रहा है कि सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक...

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शव पहुंचते ही घर में मचा कोहराम

हमेशा मुस्कुराने वाले राजेश दत्त बाजपेई के आंसू आज रुक नहीं रहे थे। कभी पत्नी के शव को देखते तो कभी बेटे का पार्थिव शरीर। आंखों का बांध टूट पड़ता और आंसू गालों पर लुढक आते। शायद उन्होंने खुद को इतना कमजोर कभी महसूस नही़ं किया होगा। बोलने की कोशिश करते तो आवाज गले में ही घुट जाती। बमुश्किल खुद पर काबू रखकर बेटी को संभालने में जुट जाते। दोपहर को बैकुंठधाम पर जब पत्नी और बेटे से विदाई के अंतिम पल आए तो उनके कदम लड़खड़ा गए। पहले बेटे फिर फिर पत्नी की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान बैकुंठधाम पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखे नम हो गईं।

रेलवे अधिकारी की पत्नी मालिनी और बेटे सर्वदत्त के शवों का पोस्टमार्टम सुबह करीब 11 चिकित्सकों के पैनल ने किया। करीब एक घंटे बाद शव परिवारीजनों के सुपुर्द कर दिए गए। दोपहर साढ़े बारह बजे शव गौतमपल्ली स्थित रेलवे अधिकारी के आवास पहुंचे तो वहां कोहराम मच गया। परिवार की महिलाएं मां-बेटे के शव से चिपटकर रोने-पीटने लगीं। किसी तरह उन्हें संभाला गया। दोपहर ढाई बजे मालिनी की गोमतीनगर निवासी मां की हालत बिगड़ गई। वह कभी रोते-रोते गिर पड़ती तो कभी बेसुध हो जातीं। दोपहर को उनकी तबियत ज्यादा खराब हो गई तो अस्पताल से चिकित्सकों की टीम ईसीजी मशीन लेकर आई और उन्हें उपचार दिया। साढ़े तीन बजे अलग-अलग एंबुलेंस से दोनों शव बैकुंठधाम ले जाए गए जहां रेलवे अधिकारी ने पहले बेटे और फिर पत्नी की चिता को मुखाग्नि दी।

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चिता पर लेटे बेटे को देखकर फफक पड़े पिता
बैकुंठघाम में चिता पर लेटे बेटे को देखकर पिता का कलेजा दहल उठा। उन्होंने चेहरे से कपड़ा हटाकर उसे आखिरी बार जीभरकर देखा। उसके सिर पर हाथ फेरा और फफक पड़े। शरीर ऐसा डगमगाया कि खड़े रहने के लिए उन्हें पास लगे लोहे के एंगल का सहारा लेना पड़ा। बेटे की चिता को अग्नि देने से पहले भी वह कुछ पलों के लिए मौन खड़े होकर उसका चेहरा देखते रहे।

अंतिम यात्रा के लिए दुल्हन की तरह सजाई गईं मालती

एंबुलेंस से घर पहुंचा मां-बेट का शव

एंबुलेंस से घर पहुंचा मां-बेट का शव – फोटो : अमर उजालामालती को अंतिम यात्रा के लिए दुल्हन की तरह सजाया गया। परिवारीजनों ने बताया कि मालती को सुहाग का जोड़ा पहनाकर मांग भरी गई। हाथों में उसके पसंद की नारंगी और हरी चूड़ियां पहनाई गईं। आंखों में काजल उन्हें बेहद पसंद था। काजल लगाने के साथ ही उनके पैरों में महावर लगाकर नई-नवेली दुल्हन का रूप दिया गया। उनका श्रंगार कर रही महिलाओं की आंखें लगातार बह रही थीं।

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बेटे के शव को कंधा भी नहीं दे सके
रेलवे अधिकारी की बदनसीबी देखिए, जान से भी प्यारे बेटे के शव को कंधा भी नहीं दे सके। जिस वक्त पत्नी और बेटे की अर्थी सजाई जा रही थी, वह बेसुध बैठे हुए थे। दोपहर साढ़े तीन बजे परिवार के बड़े-बुजुर्गों ने एंबुलेंस भीतर मंगाई तो बाहर गेट पर मौजूद पुलिस व रेलवे के अधिकारियों में हलचल बढ़ गई। इसी दौरान परिवारीजनों ने पोर्टिको में रखी सर्वदत्त की अर्थी उठा ली और लगभग 25 मीटर दूर गेट पर खड़ी एंबुलेंस की तरफ बढ़ गए। राजेश दत्त बाजपेई उस वक्त भीतर कहीं थे। जैसे ही उन्हें पता चला तो वह दौड़े, हालांकि तब तक सर्वदत्त का शव एंबुलेंस में रखा जा चुका था। इसके बाद उन्होंने पत्नी की अर्थी को कंधा दिया।

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