लोकसभा और विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण मोदी कैबिनेट की मंजूरी

कैबिनेट मीटिंग में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण को 10 साल बढ़ाने पर मंजूरी दे दी है। इससे पहले 2009 में इसे बढ़ाया गया था। कैबिनेट द्वारा मंजूरी मिलने के बाद अब इसे संसद में पास कराया जाना है।

बता दें कि संविधान की धारा 334 के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण लागू किया गया था। लेकिन यह आरक्षण 10 साल के लिए लागू किया गया था। उसके बाद प्रत्येक 10वें साल में इसे 10 साल के लिए बढ़ाया जा रहा है। इससे पहले साल 2009 में यूपीए सरकार ने इसे 10 साल के लिए बढ़ाया था, जिसके बाद यह 25 जनवरी 2020 तक मान्य था। यदि संसद में यह बिल पास होता है तो इसे जनवरी 2030 तक के लिए अनुमति मिल जाएगी। यदि इसे पारित नहीं किया जाता है तो आने वाले विधानसभा चुनावों में आरक्षण प्रभावी नहीं होगा।

गौरतलब है कि विपक्ष कई बार केंद्र सरकार पर दलित विरोधी होने का अरोप लगता रहा है। ऐसे में सरकार के लिए इस बिल को पास कराना बेहद जरूरी है। हालांकि इसकी संभावना भी न के बरारब हैं कि विपक्ष सदन में इस बिल का विरोध करे। ऐसे में इस बिल को पास कराया जाना लगभग तय माना जा रहा है। सरकार के मंत्रियों की तरफ से भी कई बार कहा जा चुका है कि आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

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