Sunday, August 1, 2021

लव-कुश के मंत्रमुग्ध करने वाले गीतों में विलीन हो गया कोरोना का कष्ट….

गोरखपुर के नवोदित कलाकारो से सजी फ़िल्म ‘ऑक्सीजन ‘के अभिनव प्रयास की खूब हो रही चर्चा

नवोदित कलाकारों को लेकर डॉ. सौरभ पाण्डेय की फ़िल्म 'ऑक्सीजन 'के अभिनव प्रयास ने रचा इतिहास

बड़हलगंज के बाबा जलेश्वरनाथ मंदिर के पोखरे का 98.5 लाख से होगा सुन्दरीकरण।

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Maharajganj: प्राथमिक विद्यालय हो रहे मरम्मत कार्य में घटिया तरीके का किया जा रहा है प्रयोग

Maharajganj/Dhani: प्राथमिक विद्यालय हो रहें मरम्मत कार्य में अत्यन्त घटिया किस्म के मसाले व देशी बालू का अधिकता और सिमेन्ट नाम मात्र...

Maharajganj: नालियों के टूट जाने और समय से सफाई न होने से लोग हो रहे परेशान, जांच कर सम्बन्धित कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई –...

महाराजगंज/धानी: महाराजगंज जनपद के धानी ब्लाक के अधिकारी भूल चूके हैं अपनी जिम्मेदारी। ग्राम सभा पुरंदरपुर के टोला केवटलिया में नाली टूट...

Maharajganj: दबंग पंचायत मित्र द्वारा किया जा रहा है अवैध नाली का निर्माण।

महराजगंज- फरेंदा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम सभा पिपरा तहसीलदार में पंचायत मित्र द्वारा अपने व्यक्तिगत नाली का निर्माण ग्राम सभा के मुख्य...

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अद्भुत ! अकल्पनीय !! आलौकिक !!! एक तरफ कोरोना की कष्टमय अनुभूति तो दूसरी तरफ करुणा का लहराता सागर। सागर की इन उत्ताल तरंगों में भय, संताप और दुख विलीन हो गये और मन जैसे त्रेता युग के रामराज्य में पहुंच गया। उत्तर रामायण की अंतिम दो कड़ियों ने चेतना के नये द्वार खोल दिये। इस धारावाहिक के दृश्य, संवाद, गीत, संगीत ने मन के तारों को झंकृत कर दिया। ऐसा लगा कि जब श्रीराम के दरबार में सचमुच का लव-कुश संवाद हुआ होगा तो कुछ ऐसा ही दृश्य रहा होगा। माता सीता ने जब मिथ्या आक्षेप से आहत हो कर धरती माता से गोद में लेने की पुकार की होगी तो राजा-प्रजा के हृदय पर ऐसा ही आघात लगा होगा। राजधर्म और निज धर्म की दुविधा में फंसे मर्याद पुरुषोत्तम जब वास्तव में चिंता निमग्न होंगे तो अयोध्या का कुछ ऐसा ही हाल रहा होगा। इस धारावाहिक को बनाने वाले विद्वान डॉ. रामानंद सागर को शत-शत नमन जिन्होंने इस डिजिटल युग में संस्कारों की महत्ता एक बार फिर प्रतिस्थापित की। धारावाहिक के गीत-संगीत रचने वाले विद्वान रवीन्द्र जैन जी को भी कोटि-कोटि नमन जिन्होंने रामायण के अनुरूप अपनी साहित्यिक योग्यता का प्रदर्शन किया। दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपनी इस अनुपम कृति से सदैव जीवित रहेंगे।

उत्तर रामायण, सेकेंड लास्ट एपिसोड

लव-कुश श्रीराम के दरबार में रामायण की कथा सुनाने आते हैं। दोनों भाई एक कर्णप्रिय गीत के माध्यम से रामकथा के हर प्रसंग का सजीव वर्णन करते हैं। रवीन्द्र जैन जी जैसा कोई साहित्य अनुरागी ही ऐसे गीत की रचना कर सकता था। इस गीत को स्वर दिया है कविता कृष्णमूर्ति, हेमलता, रवीन्द्र जैन, सुधा मलहोत्रा, शोभा जोशी और अरुण इंगले ने। स्वर और संगीत का यह अद्भुत संगम है। गीत सुन ऐसा लगता है जैसे किसी ने कानों में मिसरी घोल दी हो।

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हम कथा सुनाते हैं राम सकल गुणधाम की…

ये रामायण है पुण्यकथा श्रीराम की…

सीता प्रसंग

सीता प्रसंग

कुश की भूमिका स्वप्निल जोशी ने निभायी है जब कि लव की भूमिका मयूरेश क्षेत्रमादे ने निभायी है। इन दो छोटे बालकों ने अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी है। जब वे माता सीता का प्रसंग गाते हैं तो भावनाओं को समुद्र उमड़ जाता है-

कालचक्र ने घटनाक्रम में ऐसा चक्र चलाया…

राम-सिया के जीवन में फिर घोर अंधेरा छाया…

अवध में ऐसा एक दिन आया…

निष्कलंक सीता पे प्रजा ने मिथ्या दोष लगाया

अवध में ऐसा एक दिन आया…

भवनाओं का आवेग आंसुओं की धार में बाहर निकल पड़ता है

इस गीत को सुन कर मन उद्वेलित हो जाता है। भवनाओं का आवेग आंसुओं की धार में बाहर निकल पड़ता है। संतप्त मन ऐसे विचरने लगता है जैसे वह अयोध्या की सभा में उपस्थित हो। यह दृश्य फिल्मांकित था लेकिन हृद्य को किसी सत्य घटना की तरह तरंगित कर रहा था। जिसने भी इस दृश्य को देखा वह संवेदना के प्रवाह में प्लावित हो गया। कोरोना ने दिलों को बांट दिया था लेकिन उत्तर रामायण के कारुणिक प्रसंग ने इस भेद को मिटा दिया। सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय के कई दर्शकों ने अपनी राय जाहिर की। मोहम्मद सैफ अली खां ने ट्वीट किया- ‘लव-कुश के गाने का दृश्य बहुत ही भावुक करने वाला है। रामानंद सागर का निर्देशन अतिसुदंर है। रामायण हमें सब कुछ सिखाता है- प्यार, दुख दर्द और दया। इसलिए यह सबसे अधिक देखा जाने वाला सीरियल है। वृहत प्रणाम।’ किसी सीरियल के प्रभाव की यह चरम स्थिति है। काल्पनिक है लेकिन चमत्कारिक है।

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