Friday, September 17, 2021

बड़ी खुशखबरी:- यूपी में नहीं बढ़ेंगी बिजली की दरें: विद्युत नियामक आयोग

गोरखपुर:- बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार गोरखपुर। दिल्ली...

Maharajganj: औकात में रहना सिखो बेटा नहीं तो तुम्हारे घर में घुस कर मारेंगे-भाजपा आईटी सेल मंडल संयोजक, भद्दी भद्दी गालियां फेसबुक पर वायरल।

Maharajganj: महाराजगंज जनपद में भाजपा द्वारा नियुक्त धानी मंडल संयोजक का फेसबुक पर गाली-गलौज और धमकी वायरल। फेसबुक पर धानी मंडल संयोजक...

खुशखबरी:-सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक को मंजूरी 1320 करोड़ स्वीकृत

गोरखपुर के लिहाज़ से एक बड़ी ख़बर प्राप्त हो रही है जिसमे यह बताया जा रहा है कि सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक...

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद कमलेश पासवान

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद बांसगांव लोकसभा के सांसद कमलेश पासवान ने कास्त मिश्रौली निवासी भाजपा नेता...

पूर्वांचल में मदद की परिभाषा बदलने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं युवा नेता पवन सिंह….

युवा नेता पवन सिंह ने मदद करने की परिभाषा पूरी तरह बदल दी है. उन्होंने मदद का दायरा इतना ज्यादा बढ़ा दिया...

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बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह ने बुधवार को यहां जनसुनवाई के दौरान बिजली उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि साल-2019 में बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं होगी।उन्होंने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने इस वर्ष टेरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव नहीं किया है। जब कंपनिया स्वयं वृद्वि नहीं करना चाहती है तो नियामक आयोग जनसुनवाई के माध्यम से बिजली दरों में कमी की गुंजाईश पर मंथन कर रहा है। ताकि उपभोक्ताओं को राहत दी जा सके।

दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में बुधवार को साढ़े ग्यारह बजे से शुरु हुई जनसुनवाई में 43 बिजली उपभोक्ताओं ने अपनी बात रखी। सबसे पहले द महावीर जुट मिल के निदेशक प्रमोद मस्कारा ने रेग्युलेटरी सरचार्ज का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि बिजली अभियंताओं की लापरवाही का खामियाजा आम उपभोक्ता व व्यापारी क्यों भुगत रहा है? मध्याचंल विद्युत वितरण निगम ने पिछले साल से रेगयुलेटरी सरचार्ज की वसूली बंद कर दी।

जबकि पूर्वांचल विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा सभी तरह के उपभोक्ताओं से वसूली कर रहा है। इस पर नियामक आयोग के सदस्य एसके अग्रवाल ने कहा कि मध्यांचल ने लाइन लास मानक के अनुरुप कर लिया। जबकि पूर्वांचल में लाइन लास अब भी कम नहीं हुआ है। इस पर श्री मस्कारा ने कहा कि बिजली अभियंताओं की कार्यप्रणाली के चलते नुकसान की भरपाई अखिर कबतक उपभोक्ता करेंगे। अब इसकी मियाद तय होनी चाहिए। अफसरों की जिम्मेदारी तय करके भी उसकी भरपाई की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि ओपेन एसेस के माध्यम से बिजली खरीदने वाले उद्यमियों से बिलिंग लास के नाम पर 10 फीसदी वसूली की जा रहीहै। इतना ही नहीं परिसर व फीडर के मीटरो में बिजली खपत एक समान होने के बाद भी 4 फीसदी लाइन लास की वसूली क्यो की जा रही है? बिजली निगम की यह कार्यप्रणाली उद्यमियों को हत्सोसाहित करने वाली है। साल 2014 के टेरिफ आर्डर में लोड फैक्टर पर बिजली बिल में छूट का प्रावधान किया गया था। बावजूद इसके यह अबतक लागू नहीं हो पाया। इससे उद्यमियों को आर्थिक चपत लग रही है। उनके सवालों पर आयोग के सदस्य संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। नियामक आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि हमारे संज्ञान में मामला नहीं था। हमने नोट कर लिया है। आगे से इसका अनुपालन कराया जाएगा। इस दौरान नियामक आयोग के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह, सदस्य सुरेश कुमार अग्रवाल, केके शर्मा, सचिव संजय श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक अनिल कोहली, मुख्य अभिंयता एमके अग्रवाल आदि लोग मौजूद थे।

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चेम्बर आफ कामर्स के अध्यक्ष ने खोली बिजली अफसरों की पोल

