Tuesday, August 3, 2021

सवाल-जवाब: 21 दिनों के कोरोना लाकडाउन के बाद क्या, और अभी की स्थिति…

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भारत में कोरोना (coronavirus infections in india) के मरीजों की संख्या को लेकर अलग अलग तरह की बातें कही जा रही हैं. कुछ का अंदाज है कि भारत में भी कोरोना विस्फोट हो सकता है. कुछ का मानना है कि भारत में सही समय पर लॉक डाउन किया गया है, जिससे हम स्थिति को कंट्रोल में कर सकते हैं. इस बारे में उठ रहे तमाम सवाल जवाब

भारत ने 21 दिनों का लाकडाउन क्यों किया
भारत की आबादी 130 करोड़ से ऊपर है. अगर देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलना शुरू होता तो इसके रिजल्ट काफी घातक होते और इसे रोकना मुश्किल हो जाता. इसीलिए भारत ने देश में कोरोना के असर को कम से कम करने के लिए लाकडाउन का फैसला किया.

भारत में कोरोना का पहला मरीज कब दर्ज किया गया
– इसे लेकर अलग अलग आंकड़े हैं. माना जाता है कि देश में पहला कोरोना पॉजिटिव 30 जनवरी को मिला. लेकिन कुछ का मानना है कि भारत में इसका तेज संक्रमण इटली से फरवरी में भारत आए पर्यटकों के चलते फरवरी के मध्य हुआ. हालांकि इन दोनों मामलों में मार्च के आखिर या अप्रैल के पहले हफ्ते तक भारत में कोरोना के वास्तविक संक्रमण का अंदाज हो जाएगा. 21 दिनों के लाकडाउन के कारण कोरोना का ज्यादा फैलाव रुकेगा.

क्या इटली और भारत में कोरोना लगभग एक ही समय रिकॉर्ड हुआ था
अगर विकीपीडिया पर दी जानकारी को मानें तो इटली और भारत दोनों ही जगह कोरोना 30 जनवरी से 10 फरवरी के बीच पहली बार रिकॉर्ड हुआ. इसके बाद 22 फरवरी तक इटली में इसके केस काफी बढ़ गए थे और मार्च के पहले हफ्ते तक वहां मौतों की झड़ी लग गई. उस हिसाब से भारत में कोरोना अब तक काफी नियंत्रित रहा है. आशंका के खिलाफ इसका फैलाव उस तरह अब तक नहीं नजर नहीं आया है. हमारे यहां 21 फरवरी तक कोरोना के करीब 80 मरीज थे. इसी दौरान पहली मौत हुई.

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क्या ये माना जाए कि इटली और स्पेन की तुलना में भारत में ये ज्यादा नियंत्रित रहा है
-बेशक, इटली, स्पेन और भारत में कोरोना के शुरुआती संक्रमण लगभग साथ ही हुए लेकिन वहां ये तेजी से फैला. भारत में अभी वो स्थिति नहीं है. हालांकि अमेरिका में इसका पहला मरीज फरवरी के बीच में पाया गया था लेकिन मार्च के पहले हफ्ते से वहां बहुत तेजी से फैल गया.

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दुनिया के अन्य देशों की हालत क्या है
– दुनिया के सभी छह महाद्वीपों में ये फैल चुका है लेकिन आमतौर पर ये दुनियाभर में मार्च के पहले हफ्ते में फैलना या पहुंचना शुरू हुआ है. इस लिहाजा पूरी दुनिया में अगले 21 दिन खासे अहम होंगे. ये पता लग जाएगा कि दुनिया में इसकी स्थिति क्या है.

भारत में कोरोना की असली स्थिति का अंदाज कब तक होगा
– भारत में भी कोरोना के मरीज मार्च के पहले हफ्ते से बढ़़ने शुरू हुए हैं. लिहाजा असली तस्वीर मार्च के आखिरी हफ्ते तक साफ हो जाएगी. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि लाकडाउन के बावजूद अप्रैल में वास्तविक तस्वीर सामने आएगी. भारत में पूरी तरह लाकडाउन का पालन नहीं करना खतरनाक हो सकता है.

