Sunday, June 16, 2019
Gorakhpur

शोध पीठ करेगी नाथ पंथ की आध्यात्मिक शक्तियों का रहस्योद्घाटन: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की योग व आध्यात्मिक संस्कृति में पूरी दुनिया के नेतृत्व की क्षमता है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर यूनेस्को ने इस पर मुहर लगाते हुए पूरी दुनिया के लिए 21 जून को योग दिवस घोषित किया। दुनिया भर के वैज्ञानिकों के लिए जो ब्रह्मांड आज भी रहस्यों से भरा पड़ा है, उस ब्रह्मांड के बारे में महायोगी गुरु गोरक्षनाथ ने कहा था, ‘पिंड मा ही ब्रह्मांड समाया। उम्मीद है कि गुरू गोरक्षनाथ शोध पीठ भी नाथ पंथ की आध्यात्मिक शक्तियों का रहस्योद्घाटन लोक कल्याण के लिए करेगी।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को डीडीयू के क्रीड़ा संकुल में गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ के शिलान्यास समारोह व एनएसएस के योग संगम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया हमें किस रूप में देखती है, इस पर विचार किए बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते। जिस तरह से प्रधानमंत्री की पहल पर दुनिया के 192 देश अब 21 जून को योग दिवस मनाकर उत्साहित हो रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि दुनिया को हमारी सांस्कृतिक विरासत आध्यात्मिकता में लोककल्याण दिखता है। महायोगी गुरु गोरक्षनाथ का हमारी ऋषि परंपर विशिष्ट स्थान है।

उनका प्रभाव राजवंशों से लेकर आदिवासियों तक में है। मैंने पिछले दिनों त्रिपुरा, असोम, नगालैंड आदि के जाकर यह खुद देखा है कि नाथ पंथ के अनुयायी पूरे देश में प्रचुर मात्रा में फैले हैं। गुरु गोरक्षनाथ ने कहा था कि मनुष्य के शरीर में वह क्षमता है कि वह आध्यात्म से अपना दिव्य ज्ञान जगाकर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे। योगी ध्यान, एकाग्रता से जिस तरह मोक्ष की कामना करते हैं, विद्यार्थियों को भी शिक्षा में पारंगतता के लिए कमोबेस उसी तरह के ध्यान व एकाग्रता की जरूरत है। योग की सबसे जरूरी विधा आसन है। आज एक जगह धैर्य पूर्वक बैठकर कितनी देर एकाग्रचित रह सकते हैं, आसन इसी पर निर्भर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध पीठ की स्थापना के लिए मैं जिस तरह के उद्देश्यों व गाइडलाइन की कामना कर रहा था, डीडीयू प्रशासन ने उसी से मिलते जुलते रूप में अच्छे से तैयार किया है। खास तौर से विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित बनाने में हमारी आध्यात्मिक परंपरा कारगर सिद्ध होगी। उम्मीद है कि डीडीयू शोध पीठ को इसी रूप में विकसित करेगा।

समारोह के विशिष्ट अतिथि यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति समग्र विकास की अवधारणा पर आधारित है। हमारी परंपरा यूरोप की तरह के केवल माइंड एंड हैंड की मजबूती व विकास की बात नहीं करती बल्कि मस्तिष्क व शरीर के साथ हृदय के विकास की भी बात करती है। इसे आध्यात्मिक विकास कहते हैं। प्राचीन काल में केवल भारत ही इसकी बात करता था मगर अब यूनेस्को व डब्ल्यूएचओ जैसी अंतर्राष्ट्रीय मानदंड निर्धारित करने वाली संस्थाएं भी होलिस्टिक एजुकेशन व स्प्रिचुअल डाइमेंशन अनिवार्य बताते हैं। विश्वविद्यालयों के विकास में आध्यात्मिक गुरुओं व ऋषियों का साननिघ्य जरूरी है। बीएचयू की स्थापना में मालवीय जी ने संत अतर सिंह का सान्निध्य पाया। गोविवि की स्थापना में महंत दिग्विजयनाथ का आशीर्वाद मिला। अब डीडीयू को गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ के जरिए नाथ पंथ के तमाम योगी महात्माओं का सान्निध्य मिलेगा।

प्रो. सिंह ने आगे कहा कि नैक मूल्यांकन हर उच्च शिक्षण संस्थान के लिए अनिवार्य है। मूल्यांकन नहीं कराने वालों को यूजीसी की सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है। इसलिए सभी अनिवार्य रूप से तरह मूल्यांकन कराएं। अब यह व्यवस्था भी बना दी गई है कि कोई भी संस्था हाई ग्रेड वाले संस्थानों से अपनी तैयारियों के लिए मदद ले सकता है। उन्होंने इस पर खुशी जताई कि अब उच्च शिक्षण संस्थानों में लड़कों के बराबर ही लड़कियों की संख्या पहुंच गई है। अतिथियों का स्वागत कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बताया। संचालन गोरक्षनाथ शोधपीठ के विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर सिंह ने बताया। एनएसएस समन्वयक डॉ. केशव सिंह ने आभार ज्ञापन किया। इससे पूर्व मुख्यमंत्री व यूजीसी के चेयरमैन ने शोध पीठ के भवन का शिलान्यास किया।

नाथ पंथ पर पुस्‍तक का किया विमोचन

वेबसाइट लांच की और पीठ के अधिशाषी समिति के सदस्य डॉ. प्रदीप राव की किताब ‘नाथ पंथ का विमोचन कर पीठ की प्रकाशक की भूमिका का शुभारंभ किया।

शोध पीठ के पहले आजीवन सदस्य बने यूजीसी के चेयरामैन व कुलपति

गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ का वेबसाइट लांच करने के बाद विशेष कार्याधिकारी प्रो. रविशंकर ने ऑनलाइन औपचारिकताएं पूरी कर यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह व डीडीयू के कुलपति प्रो. वीके सिंह को पीठ का आजीयन सदस्य बनाया। वेबसाइट पर देश व दुनिया भर में कहीं बैठा व्यक्ति सदस्य बन सकता है। शोध पीठ के रिसर्च, प्रकाशन व कार्यों के बारे में उसे घर बैठे सभी तरह कर जानकारियां मिलेंगी।

13 हजार एनएसएस स्वयंसेवकों ने एक साथ किया योग

मुख्यमंत्री से आगमन से पहले डीडीयू व संबद्ध कॉलेजों के करीब तेरह हजार एनएसएस स्वयंसेवकों ने एक साथ योग किया। योग संगम में योग की क्लास बीस मिनट चली। इसमें प्रशिक्षक राजेशेखर ने आसन, प्राणायाम, कपालभांति आदि का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में राकेश श्रीवास्तव ने गोरखबानी का संगीतमय पाठ कर माहौल को आध्यात्मिकता से जोड़ने का प्रयास किया। डॉ. कन्हैया सिंह ने योग व गोरखनाथ विषय पर अपने विचार रखे।

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