चेम्बर आफ कामर्स के अध्यक्ष संजय सिंघानिया ने जनसुनवाई के दौरान बिजली अफसरों की उपभोक्ता विरोधी कार्यप्रणाली की पोल खोली।उन्होंने कहा कि बिजली चोरी पकड़ने के लिए चल रहे अभियान के दौरान आम उपभोक्ता व व्यापारियों के वहां ही जांच की जा रही है। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के परिसर की जांच में कोताही की जा रही है। बिजली अभियंता व्यापारियों का उत्पीड़न कर रहे है। करीब छह माह पूर्व मिर्जापुर में एक व्यापारी के वहां बिजली निगम की टीम ने जांच की। उस दौरान कोई कमी नहीं मिली। बाद में बिजली अफसरों ने 17 लाख जुर्माना जमा करने की नोटिस भेज दी। उद्योग बन्धु की बैठक में मामला उठने के बाद अफसरों ने आनन-फानन में उसमें संशोधन करके 7 लाख रुपये कर दिया। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि दस्तावेज आपके हो तो हमे उपलब्ध कराएं। इस पर सम्बन्धि अफसरों से स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। इसके बाद संजय ने शहर में जर्जर खम्भा व तार का मुद्दा उठाया। बिलिंग व्यवस्था खस्ताहाल होने की बात कही।

4 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीद कर उद्योगों को 8 रुपये में क्यों बेची जाती है?

चैंबर ऑप इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विष्णु प्रसाद अजीत सरिया ने भी ओपन एक्सेस कनेक्शन में संशोधन की बात कही। उन्होंने इंडस्ट्री में भी प्री पेड मीटर देने की बात कही। सभी तरह के नए कनेक्शनों में निगम प्रीपेड मीटर ही उपभोक्ता को दे। उन्होने कहा कि बिजली निगम 4 रुपये प्रतियूनिट के हिसाब से बिजली खरीद कर उसे 8 रुपये प्रतियूनिट के हिसाब से उद्यमियों को बेच रहा है। परचेज व सेल में काफी अंतर है। इसे कम करके सस्ती बिजली मुहैया कराई जा सकती है। इस आयोग के सदस्यों ने कहा कि बिजली वितरण में खर्चे काफी है। बावजूद इसके इस पर मंथन किया जा रहा है। आपका सवाल एकदम जायज है।

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जितनी उर्जा देंगे उतनी मिलेगी मुफ्त

जन सुनवाई में उपभोक्ता कैलाश चंद शर्मा ने कहा कि लगता है कि निगम के खर्चे ज्यादा हैं आमदनी कम। बताया कि वो छत पर सोलर एनर्जी लगाकर बिजली पैदा कर निगम को देना चाहते हैं बदले में उन्हें मुफ्त बिजली मिले। इसपर सदस्य एसके अग्रवाल ने बताया कि निगम में नियम है जितनी भार झमता का कनेक्शन है उतना बिजली उत्पन्न कर देने पर उतनी बिजली मुफ्त मिलेगी। उससे अधिक बिजली पैदा हुई तो प्रति यूनिट 2 रुपए के दर से निगम खरीद लेगा।

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सिक्योरिटी धनराशि पर ब्याज नहीं दे रहा बिजली नि्गम

गीडा के उद्यमी आकाश जालान ने कहा कि सिक्योरिटी धनराशि पर ब्याज नहीं मिल रहा है। नियमित बिल भुगतान के बाद भी अधिकारी छूट नहीं दें रहे है। इस तकनीकी युग में भी गीडा में मैनुअल बिल उद्यमियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। आनलाइन बिल भुगतान की सुविधा भी नहीं है। आयोग के अध्यक्ष ने मुख्य अभियंता को निर्देश देते हुए कहा कि तत्काल इस पर कार्रवाई करें। प्रवीण मोदी , सुमीत कुमार, अशोक लोहिया व प्रेमचंद ने भी अपनी समस्या दर्ज कराई।

स्थानीय समस्याओं का निराकरण 15 दिन में

जनसुनवाई के बाद नियामक आयोग के अघ्यक्ष राज प्रताप सिंह के निर्देश पर जोन के मुख्य अभियंता ई.एम के अग्रवाल ने स्थानीय समस्याओं का निराकरण 15 दिन में कराने का आश्वासन दिया। हालांकि बक्शीपुर खण्ड के जेई द्वारा किए गए खेल पर उन्होने कहा कि सेवानिव़ृत कर्मचारी व जेई के बीच मारपीट के मामले को दूसरा रंग देने की कोशिश की जा रही है।

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