क्या भारत ने लाकडाउन का फैसला सही समय पर किया है
-काफी हदतक ये कहा जा सकता है कि भारत में 21 दिनों का लाकडाउन का फैसला तभी कर लिया गया, जब ये फैलना शुरू ही हो रहा था. लिहाजा भारत में अगले 21 दिन बहुत संवेदनशील हैं और इतने दिनों देश में कोरोना के वास्तविक मरीज सामने आ जाएंगे. लाकडाउन से इसका फैलाव भी काफी हद तक रुक जाएगा.

भारत में टेस्टिंग की रफ्तार कैसी है
– भारत में इसकी रफ्तार बहुत धीमी है. इतनी बड़ी आबादी वाले देश में बहुत ज्यादा टेस्टिंग शायद संभव भी नहीं. जापान जैसे देश में भी टेस्टिंग को बहुत नियंत्रित रखा गया है. वैसे भारत में सरकार प्राइवेट किट और 12 प्राइवेट टेस्टिंग लैब की व्यवस्था कर चुकी है. देशभर में कोरोना के टेस्ट के लिए 15000 कलेक्शन सेंटर्स हैं. लेकिन हकीकत ये है कि देश में बड़े पैमाने पर टेस्टिंग शायद ही हो पाए. लेकिन लाकडाउन के दौरान काफी हद तक वो लोग सामने आ जाएंगे, जो वास्तविक तौर पर संक्रमित है. ऐसे में सरकार उनके ग्रुप्स या मिलने वाले लोगों की टेस्टिंग कर सकती है.

वास्तविक तौर पर भारत में टेस्टिंग किट और वेंटीलेटर कितने हैं
हालांकि भारत के स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में कहा है कि हमारे पास एक लाख टेस्टिंग किट हैं और जल्दी ही हम और भी ऐसी किट्स का उत्पादन कर लेंगे.
हेल्थ मिनिस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि देशभर में फिलहाल 30,000 वेंटीलेटर्स हैं. 800 अकेले मुंबई में ही हैं. इनकी संख्या बढ़ाने की जरूरत तो है लेकिन ट्रैवल प्रतिंबंधों के चलते तेजी से और वेंटीलेटर्स की व्यवस्था करना आसान नहीं.

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जो लोग पिछले दिनों में विदेश से लौट कर आए हैं, क्या उन पर नजर रखी जा रही है
– सरकार की ओर घोषणा हुई है कि विदेश से लौटने वालों का पूरा रिकॉर्ड उनके पास है. ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है या उन्हें खुद तय सेंटर्स पर आकर अपनी जानकारी देने के कहा जा रहा है. उनके घरों को आइसोलेट किया जा सकता है या फिर उन्हें कोरेंटीन में रहने के लिए कहा जा सकता है.

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क्या भारत में अब भी कोरोना विस्फोट का डर है
सर गंगाराम अस्पताल के लंग सर्जन अरविंद कुमार ने एक इंटरव्यू में आशंका जाहिर की है कि इंफेक्शन फैल रहा है और ये विस्फोट का रूप ले सकता है. उनका कहना है कि आधिकारिक तौर पर घोषित किए गए नंबर अभी बहुत कम हैं. ये बढ़ेंगे.

भारत के हेल्थ केयर की स्थिति कैसी है
– ये सही है कि भारत में गांवों गांवों तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और कस्बे से जिलों तक अस्पताल हैं. साथ ही प्राइवेट अस्पताल भी हैं लेकिन ये ढांचा पर्याप्त नहीं होगा. लाकडाउन की स्थिति में भारत इसे दुरुस्त करना चाहेगा.

संक्रमण रोकने में सबसे बड़ी दिक्कत क्या है
-पिछले दिनों बड़े पैमाने पर लोग अपने अपने घरों की ओर लौटे हैं. इसमें ज्यादातर श्रमिक हैं, जो गांवों में अपने घरों में गए हैं. ऐसे लोग बड़ी समस्या बन सकते हैं. उसी तरह पैनिक बाइंग में लगने वाली भीड़ भी हालत बिगाड़ सकती है. उसी तरह लाक डाउन में बाहर निकलने वाले लोगों से भी समस्या हो सकती है.


क्या 21 दिनों का लाकडाउन असरदार हो सकता है
ज्यादातर एक्सपर्ट यही मानते हैं. चीन, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया में यही किया गया, इसके बेहतर रिजल्ट मिले हैं. वैसे भी कोरोना का मूल साइकिल 14 दिनों का है. इसमें ये कोविड-19 पूरी तरह उभर आता है.

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