Monday, July 22, 2019
Gorakhpur

योगी सरकार ने सख्त तेवर, गायों की मौत की होगी जांच, नहीं बख्शे जाएंगे दोषी……

प्रशासनिक लापरवाही से बहादुरपुर के कांदी गांव स्थित गोशाला में गोवंश की मौत पर सरकार ने सख्त तेवर अपनाए हैं। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। शनिवार को गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष और सदस्य भी यहां पहुंच रहे हैं और घटना स्थल का निरीक्षण करेंगे। आयोग की टीम संबंधित अफसरों के साथ बैठक भी करेगी। पूरी घटना को दैवीय आपदा बताने वाले प्रशासनिक अफसरों में सरकार के इस रुख से हड़कंप मच गया है। कांदी गांव की गोशाला में गुरुवार को 35 गोवंश की मौत हो गई थी। अफसरों का कहना है कि बिजली गिरने से इनकी मौत हुई है। हालांकि, गांव में बिजली गिरने का कोई निशान नहीं मिला। गांव वाले भी अव्यवस्था की वजह से पशुओं की मौत बता रहे हैं। लगातार बारिश से गोशाला में पानी भर गया था और दलदल की स्थिति बन गई थी। पशुओं की मौत की मुख्य वजह इसे ही बताया जा रहा है।
इस पूरे मामले को सरकार ने गंभीरता से लिया है और अलग-अलग स्तर पर जांच का आदेश दिया गया है। एसपीटी के उद्घाटन के लिए शुक्रवार को शहर आए आए नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना का कहना है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उधर, पशुपालन विभाग की लखनऊ की टीम भी कांदी गांव में पहुंची। उन्होंने मृत पशुओं की जांच की। उसमें शामिल चिकित्सकों ने दूसरी जगह ले जाए गए पशुओं का चेकअप भी किया। इसी क्रम में शनिवार को गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष जसवंत सिंह उर्फ अतुल सिंह और सदस्य कृष्ण कुमार सिंह यहां पहुंच रहे हैं। पहले वे सर्किट हाउस में अफसरों के साथ बैठक करेंगे। फिर गोवंश आश्रय का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद फिर वे अफसरों के साथ बैठक करेंगे।
सभी 35 जानवरों की बिजली गिरने से हुई मौत कांदी गांव स्थित गोशाला में मृत पशुओं की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई है। उसके अनुसार पशुओं की मौत बिजली गिरने से मौत हुई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सीएस शर्मा ने बताया कि सभी 35 जानवरों का पोस्टमार्टम कराया गया। उनका कहना है कि बिजली गिरने से गोशाला में भरे पानी में करंट दौड़ गया। इसकी वजह से सभी गोवंश की मौत हो गई। हालांकि, बड़ी संख्या में जानवरों के शव दलदल में फंस गए थे। उनकी मौत भी वज्रपात से बताई जा रही है। गोशाला के तीन कर्मचारी हटाए गए सरकार की सख्ती के बाद प्रशासन के स्तर पर भी गोशाला में पशुओं की जांच शुरू कर दी गई है। जांच एसडीएम फूलपुर को दिए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा वहां संविदा पर काम कर रहे तीन कर्मचारियों को भी हटा दिया गया है। हालांकि, अफसर फिलहाल इस बारे में भी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सरकार की सख्ती से अफसरों में हड़कंप गोशाला में पशुओं की मौत पर सरकार की सख्ती से प्रशासनिक अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। कलेक्ट्रेट में देर रात तक अफसरों की बैठकें चलती रहीं। इनमें डीएम, सीडीओ, एडीएम, सभी एसडीएम, बीडीओ के अलावा संबंधित विभागों के अफसर मौजूद रहे। जिले की प्रत्येक गोशाला में व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है। चारा आदि संसाधन के साथ पशु चिकित्सकों की टीम भी लगा दी गई है। नगर विकास मंत्री की ओर से जांच का आदेश दिए जाने तथा गोसेवा आयोग के सदस्यों के शनिवार को दौरे की खबर के बाद कलेक्ट्रेट के संगम सभागार में आनन-फानन में बैठक बुलाई गई। डीएम, सीडीओ की मौजूदगी में हुई मैराथन बैठक में सभी तहसील और ब्लाक के अफसर मौजूद रहे। बैठक में डीएम के तेवर काफी सख्त रहे। उन्होंने गोशालाओं में सारे इंतजाम का निर्देश दिया। करीब डेढ़ घंटे की बैठक के बाद डीएम आवास में चले गए। उनके साथ सीडीओ तथा अन्य अफसर भी मौजूद रहे। उन लोगों के बीच देर रात तक मंत्रणा चलती रही। डीएम के जाने के बाद भी संगम सभागार में एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में देर रात तक बैठक चलती रही। बैठक में गोशालाओं के रखरखाव पर विस्तार से चर्चा हुई। उधर, गोशालाओं में सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने की कवायद शुरू कर दी गई। अफसरों को ब्लाक पर कैंप करने के लिए गया है। ब्लाक पर पशु चिकित्सकों की टीम भी लगा दी गई है। 35 से कहीं अधिक जानवरों के मरने की आशंका कांदी गांव की गोशाला में जिला प्रशासन की ओर से 35 पशुओं की मौत की पुष्टि की गई है। इसके विपरीत ग्रामीणों के अनुसार वास्तविक संख्या कहीं अधिक है। गोशाला में बने दलदल से पशुओं को निकालने का सिलसिला काफी देर तक चला। ऐसे में संख्या कहीं अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा गंभीर रूप से बीमार पशुओं को ट्रक पर लादकर दूर की गोशाला में भेज दिया गया है।

Advertisements
%d bloggers like this: