Monday, September 20, 2021

लॉक आउट से हुए वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण समाप्त – प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव

गोरखपुर:- बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बोरे में भरकर लाश को ठिकाने लगाने ले जा रहे जीजा साले को पुलिस ने किया गिरफ्तार गोरखपुर। दिल्ली...

Maharajganj: औकात में रहना सिखो बेटा नहीं तो तुम्हारे घर में घुस कर मारेंगे-भाजपा आईटी सेल मंडल संयोजक, भद्दी भद्दी गालियां फेसबुक पर वायरल।

Maharajganj: महाराजगंज जनपद में भाजपा द्वारा नियुक्त धानी मंडल संयोजक का फेसबुक पर गाली-गलौज और धमकी वायरल। फेसबुक पर धानी मंडल संयोजक...

खुशखबरी:-सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक को मंजूरी 1320 करोड़ स्वीकृत

गोरखपुर के लिहाज़ से एक बड़ी ख़बर प्राप्त हो रही है जिसमे यह बताया जा रहा है कि सहजनवा दोहरीघाट रेलवे ट्रैक...

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद कमलेश पासवान

दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई: सांसद बांसगांव लोकसभा के सांसद कमलेश पासवान ने कास्त मिश्रौली निवासी भाजपा नेता...

पूर्वांचल में मदद की परिभाषा बदलने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं युवा नेता पवन सिंह….

युवा नेता पवन सिंह ने मदद करने की परिभाषा पूरी तरह बदल दी है. उन्होंने मदद का दायरा इतना ज्यादा बढ़ा दिया...

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कोरेना महामारी के निदान के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जो लॉक डाउन का कदम उठाया गया। उससे बीमारी को फैलने से रोकने में सफलता तो मिल ही रही है। लेकिन उसकी वजह से इस समय मनुष्य की समस्त गतिविधियां भी बंद हैं। सड़कों पर वाहन नहीं चल रहे हैं। अधिकांश उद्योग धंधे बंद पड़े हुए हैं। कान-फोडु आवाज़े भी नहीं हो रही है। बेतहाशा बढ़ रही गर्मी पर भी लगाम लग गई है। अप्रैल के महीने में भी सुबह और शाम काफी सुहावनी प्रतीत हो रही है। गंगा – यमुना जैसे नदियां जो नाले में तब्दील हो चुकी थी। औद्योगिक अवसाद न गिरने की वजह से उनका भी पानी साफ हो गया है। यानि चाहे वायु प्रदूषण हो, जल प्रदूषण हो, ध्वनि प्रदूषण हो, सभी में उल्लेखनीय गिरावट आई है । इसकी वजह से एक ओर जहां बीमार होने वालों की संख्या में काफी गिरावट आई है। वहीं दूसरी ओर मौसमी बीमारियां भी लोगों को संक्रमित नहीं कर पा रही हैं।
कानपुर में लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण की मात्रा में भारी कमी आई है। जिन चौराहों पर वाहनों की भीड़ के चलते दम घुटता था, वहां एयर क्वालिटी इंडेस्क 50 के नीचे आ गया। विजयनगर 41.35, आईआईटी गेट 39.24, फूलबाग 38.5, किदवई नगर चौराहा 37.11, भैरोघाट 36.69, मोतीझील 37.10, सिंहपुर 40.63, गोल चौराहा 36.97, नौबस्ता चौराहा 42.27, रामादेवी चौराहा 39.92, जाजमऊ 36.43, टाटमिल चौराहा 39.44, जरीब चौकी 36.47 एयर क्वालिटी इंडेस्क पाया गया । लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेस्क 80 के भी नीचे पहुंच गया था । ग्रेटर नोएडा का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 178 से घटकर 90 के नीचे आ गया है । प्रयागराज में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 38 पर पहुंच गया है । इसी प्रकार यूपी के मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में भी पहली बार प्रदूषण पने न्यूनतम स्तर पर है । वातावरण में सल्फर डाईआक्साइड व नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा वातावरण में बेहद कम है। अलीगढ़ में लॉक डाउन से पहले पीएम 10 की मात्रा 136.7 माइक्रो ग्राम प्रतिघनमीटर थी जो छह अप्रैल को 86.7 माइक्रो ग्राम प्रतिघनमीटर हो गई है। पीएम 10 का मानक 100 माइक्रो ग्राम प्रतिघनमीटर है जो इस समय मानक से कम है। सल्फर डाईआक्साइड व नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा में भी गिरावट आई है। ध्वनि प्रदूषण मानक से कम हो गया है। यहाँ ध्वनि प्रदूषण सामन्यात: 77 से 80 डेसीबल के बीच रहता था, लेकिन सात अप्रैल को 40.6 डेसीबल रिकार्ड किया। लॉक डाउन के कारण अंबिकापुर शहर का वायु प्रदूषण काफी कम हो गया है। शहर में हर रोज 52 टन सूखा, गीला कचरा निकलता था उसमें भी एकाएक भारी गिरावट आ गई है।
लॉक डाउन के कारण तापमान में भी गिरावट आई है। जिसकी वजह से अप्रैल में भी सुबह – शाम मौसम काफी सुहावना हो जाता है ।
ध्वनि ही वह माध्यम है, जिसकी वजह से मनुष्य सभी जीवों, प्राकृतिक अवयवों से होने वाली आवाज सुनता है। ध्वनि की तीव्रता को मापने के लिए डेसीबेल इकाई निर्धारित की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार रात में 35 डेसीबेल और दिन 45 डेसीबेल से अधिक शोर नहीं होना चाहिए।
बढ़ते हुए शहरीकरण, परिवहन (रेल, वायु, सड़क) खनन के कारण शोर की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। वस्तुतः शोर और मानवीय सभ्यता सदैव साथ रहेंगे। ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख मानवीय स्रोत निम्न हैं- कल-कारखानों में चलने वाली मशीने, ताप विद्युत गृहों में लगे ब्यायलर, टरबाइन काफी शोर उत्पन्न करते हैं। अतः वहां ध्वनि प्रदूषण की तीव्रता अधिक है। ध्वनि प्रदूषण का एक प्रमुख कारण परिवहन के विभिन्न साधन भी हैं। भारत में चार पहिया और दो पहिया वाहनों की संख्या करोड़ों में है। मनुष्य अपने मनोरंजन के लिए विभिन्न साधनों का उपयोग करता है। विवाह सगाई, धार्मिक आयोजनों, मेंलों, पार्टियों में लाऊड स्पीकर का प्रयोग और डी.जे. के चलन भी ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है। हमारे देश में विभिन्न त्योहारों, उत्सवों, मेंलों, सांस्कृतिक/वैवाहिक समारोहों में आतिशबाजी एक आम बात है। मैच या चुनाव जीतने की खुशी भी आतिशबाजी द्वारा व्यक्त की जाती है। परन्तु इन आतिशबाजियों से वायु प्रदूषण के साथ ध्वनि प्रदूषण भी होता है। ध्वनि प्रदूषण द्वारा मानव चिड़चिड़ापन, नींद में व्यवधान एक आम समस्या है। इसके अलावा अगर ध्वनि की तीव्रता जब 90 डी.वी. से अधिक है, तो बहरेपन की शिकायत हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण के कारण मनुष्य में उच्च रक्तचाप, उत्तेजना, हृदय रोग, आँख की पुतलियों में खिंचाव तथा तनाव मांसपेशियों में खिंचाव, पाचन तंत्र में अव्यवस्था, मानसिक तनाव, अल्सर जैसे पेट एवं अंतड़ियों के रोग आदि। उच्च ध्वनि के कारण गर्भवती महिलाओं में गर्भपात भी हो सकता है लगातार शोर में जीवनयापन करने वाली महिलाओं के शिशुओं में विकृतियां उत्पन्न हो जाती हैं।
