Monday, August 2, 2021

विकट परिस्थितियों में देश के साथ खड़ा होने का नाम है समाजवाद – प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव

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इस समय पूरा विश्व कोरेना नामक वायरस के कारण उत्पन्न हुई महामारी से लड़ने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दी गई गाइड लाइन के अनुसार अपने – अपने यहाँ लॉक आउट घोषित किए हुए हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने यहाँ आज से ठीक 21 दिन पहले 21 दिनों के लिए लॉक डाउन घोषित किया। आज उसकी अवधि समाप्त हो रही थी, लेकिन उसके पूर्व ही 10 बजे मीडिया के माध्यम से देश को संबोधित करते हुए 19 दिन के लिए लॉक डाउन की अवधि को बढ़ा दिया । उसमें एक सप्ताह तक बड़ी ही कड़ाई करने का भी संकेत दिया। उन्होने देश की जनता से हाथ जोड़ कर अपनी विवशता भी जताई ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि ‘नमस्ते मेरे प्यारे देशवासियों ! कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई, बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है । आपकी तपस्या, आपके त्याग की वजह से भारत अब तक, कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा है । आप लोगों ने कष्ट सहकर भी अपने देश को बचाया है. हमारे इस भारतवर्ष को बचाया है. मैं जानता हूं. आपको कितनी दिक्कतें आई हैं, किसी को खाने की परेशानी, किसी को आने जाने की परेशानी, कोई घर परिवार से दूर है । लेकिन आप देश के खातिर एक अनुशासित सिपाही की तरह अपने कर्तव्य निभा रहे हैं । मैं आप सबको आदर पूर्वक नमन करता हूँ ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का यही सुझाव है कि लॉकडाउन को बढ़ाया जाए। यानि तीन मई तक हम सभी को, हर देशवासी को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालनहम धैर्य बनाकर रखेंगे, नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना जैसी महामारी को भी परास्त कर पाएंगे।
उन्होने देश के सभी नागरिकों से निम्नलिखित सात बातों पर साथ मांगते हुए अपील की – अपने घर के बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, विशेषकर ऐसे व्यक्ति जिन्हें पुरानी बीमारी हो, उनकी हमें अधिक देखभाल करनी है, उन्हें कोरोना से बहुत बचाकर रखना है। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी की लक्ष्मण रेखा का पूरी तरह पालन करें, घर में बने फेसकवर या मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें। अपनी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें, गर्म पानी और काढ़ा का निरंतर सेवन करें। कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने में मदद करने के लिए आरोग्य सेतु मोबाइल एप जरूर डाउनलोड करें। दूसरों को भी इस एप को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करें। जितना हो सके गरीब परिवारों की देखरेख करें उनके भोजन की आवश्यकता पूरी करें। आप अपने व्यवसाय अपने उद्योग में अपने साथ काम करे लोगों के प्रति संवेदना रखें और किसी को नौकरी से न निकालें। देश के कोरोना योद्धाओं, हमारे डॉक्टर, नर्सों, सफाई कर्मियों और पुलिसकर्मियों का पूरा सम्मान करें। पूरी निष्ठा के साथ तीन मई तक लॉकडाउन के नियमों का पालन करें, जहां हैं वहां रहें, सुरक्षित रहें।
आज भारत के पास भले ही सीमित संसाधन हों, लेकिन मेरा भारत के युवा वैज्ञानिकों से विशेष आग्रह है कि विश्व कल्याण के लिए और मानव कल्याण के लिए आगे आएं और कोरोना की वैक्सीन बनाने का बीड़ा उठाएं। हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जहां जनवरी में हमारे पास कोरोना की जांच के लिए सिर्फ एक लैब थी, वहीं अब 220 से अधिक लैबों में टेस्टिंग का काम हो रहा है। भारत में आज हम एक लाख से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था कर चुके हैं। इतना ही नहीं 600 से भी अधिक ऐसे अस्पताल हैं जो सिर्फ कोविड-19 के इलाज के लिए काम कर रहे हैं। इन सुविधाओं को और तेजी से बढ़ाया जा रहा है। न खुद कोई लापरवाही करनी है और न ही किसी और को लापरवाही करने देना है। कल इस बारे में सरकार की तरफ से एक विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) जारी की जाएगी। नए दिशा-निर्देश बनाते समय किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। अगले एक सप्ताह में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में कठोरता और ज्यादा बढ़ाई जाएगी। 