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Friday, May 29, 2020

10 फीसदी आरक्षण के बाद गरीब सवर्णों को उम्र सीमा में छूट की तैयारी में मोदी सरकार….

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Gorakhpur Times | गोरखपुर टाइम्स

नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण का तोहफा दिया था. सामान्य वर्ग के अभ्यार्थियों की नियुक्तियों में अधिकतम उम्र सीमा छूट को लेकर सवर्ण समुदाय के एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत से मुलाकात की थी. इसके बाद सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय ने इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को पत्र लिखकर इस बारे में अनुरोध किया है. बता दें कि नियुक्तियों में ओबीसी समुदाय के अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में तीन वर्ष तक की छूट मिलती है. जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के अभ्यर्थियों को पांच साल की छूट दी जाती है. ओबीसी और दलित समुदाय की तर्ज पर सामान्य वर्ग के अभ्यार्थियों के आयु सीमा में छूट की मांग की गई है.
सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत की ओर से केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि अलग-अलग लोगों से प्रतिवेदन मिले हैं. इनमें सामान्य वर्ग की श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नियुक्तियों में उम्र सीमा में छूट देने की मांग की गई है. सरकारी नियुक्तियों में अन्य आरक्षित वर्गों के एससी, एसटी और ओबीसी को अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी जाती है. केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने आजतक को बताया कि सामान्य वर्ग के लोग आयु सीमा में छूट के लिए एक प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की थी, जिसके बाद उनकी मांगों को लेकर हमारे मंत्रालय ने डीओपीटी को पत्र लिखा है. बता दें मोदी सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान देने के लिए कदम उठाया और उसे कानूनी अमलीजामा पहनाने का काम किया. इसके बाद बीजेपी शासित कई राज्यों में सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण व्यवस्था को लागू कर दिया है. इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने 10 फीसदी सीटें भी अतरिक्त बढ़ा दी हैं.

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