Friday, September 17, 2021

लॉकडाउन : चप्पलें टूट गईं, पांव में पड़ गए छाले, गांव आए तो अपने हो गए बेगाने

गोरखपुर:- बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार गोरखपुर। दिल्ली...

Maharajganj: औकात में रहना सिखो बेटा नहीं तो तुम्हारे घर में घुस कर मारेंगे-भाजपा आईटी सेल मंडल संयोजक, भद्दी भद्दी गालियां फेसबुक पर वायरल।

Maharajganj: महाराजगंज जनपद में भाजपा द्वारा नियुक्त धानी मंडल संयोजक का फेसबुक पर गाली-गलौज और धमकी वायरल। फेसबुक पर धानी मंडल संयोजक...

खुशखबरी:-सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक को मंजूरी 1320 करोड़ स्वीकृत

गोरखपुर के लिहाज़ से एक बड़ी ख़बर प्राप्त हो रही है जिसमे यह बताया जा रहा है कि सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक...

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद कमलेश पासवान

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद बांसगांव लोकसभा के सांसद कमलेश पासवान ने कास्त मिश्रौली निवासी भाजपा नेता...

पूर्वांचल में मदद की परिभाषा बदलने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं युवा नेता पवन सिंह….

युवा नेता पवन सिंह ने मदद करने की परिभाषा पूरी तरह बदल दी है. उन्होंने मदद का दायरा इतना ज्यादा बढ़ा दिया...

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कोरोना काल में बुन्देलखंड के प्रवासी मजदूरों पर आई विपदा ने उनका जीवन दुखद बना दिया है। जिन कंपनियों और उद्योगों को काम के दम पर बुलंदियों पर पहुंचाया उन्होंने संकट के समय मुंह फेर लिया। भूखों मरने की नौबत आई तो घर-गृहस्थी उठाकर गांव आ गए। नंगे पांव चलते-चलते चप्पलें घिर गईं, पांव में छाले पड़ गए। इन कष्टों के साथ जब गांव पहुंचे तो यहां अपने ही बेगाने हो गए।

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41 डिग्री तापमान के बीच चिलचिलाती धूप में खेतों-बागों में खुद को क्वारंटीन किए ये लोग अपने काम खुद कर रहे हैं। छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ आने वालों ने अपनों को तबेलों में क्वारंटीन कर रखा है। कोरोना काल के 40-50 दिन जैसे-तैसे काटकर महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात में बुन्देलखंड के बांदा जिले में काम करने वाले 50 हजार से अधिक प्रवासी मजदूरों को जब रोटी की लाले पड़े तो गांव की ओर भागने लगे। बेबस मजदूरों के पास घर आने के लिए पैसे तक नहीं थे। संकट में जत्थे हजारों मील पैदल चलने से पांव में छाले पड़ गए। गांव पहुंचे तो दोस्तों ने मुंह फेर लिया। काका काकी व दादा-दादी ने पास आने से मना कर दिया।

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पत्नी खाना बनाकर चली जाती है, दोस्त कन्नी काट रहे
कमासिन के गांव तिलौसा में 178 लोग पिछले एक पखवारा में गांव पहुंचे। ये सभी लोग गांव के बाहर 41 डिग्री तापमान में खेतों व तालाबों के किनारे मड़ैया डाल कर रह रहे हैं। कमलेश बताते है कि खेत में रोजाना उनकी पत्नी आती है और दूर से भोजन बनाकर चली जाती है। दोस्त बसेरे की तरफ से कन्नी काट लेते हैं।

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