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले और हर राज्य को परखा जाएगा। देखा जाएगा कि वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है और उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है। जो क्षेत्र इस अग्निपरीक्षा में सफल होंगे और जो हॉटस्पॉट में नहीं होंगे, वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। मेरी सभी देशवासियों से ये प्रार्थना है कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। स्थानीय स्तर पर अब एक भी मरीज बढ़ता है तो ये हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इसलिए हमें हॉटस्पॉट को लेकर बहुत ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। जिन स्थानों के हॉटस्पॉट में बदलने की आशंका है उसपर भी हमें कड़ी नजर रखनी होगी। जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 मामले थे तभी भारत ने 21 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था। भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया बल्कि जैसे ही समस्या दिखी तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया। देशवासियों की वजह से हम कोरोना वायरस के नुकसान को काफी हद तक संभालने में कामयाब रहे हैं। आप लोगों ने कष्ट सहकर भी देश को बचाया है। मैं जानता हूं आपको काफी परेशानियां उठानी पड़ी हैं लेकिन आप देश की खातिर अनुशासित सिपाही की तरह अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
उनके इस अभिभाषण के बाद ही विपक्ष के कुछ नेताओं और आलोचकों ने कुछ सवाल उठाए। मैं नहीं कहता कि उन्हें सवाल नहीं उठाना चाहिए। लेकिन समाजवाद के अनुसार विपत्ति के समय, आपातकाल के समय, महामारी के समय समाजवाद का दर्शन हमें यही सिखाता है कि हमने सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए। सरकार की मदद भी करना चाहिए । लेकिना ऐसा नहीं हुआ । भाषण समाप्त होते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती दोनों ने प्रधानमंत्री की बातों में नुक्ताचीनी निकालते हुए कटाक्ष कर दिया ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा है कि जब कोरोना के केस नहीं थे तब ही विभिन्न एअरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी गयी थी लेकिन सवाल ये है कि वो कितनी गंभीर और सार्थक रही । अगर ये सच है तो फिर ये बताया जाए कि कोरोना हमारे देश में पहले पहल कैसे आया । आगे उन्होने सुझाव भी दिया कि जब सार्थक काम होंगे, तब ही सच में देश का भला होगा । यह कटाक्ष उन्होने ट्वीट के माध्यम से किया ।
इसी प्रकार बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि लॉक डाउन में सभी राज्य सरकारों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के लोगों की उपेक्षा की। उन्हें कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई। बसपा सुप्रीमों ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 129वीं जयंती पर नमन करने के बाद कहा कि कोरोना वायरस को लेकर से देश भर में लागू लॉकडाउन की वजह से दलितों और अति पिछड़ों की स्थिति और दयनीय हो गई है। सरकार की उपेक्षा के कारण देश के कई हिस्सों से लोग पलायन करने को मजबूर हुए । पलायन करने वालों में 90 अनुसूचित जाति और अति पिछड़े वर्ग के लोग हैं । उन्होने सरकार से अपेक्षा की कि लॉक बढ़ाने के साथ सरकार को गरीबों, मजदूरों, किसानों और अन्य मजदूर वर्ग के हितों को ध्यान में रखना चाहिए ।
मैं इन दोनों नेताओं को गलत नहीं ठहरा रहा हूँ। दोनों राजनेता हैं, उनका धर्म है कि वे राजनीति करें । लेकिन ऐसे संकट काल में राजनीति ठीक नहीं है। इन नेताओं की देखा-देखी सोशल मीडिया पर उनके समर्थक उनसे सैकड़ों कदम आगे बढ़ कर कमेन्ट कर रहे हैं। जो समाजवादी दर्शन के अनुसार बिलकुल गलत है। या तो अब ये पार्टियां डॉ राम मनोहर लोहिया से लेकर मुलायम सिंह के वसूलो और सिद्धांतों को मानती नहीं, या अब उन्हें स्माजवाद के दर्शन से कुछ लेना – देना नहीं है। ऐसा करके उनको राजनीतिक रूप से नुकसान हो रहा है। देश की जनता भूख – प्यास सह कर भी सरकार और प्रशासन द्वारा दिये गए निर्देशों का पालन कर रही है। प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में भी गरीबों की सेवा के संकेत दिये। मायावती का भी आरोप सही है, अनुसूचित और और अति पिछड़े ही अधिक संख्या में गरीब हैं, और अगर सरकार की व्यवस्था उन तक नहीं पहुंची है, तो स्वाभावित रूप से पीड़ित वर्ग अनुसूचित जाति और अति पिछड़े वर्ग से ही लोग होंगे ।
इन दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता इस समय गरीबों की मदद करने में जुटे हुए हैं। गरीबों और मज़लूमों को भोजन और अन्य जरूरत के सामान मुहैया करवा रहे हैं। ऐसे समय में जब क्षेत्र की जनता के मन में उनके प्रति विश्वास पैदा हो रहा है। ऐसे समय में इस प्रकार की प्रतिक्रिया उचित नहीं है । अपने इस प्रकार के बयानों पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती को फिर से विचार करना चाहिए और समाजवाद के दर्शन के जो अनुरूप हो, वैसे ही कदम उठाने चाहिए ।

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प्रोफेसर डॉ योगेन्द्र यादव
पर्यावरणविद, शिक्षाविद, भाषाविद,विश्लेषक, गांधीवादी /समाजवादी चिंतक, पत्रकार, नेचरोपैथ व ऐक्टविस्ट

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