वायु हमारी जिन्दगी का अत्यन्त आवश्यक तत्व है। मानकीकरण के अनुसार वायु में 78.9 प्रतिशत नाइट्रोजन, 20.94 प्रतिशत आक्सीजन, 0.93 प्रतिशत आर्गन, .0319 प्रतिशत कार्बन डाई आक्साइड, . 0018 प्रतिशत नियान, . 00052 प्रतिशत हीलियम, 0.0001प्रतिशत क्रिप्टन, 0.00015 प्रतिशत मीथेन, 0.00005 प्रतिशत हाइड्रोजन, 0.00001 प्रतिशत कार्बन मोनो आक्साइड, 0.00025 नाइटरस आक्साइड, 0.000008 प्रतिशत जीनान, 0.000002 प्रतिशत ओज़ोन, 0.000002 सल्फर डाई आक्साइड, 0.000001 प्रतिशत अमोनिया, 0.000001 प्रतिशत नाइट्रोजन डाई आक्साइड,
वायु में जब सल्फर डाई आक्साइड , नाइट्रोजन आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, सालिड पार्टिकुलेट मैटेरियल, लौह कण, ओजोन, कार्बन डाई आक्साइड, हाइड्रोकार्बन्, मीथेन
आदि की मात्रा बढ़ती है, तो वायु प्रदूषण होता है। उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाली विभिन्न गैसें जैसे कार्बन डाई आक्साइड, सल्फर मोनो आक्साइड, सल्फर के. आक्साइड, हाइड्रोकार्बन्स, धूल के कण, वाष्प कणिकायें, धुंआ इत्यादि वायु प्रदूषण का मुख्य कारक हैं। खनिज गतिविधि के दौरान विस्फोटकों का प्रयोग वायु मण्डलीय प्रदूषण का कारण है। खनिजों के उत्खनन से उत्पन्न महीन कण भी वायुमण्डल को प्रदूषित करते हैं। भूमिगत खदानों से निकलने वाली हानिकारक गैसें भी वायुमण्डल के लिये हानिकारक हैं। नाभिकीय खनिजों के उत्खनन के समय उनसे निकलने वाले विकिरण भी वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
भारत में प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति जल जल की खपत 6,35,400 लीटर है । विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जल में किसी भी प्रकार के अवांछित पदार्थ की उपस्थिती, जिनके कारण जल की विशेषताओं में कमी होकर घातक प्रभाव या जल की उपयोगिता में कमी आती हो, जल प्रदूषण कहलाता है।प्रदूषित जल पीने से हैजा, टाइफाइड, पीलिया, दस्त, पेचिस, मलेरिया, पीला बुखार, फाइलेरिया आदि रोग हो जाते हैं।
कोरेना महामारी को नियंत्रित लॉक आउट के ही बहाने से ही अगर एक बार पूरा वातावरण परिशुद्ध हो चुका है। ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण लगभग समाप्त हो चुके हुए हैं। जिन गंगा यमुना की सफाई के लिए लाखों करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन उनका पानी शुद्ध नहीं पाया था, उनका जल भी शुद्ध हो चुका है। वायुमंडल पूरी तरह निर्मल हो गया है। प्रदूषण जनित बीमारियाँ लगभग न के बराबर हो गई हैं। ऐसे में अब भारत ही नहीं, सम्पूर्ण विश्व की यह ज़िम्मेदारी बन जाती है कि वह लॉक आउट समाप्त होने के बाद खुद को स्वयं नियंत्रित करे, अपनी गतिविधियों को नियंत्रित करे, जिससे पर्यावरण फिर इस स्तर तक प्रदूषित न हो जाए कि पृथ्वी पर मानव जीवन के समाप्त होने की भविष्यवाणी की जाने लगे। कोरेना वायरस के दुष्प्रभाव से पूरी दुनिया के लोगों ने यह जान लिया है कि विज्ञान और धन की एक लिमिटेशन है। अगर वह नही चेता, तो उसका धन भी यहीं रह जाएगा और विज्ञान को लेकर वह जो बहाने बनाता है, वे बहाने भी धरे की धरे रह जाएंगे ।
लॉक आउट से एक बात तो पूरी तरह सिद्ध हो गई कि जिस प्रदूषण को समाप्त करने की कोई कल्पना नहीं कर सकता था। ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि वह समाप्त हो गया। जिसकी वजह से लोग तमाम व्याधियों से पीड़ित थे, संक्रमित थे। वह भी दूर हो गया। इससे न केवल लोगों का मनोबल बढ़ा है, अपितु यह भी विश्वास हो गया है कि धन कमाने के लिए वह प्रकृति और वातावरण के साथ वह जो अनाचार – दुराचार कर रहा है। कोई ऐसी विपदा आएगी कि उसका धन भी काम नहीं आएगा और उसका ही नहीं, पूरी सृष्टि पर मानव जीवन ही समाप्त हो जाएगा।

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प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव
पर्यावरणविद, शिक्षाविद, भाषाविद,विश्लेषक, गांधीवादी /समाजवादी चिंतक, पत्रकार, नेचरोपैथ व ऐक्टविस्ट

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