Monday, August 2, 2021

सिर्फ 14 दिनों मे इटली के इस पूरे गांव को कोरोना ने साफ कर दिया, अभी भी आप लोगो को..

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कोरोना वायरस (Corona Virus) के बढ़ते मामलों की वजह से इटली की तकलीफें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. देश में इस वैश्विक महामारी की वजह से अब तक 10,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. कुल संक्रमित मामलों की संख्या तकरीबन 90,000 है. बुजुर्ग लोगों की आबादी का प्रतिशत ज्यादा होने की वजह से इटली में मौत के मामले अधिक हैं. लेकिन इन सारी दुखभरी खबरों के बीच में इटली के एक कस्बे की कहानी उम्मीद जगाती हैं.

VO-EUGANIO नाम के एक छोटे से कस्बे ने, जिसकी आबादी 33,00 के आसपास है, ये उम्मीद जगाई है. ये कस्बा उत्तरी इटली में पड़ता है. उत्तर इटली इस समय कोरोना बीमारी का यूरोप में एपीसेंटर है. इटली का यही हिस्सा यूरोप के अन्य देशों में इस बीमारी के फैलाव की मुख्य वजह माना जा रहा है. यहां संक्रमण का प्रतिशत इस समय चीन के वुहान से भी ज्यादा हो गया है. तो फिर वह छोटा सा कस्बा जिसका नाम VO-EUGANIO है, खुद को कैसे बचा ले गया?

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दरअसल, 21 फरवरी को इस कस्बे में कोरोना की वजह से पहली मौत हुई थी. इससे पहले कस्बे में कोरोना संक्रमण के काफी सारे मामले सामने आए थे. जैसे ही पहली मौत की घटना सामने आई पूरे इलाके को तुरंत लॉकडाउन कर दिया गया. किसी भी व्यक्ति को इस कस्बे से बाहर जाने या अंदर आने की अनुमति नहीं थी. जरूरत के सामान जैसे दवाएं, खाना प्रशासन द्वारा पहुंचाया जा रहा था. 21 फरवरी से 6 मार्च के बीच कस्बे के सभी लोगों की कोरोना टेस्टिंग की गई. जिनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं थे, उनकी भी जांच की गई.

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प्रशासन की इस तेज प्रक्रिया से दो फायदे हुए. पहला लॉकडाउन की वजह से लोग अपने घरों के भीतर सिमटकर रह गए. इससे बाहर बीमारी फैलने का खतरा कम हो गया. और 14 दिनों के भीतर कराई गई तेज टेस्टिंग की वजह से संक्रमण के मामले सामने आते चले गए. दूसरा, टेस्टिंग में जो लोग पॉजिटिव पाए गए उन्हें तुरंत आइसोलेशन में रखकर इलाज शुरू कर दिया गया.

3 प्रतिशत आबादी थी संक्रमित
कस्बे की पूरी जनसंख्या के करीब 3 प्रतिशत लोग संक्रमित मिले. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से ज्यादातर लोगों के भीतर तब बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे. एक शोध के मुताबिक कोरोना के फैलने में साइलेंट कैरियर का बड़ा हाथ है. साइलेंट कैरियर वे लोग होते हैं जो बीमारी के लक्षण नजर आने के पहले कई दूसरे लोगों को संक्रमित कर चुके होते हैं. तकरीबन दो हफ्ते तक चले सख्त लॉकडाउन की वजह से कस्बे में संक्रमित लोगों का प्रतिशत 13 मार्च 0.25 प्रतिशत पर पहुंच गया. 13 मार्च के बाद इस कस्बे में संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया.

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टेस्टिंग के पहले राउंड में कस्बे में करीब 90 लोग संक्रमित पाए गए थे. 13 मार्च को दूसरी टेस्टिंग के नतीजों में यह संख्या सिर्फ 6 थी. यह नतीजे सिर्फ यूनिवर्सल टेस्टिंग प्रक्रिया की वजह से सामने आए हैं.यह कस्बा न केवल इटली बल्कि पूरी दूनिया के लिए नजीर है कि कैसे एक बेहतर रणनीति बनाकर कोरोना जैसी महामारी से लड़ा जा सकता है. सिर्फ 14 दिनों के भीतर इस कस्बे ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को मात दे दी.

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टेस्टिंग की सही प्रक्रिया
अब अगर सबक की बात की जाए तो इटली या फिर दुनिया के अन्य देश ज्यादातर उन्हीं लोगों को टेस्ट कर रहे हैं जिनमें बीमारी के लक्षण सामने आ चुके हैं. इस कस्बे ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई के मूल बिंदु को समझा. टेस्टिंग का पैमाना बढ़ाकर हर उस आदमी को टेस्ट किया जो संक्रमण के दायरे में आ चुका था या आ सकता था, यानी जिनमें लक्षण दिख रहे थे और जिनमें नहीं भी दिख रहे थे.

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